इन्होंने 'अणुवेकला' नामक ग्रंथ की रचना कर संसारकी असारता, अशुचिता, अनित्यता आदिका स्वरूप प्रस्तुत किया है। आत्मोत्थानके लिए अणुवेक्खाका अध्ययन उपयोगी है। रचनाकी भाषा और शैलीसे कविका समय १६वीं शती प्रतीत होता है।
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परिचय
कवि अलहु
इन्होंने 'अणुवेकला' नामक ग्रंथ की रचना कर संसारकी असारता, अशुचिता, अनित्यता आदिका स्वरूप प्रस्तुत किया है। आत्मोत्थानके लिए अणुवेक्खाका अध्ययन उपयोगी है। रचनाकी भाषा और शैलीसे कविका समय १६वीं शती प्रतीत होता है।
इन्होंने 'अणुवेकला' नामक ग्रंथ की रचना कर संसारकी असारता, अशुचिता, अनित्यता आदिका स्वरूप प्रस्तुत किया है। आत्मोत्थानके लिए अणुवेक्खाका अध्ययन उपयोगी है। रचनाकी भाषा और शैलीसे कविका समय १६वीं शती प्रतीत होता है।