इनका समय ई० सन् ११७० है। नागचन्द्रकी उपाधि अभिनव पम्प थी। ये अत्यन्त प्रतिभाशाली हैं। अभिनव पम्पने 'मल्लिनाथपुराण'की रचना की। यह उपासनाप्रिय कवि हैं। इसने संस्कृत भाषासे बहुमुल्य अलंकार और पद अहणकर अपनी कविताको भूषित करनेका प्रयास किया है। अभिनव पम्पको काव्य प्रतिभा कई दुटियोंसे महत्त्वपूर्ण है 1 कवि अभिनव पम्पके समय में कन्ति देवी नामको उत्कृष्ट कवयित्री भी हुई हैं। कविने इस कर्वायत्रीके सम्बन्धमें महत्त्वपूर्ण सद्गार व्यक्त किये हैं। अभिनव पम्पको 'साहित्य भारतीय' 'कर्ण पर 'साहित्य विद्याधर' और 'साहित्य सर्वज्ञ' आदि उपाधियाँ थीं।
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परिचय
नागचन्द्र या अभिनव पम्प इनका समय ई० सन् ११७० है। नागचन्द्रकी उपाधि अभिनव पम्प थी। ये अत्यन्त प्रतिभाशाली हैं। अभिनव पम्पने 'मल्लिनाथपुराण'की रचना की। यह उपासनाप्रिय कवि हैं। इसने संस्कृत भाषासे बहुमुल्य अलंकार और पद अहणकर अपनी कविताको भूषित करनेका प्रयास किया है। अभिनव पम्पको काव्य प्रतिभा कई दुटियोंसे महत्त्वपूर्ण है 1 कवि अभिनव पम्पके समय में कन्ति देवी नामको उत्कृष्ट कवयित्री भी हुई हैं। कविने इस कर्वायत्रीके सम्बन्धमें महत्त्वपूर्ण सद्गार व्यक्त किये हैं। अभिनव पम्पको 'साहित्य भारतीय' 'कर्ण पर 'साहित्य विद्याधर' और 'साहित्य सर्वज्ञ' आदि उपाधियाँ थीं।
इनका समय ई० सन् ११७० है। नागचन्द्रकी उपाधि अभिनव पम्प थी। ये अत्यन्त प्रतिभाशाली हैं। अभिनव पम्पने 'मल्लिनाथपुराण'की रचना की। यह उपासनाप्रिय कवि हैं। इसने संस्कृत भाषासे बहुमुल्य अलंकार और पद अहणकर अपनी कविताको भूषित करनेका प्रयास किया है। अभिनव पम्पको काव्य प्रतिभा कई दुटियोंसे महत्त्वपूर्ण है 1 कवि अभिनव पम्पके समय में कन्ति देवी नामको उत्कृष्ट कवयित्री भी हुई हैं। कविने इस कर्वायत्रीके सम्बन्धमें महत्त्वपूर्ण सद्गार व्यक्त किये हैं। अभिनव पम्पको 'साहित्य भारतीय' 'कर्ण पर 'साहित्य विद्याधर' और 'साहित्य सर्वज्ञ' आदि उपाधियाँ थीं।