2025-Garbh to Moksh Kalyanak Calendar
चहुंगति-फनि-विष-हरन-मणि, दुख-पावक-जल-धार शिव-सुख-सुधा-सरोवरी, सम्यक्-त्रयी निहा॥
शुद्धातम में मगन हो, परमातम पद पाय। भविजन को शुद्धात्मा, उपादेय दरशाय॥
ढाई द्वीप के भूतकाल में हुए अनंतों तीर्थंकर। वर्तमान में भी होते हैं ढाई द्वीप में तीर्थंकर॥
भरत क्षेत्र की वर्तमान जिन चौबीसी को करूँ नमन । वृषभादिक श्री वीर जिनेश्वर के पद पंकज में वन्दन॥
वृषभ अजित सम्भव अभिनन्दन, सुमति पदम सुपार्श्व जिनराय चन्द पुहुप शीतल श्रेयांस जिन, वासुपूज्य पूजित सुरराय॥
अंतकाळ साधण्याइतके नामामध्ये प्रेम दे प्रपंच करतो आवडीने,परमार्थ मात्र सवडीने.नाही पूजा नाही ध्यान, मोबाईलशी अनुसंधान नामस्मरण boring फार त्याने काय होणार यार ?देवाने करावी कृपा खास गप्पा मारतो तासनतास जप करतो माळेवर पण खरे प्रेम पैशावरखिचडीसाठी करतो उपासभक्तीमध्ये पूर्ण नापास स्वतःच्या पानात वाटयांची दाटी,नैवेद्याला छोटी वाटीसंकट आल्यावर देव आठवतो,नवस बोलून deal करतो. अभिषेक मोठ्या थाटात […]
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श्री निर्वाण आदि तीर्थंकर भूतकाल के तुम्हें नमन। श्री वृषभादिक वीर जिनेश्वर वर्तमान के तुम्हें नमन॥
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