लक्ष्मीदास भट्टारक देवेन्द्रकीतिके शिष्य थे। सांगानेरके रहनेवाले थे। इन दिनों महाराज जयसिंहका राज्य था। इन्होंने यशोधरचरितकी रचना भट्टारक सकलकीति और पद्मनामको रचनाके आधारपर की है । यशो घरचरित वि० सं० १७८१ में पूर्ण हुआ है।
गुरु
भट्टारक देवेन्द्रकीति
नयी घटनाये
All Chaturmas Details
परिचय
लक्ष्मीदास पण्डित
लक्ष्मीदास भट्टारक देवेन्द्रकीतिके शिष्य थे। सांगानेरके रहनेवाले थे। इन दिनों महाराज जयसिंहका राज्य था। इन्होंने यशोधरचरितकी रचना भट्टारक सकलकीति और पद्मनामको रचनाके आधारपर की है । यशो घरचरित वि० सं० १७८१ में पूर्ण हुआ है।
लक्ष्मीदास भट्टारक देवेन्द्रकीतिके शिष्य थे। सांगानेरके रहनेवाले थे। इन दिनों महाराज जयसिंहका राज्य था। इन्होंने यशोधरचरितकी रचना भट्टारक सकलकीति और पद्मनामको रचनाके आधारपर की है । यशो घरचरित वि० सं० १७८१ में पूर्ण हुआ है।