वामनमुनिके समयके सम्बन्धमें निश्चित जानकारी नहीं है। रचनाशैली और भाषाकी दृष्टिसे इनका समय ई० सन् १२ वी १३ वीं शती अनुमानित होता है। इन्होंने मेमन्दरपुराण नामक ग्रन्थकी रचना की है। इस काव्यमें विमलनाथ तीर्थंकरके दो गणधर मेरु और मन्दरके पूर्वभवोंका वर्णन है। इस प्रन्थमें जैनदर्शन, आचार और लोकानुयोगका सुन्दर विवेचन आया है । पूर्व जन्मोंको वर्णन पद्धति प्रभावक और शिक्षाप्रद है। इसमें संस्कृत और प्राकृतकी शब्दावली भी प्रचुर परिमाणमें प्राप्त हैं।
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परिचय
वामनमुनि
वामनमुनिके समयके सम्बन्धमें निश्चित जानकारी नहीं है। रचनाशैली और भाषाकी दृष्टिसे इनका समय ई० सन् १२ वी १३ वीं शती अनुमानित होता है। इन्होंने मेमन्दरपुराण नामक ग्रन्थकी रचना की है। इस काव्यमें विमलनाथ तीर्थंकरके दो गणधर मेरु और मन्दरके पूर्वभवोंका वर्णन है। इस प्रन्थमें जैनदर्शन, आचार और लोकानुयोगका सुन्दर विवेचन आया है । पूर्व जन्मोंको वर्णन पद्धति प्रभावक और शिक्षाप्रद है। इसमें संस्कृत और प्राकृतकी शब्दावली भी प्रचुर परिमाणमें प्राप्त हैं।
वामनमुनिके समयके सम्बन्धमें निश्चित जानकारी नहीं है। रचनाशैली और भाषाकी दृष्टिसे इनका समय ई० सन् १२ वी १३ वीं शती अनुमानित होता है। इन्होंने मेमन्दरपुराण नामक ग्रन्थकी रचना की है। इस काव्यमें विमलनाथ तीर्थंकरके दो गणधर मेरु और मन्दरके पूर्वभवोंका वर्णन है। इस प्रन्थमें जैनदर्शन, आचार और लोकानुयोगका सुन्दर विवेचन आया है । पूर्व जन्मोंको वर्णन पद्धति प्रभावक और शिक्षाप्रद है। इसमें संस्कृत और प्राकृतकी शब्दावली भी प्रचुर परिमाणमें प्राप्त हैं।