तोलामुलितेवर ने 'चूलामणि' लघुकाव्य लिखा है। ग्रन्थकार विजयनगर साम्राज्य में कारबेट मारके राजा विजय दरबार राजवि था । इस कविका समय जोषक चिन्तामणिके रचयिता तिरुक्कतेवरसे भी पूर्व है। इस काव्यमें १२ सर्ग हैं २१३१ पद्य हैं। इस ग्रन्थमें भगवान महावीरके पूर्वभवके जीव त्रिपिष्ठ वासुदेवके जीवन और उसके साहसपूर्ण कार्योका निर्देश है। इसके वर्णन प्रसंग जीवक चिन्तामणिके समान हैं । काध्य बस्यन्त ही सरस और जीवन मूल्योंसे सम्पृक्त है।
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परिचय
तोलामुलितेवर
तोलामुलितेवर ने 'चूलामणि' लघुकाव्य लिखा है। ग्रन्थकार विजयनगर साम्राज्य में कारबेट मारके राजा विजय दरबार राजवि था । इस कविका समय जोषक चिन्तामणिके रचयिता तिरुक्कतेवरसे भी पूर्व है। इस काव्यमें १२ सर्ग हैं २१३१ पद्य हैं। इस ग्रन्थमें भगवान महावीरके पूर्वभवके जीव त्रिपिष्ठ वासुदेवके जीवन और उसके साहसपूर्ण कार्योका निर्देश है। इसके वर्णन प्रसंग जीवक चिन्तामणिके समान हैं । काध्य बस्यन्त ही सरस और जीवन मूल्योंसे सम्पृक्त है।
तोलामुलितेवर ने 'चूलामणि' लघुकाव्य लिखा है। ग्रन्थकार विजयनगर साम्राज्य में कारबेट मारके राजा विजय दरबार राजवि था । इस कविका समय जोषक चिन्तामणिके रचयिता तिरुक्कतेवरसे भी पूर्व है। इस काव्यमें १२ सर्ग हैं २१३१ पद्य हैं। इस ग्रन्थमें भगवान महावीरके पूर्वभवके जीव त्रिपिष्ठ वासुदेवके जीवन और उसके साहसपूर्ण कार्योका निर्देश है। इसके वर्णन प्रसंग जीवक चिन्तामणिके समान हैं । काध्य बस्यन्त ही सरस और जीवन मूल्योंसे सम्पृक्त है।