तुम चिरंतन, मैं लघुक्षण लक्ष वंदन, कोटी वंदन ॥
मैं देव नित अरहंत चाहूँ, सिद्ध का सुमिरन करौं । मैं सुर गुरु मुनि तीन पद ये, साधुपद हिरदय धरौं ॥
मिथ्यातम नासवे को, ज्ञान के प्रकासवे को, आपा-पर भासवे को, भानु-सी बखानी है ।
सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि, निजानंद रसलीन सो जिनेन्द्र जयवंत नित, अरि-रज-रहस विहीन ॥
बन्दौं श्री अरिहंत परम गुरु, जो सबको सुखदाई इस जग में दुख जो मैं भुगते, सो तुम जानो राईं ॥
दिन रात मेरे स्वामी, मैं भावना ये भाऊँ, देहांत के समय में, तुमको न भूल जाऊँ ॥टेक॥
गौतम स्वामी बन्दों नामी मरण समाधि भला है मैं कब पाऊँ निश दिन ध्याऊँ गाऊँ वचन कला है ॥
जो मोह माया मान मत्सर, मदन मर्दन वीर हैं जो विपुल विघ्नों बीच में भी, ध्यान धारण धीर हैं ॥
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करू प्रणाम उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ॥१॥
Add Your Heading Text Here English Pronunciation Bhaktamar pranat maulimaniprabhanam muddyotakam dalita pap tamovitanam. Samyak pranamya jin pad yugam yugada- valambanam bhavajale patataam jananam. English Meaning Having duly bowed down at the feet of Bhagwan Adinath, the first Tirthankar, the divine glow of his nails increases luster of jewels of their crowns. Mere touch of […]
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