कन्नड़ साहित्यमें जन्न, रन, पोनको रत्नत्रय कहा जाता है। जन्मने ई० सन् १९७०से १२२५के बीच अनेक ग्रन्थोंकी रचना की है। यह होयसल राजाओंका आस्थान कवि था। इसे कवि चक्रवत्तोंकी उपाधि प्राप्त यो । पम्पको तरह जन्न भी शुर-बीर और लेखनीके धनी हैं। उत्तरवर्ती कवियों ने इसकी मुक्त कण्ठसे प्रशंसा की है। इसके 'यशोधरचरित' और 'अनन्तनाथपुराण' प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
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परिचय
कवि जन्न
कन्नड़ साहित्यमें जन्न, रन, पोनको रत्नत्रय कहा जाता है। जन्मने ई० सन् १९७०से १२२५के बीच अनेक ग्रन्थोंकी रचना की है। यह होयसल राजाओंका आस्थान कवि था। इसे कवि चक्रवत्तोंकी उपाधि प्राप्त यो । पम्पको तरह जन्न भी शुर-बीर और लेखनीके धनी हैं। उत्तरवर्ती कवियों ने इसकी मुक्त कण्ठसे प्रशंसा की है। इसके 'यशोधरचरित' और 'अनन्तनाथपुराण' प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
कन्नड़ साहित्यमें जन्न, रन, पोनको रत्नत्रय कहा जाता है। जन्मने ई० सन् १९७०से १२२५के बीच अनेक ग्रन्थोंकी रचना की है। यह होयसल राजाओंका आस्थान कवि था। इसे कवि चक्रवत्तोंकी उपाधि प्राप्त यो । पम्पको तरह जन्न भी शुर-बीर और लेखनीके धनी हैं। उत्तरवर्ती कवियों ने इसकी मुक्त कण्ठसे प्रशंसा की है। इसके 'यशोधरचरित' और 'अनन्तनाथपुराण' प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।