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Nov 09
ARHAT VANDANA

आर्हत-वंदना Author: Pandit Jugal Kishore YugalLanguage : HindiRhythm: – Type: Arhat VandanaParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha तुम चिरंतन, मैं लघुक्षणलक्ष वंदन, कोटी वंदन ॥ जागरण तुम, मैं सुषुप्तिदिव्यतम आलोक हो प्रभु,मैं तमिस्रा हूँ अमा की,क्षीण अन्तर, क्षीण तन-मन ॥लक्ष…॥ शोध तुम, प्रतिशोध रे ! मैंक्षुद्र-बिन्दु विराट हो तुम,अज्ञ मैं पामर अधमतमसर्व जग के विज्ञ हो […]

Nov 09
ARADHANA PAATH

आराधना-पाठ Author: Pandit DyanatraijiLanguage : HindiRhythm: – Type: Aradhana PaathParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha मैं देव नित अरहंत चाहूँ, सिद्ध का सुमिरन करौं ।मैं सुर गुरु मुनि तीन पद ये, साधुपद हिरदय धरौं ॥मैं धर्म करुणामयी चाहूँ, जहाँ हिंसा रंच ना ।मैं शास्त्र ज्ञान विराग चाहूँ, जासु में परपंच ना ॥१॥ चौबीस श्री जिनदेव चाहूँ, […]

Nov 09
JINVANI-STUTI

जिनवाणी-स्तुति Author: —Language : HindiRhythm: – Type: Jinvani StutiParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha मिथ्यातम नासवे को, ज्ञान के प्रकासवे को,आपा-पर भासवे को, भानु-सी बखानी है ।छहों द्रव्य जानवे को, बन्ध-विधि भानवे को,स्व-पर पिछानवे को, परम प्रमानी है ॥ अनुभव बतायवे को, जीव के जतायवे को,काहू न सतायवे को, भव्य उर आनी है ।जहाँ-तहाँ तारवे को, […]

Nov 09
DARSHAN-STUTI

दर्शन-स्तुति Author: Pandit DaulatramjiLanguage : HindiRhythm: – Type: Darshan StutiParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि, निजानंद रसलीनसो जिनेन्द्र जयवंत नित, अरि-रज-रहस विहीन ॥ अन्वयार्थ : सम्पूर्ण पदार्थों के जानने वाले होने पर भी जो अपनी आत्मा के आनन्द रूपी रस में लीन रहते हैं तथा जो ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय और अंतराय इन चार […]

Nov 08
SAMADHIMARAN-BHASHA

समाधिमरण-भाषा Author: Pandit SurchandjiLanguage : HindiRhythm: – Type: SamadhiMaran-BhashaParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha बन्दौं श्री अरिहंत परम गुरु, जो सबको सुखदाईइस जग में दुख जो मैं भुगते, सो तुम जानो राईं ॥अब मैं अरज करूँ प्रभु तुमसे, कर समाधि उर माँहींअन्त समय में यह वर मागूँ, सो दीजै जगराई ॥१॥ भव-भव में तनधार नये मैं, […]

Nov 08
SAMADHI-BHAVANA

समाधि-भावना Author: Pandit ShivramjiLanguage : HindiRhythm: – Type: Samadhi BhavanaParticulars: PaathCreated By: Shashank Shaha दिन रात मेरे स्वामी, मैं भावना ये भाऊँ,देहांत के समय में, तुमको न भूल जाऊँ ॥टेक॥ शत्रु अगर कोई हो, संतुष्ट उनको कर दूँ,समता का भाव धर कर, सबसे क्षमा कराऊँ ॥१॥ त्यागूँ आहार पानी, औषध विचार अवसर,टूटे नियम न कोई, […]