इनका समय ई० सन् १९५०के लगभग है। इन्होंने कब्बगर कान्यकी रचना की है। भाषा और विषधके क्षेत्रमें क्रान्तिकारी कवि है। इन्होंने अपने काव्य ग्रन्थोंको केवल धर्म विशेषके प्रचारके लिए ही नहीं लिखा, प्रत्युत् काव्य रस का आस्वादन लेने के लिए ही काव्यका सुजन किया है । इतिवृत्त, वस्तुध्यापार वर्णन, संवाद और भावाभिव्यजनकी दृष्टिसे इनके काव्यका परीक्षण किया जाये, तो निश्चय ही इनका काव्य खरा उत्तरेगा।
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परिचय
ओड्ढय्य
इनका समय ई० सन् १९५०के लगभग है। इन्होंने कब्बगर कान्यकी रचना की है। भाषा और विषधके क्षेत्रमें क्रान्तिकारी कवि है। इन्होंने अपने काव्य ग्रन्थोंको केवल धर्म विशेषके प्रचारके लिए ही नहीं लिखा, प्रत्युत् काव्य रस का आस्वादन लेने के लिए ही काव्यका सुजन किया है । इतिवृत्त, वस्तुध्यापार वर्णन, संवाद और भावाभिव्यजनकी दृष्टिसे इनके काव्यका परीक्षण किया जाये, तो निश्चय ही इनका काव्य खरा उत्तरेगा।
इनका समय ई० सन् १९५०के लगभग है। इन्होंने कब्बगर कान्यकी रचना की है। भाषा और विषधके क्षेत्रमें क्रान्तिकारी कवि है। इन्होंने अपने काव्य ग्रन्थोंको केवल धर्म विशेषके प्रचारके लिए ही नहीं लिखा, प्रत्युत् काव्य रस का आस्वादन लेने के लिए ही काव्यका सुजन किया है । इतिवृत्त, वस्तुध्यापार वर्णन, संवाद और भावाभिव्यजनकी दृष्टिसे इनके काव्यका परीक्षण किया जाये, तो निश्चय ही इनका काव्य खरा उत्तरेगा।