देवेन्द्रकीर्ति ने कालिकापुराणकी रचना की है। देवेन्द्रकीति मराठी साहित्य के ऐसे कवि हैं, जिन्होंने धर्म, दर्शन और काध्यकी त्रिवेणीको एकसाथ प्रवा हित किया है। इनकी रचनाका मूलाधार प्राचीन वाङमय है । कवि देवेन्द्र कीति संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विद्वान होनेके साथ गुजराती भाषाके भी विद्वान थे।
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परिचय
देवेन्द्रकीर्ति
देवेन्द्रकीर्ति ने कालिकापुराणकी रचना की है। देवेन्द्रकीति मराठी साहित्य के ऐसे कवि हैं, जिन्होंने धर्म, दर्शन और काध्यकी त्रिवेणीको एकसाथ प्रवा हित किया है। इनकी रचनाका मूलाधार प्राचीन वाङमय है । कवि देवेन्द्र कीति संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विद्वान होनेके साथ गुजराती भाषाके भी विद्वान थे।
देवेन्द्रकीर्ति ने कालिकापुराणकी रचना की है। देवेन्द्रकीति मराठी साहित्य के ऐसे कवि हैं, जिन्होंने धर्म, दर्शन और काध्यकी त्रिवेणीको एकसाथ प्रवा हित किया है। इनकी रचनाका मूलाधार प्राचीन वाङमय है । कवि देवेन्द्र कीति संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं के विद्वान होनेके साथ गुजराती भाषाके भी विद्वान थे।