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Message
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47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*आत्मचिंतन - (नं. 2530)*
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*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
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(*177*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण करने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है। हम इसे स्टेप बाय स्टेप समझ रहे हैं -
*॥ दूसरा अध्याय ॥*
*विग्रहवती च संसारिण: प्राक्चतुर्भ्य: ॥*
(अध्याय 2 / सूत्र 28)
*विग्रह वती च संसारिण: प्राक् चतुर्भ्य: ॥ 2/28॥*
*अर्थ -*
~~~~~~
*=> विग्रहवती =* विग्रह गति
*=> संसारिणः =*
संसारी जीव
*=> प्राक् =* प्रथम, पूर्व
*=> चतुर्भ्यः =* चार समय
अर्थात्,
*संसारी जीवों की विग्रह गति, अर्थात् एक शरीर छोड़कर दूसरा शरीर धारण करने की गति, सिद्ध आदि महापुरुषों की सीधी गति जैसी नहीं, अपितु भिन्न-भिन्न घुमावों से भरी होती है। परन्तु, फिर भी ये संसारी जीव एक या दो अथवा अधिक से अधिक तीन घुमाव/वक्रता/मोड़/turn लेते हैं और तीन समय, तथा अधिक से अधिक चार समय में नया शरीर धारण करते हैं।*
*महत्वपूर्ण - एक पत्ते में सुई चुभोने में जितना समय लगता है, वह अनन्त समय होता है।*
*(क्रमशः) ( ता. 13/02/2026)*
*--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9141/आ.3184) |
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2026-02-13 06:49:26 |
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40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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??? बड़े बाबा का केवल ज्ञान कल्याणक की जयजयकार हो ?????? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-02-13 06:47:35 |
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40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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? Jay Jinendra ? 1 *आत्मा का हित उसके स्वभाव के बाहर है ही नहीं।* 2 *ईच्छा अर्थात दर दर की ठोकरें खिलाने वाला परिणाम।* 3 *अपने को आत्मा मानने वाले परिणाम को ही परिणाम का सुधरना कहते हैं।* 4 *जीवन को मुसीबत में न डालना हो तो मोह की बातों में मत आओ।* 5 *उदय अच्छों अच्छों को दिन में तारे दिखा देता है अतः इतराना नहीं चाहिए।* 6 *बात बात पर बुरा मानने वाले अपना बहुत बुरा करते हैं।* 7 *जिनको धर्म सुहाता है उनको संसार नहीं भाता है।* 8 *सही समझ में आना ही ज्ञान होना है।* 9 *नकारात्मक सोच व्यक्ति को ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179239905?utm_source=android_post_share_web&referral_code=AI04B&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179239905?utm_source=android_post_share_web&referral_code=AI04B&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-02-13 06:47:34 |
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40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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??? बड़े बाबा का केवल ज्ञान कल्याणक की जयजयकार हो ?????? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-02-13 06:47:09 |
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40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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? Jay Jinendra ? 1 *आत्मा का हित उसके स्वभाव के बाहर है ही नहीं।* 2 *ईच्छा अर्थात दर दर की ठोकरें खिलाने वाला परिणाम।* 3 *अपने को आत्मा मानने वाले परिणाम को ही परिणाम का सुधरना कहते हैं।* 4 *जीवन को मुसीबत में न डालना हो तो मोह की बातों में मत आओ।* 5 *उदय अच्छों अच्छों को दिन में तारे दिखा देता है अतः इतराना नहीं चाहिए।* 6 *बात बात पर बुरा मानने वाले अपना बहुत बुरा करते हैं।* 7 *जिनको धर्म सुहाता है उनको संसार नहीं भाता है।* 8 *सही समझ में आना ही ज्ञान होना है।* 9 *नकारात्मक सोच व्यक्ति को ... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179239905?utm_source=android_post_share_web&referral_code=AI04B&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179239905?utm_source=android_post_share_web&referral_code=AI04B&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-02-13 06:47:03 |
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| 1515 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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*नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु*
*जैन धर्म की जय हो जय हो जय हो*
???????? |
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2026-02-13 06:45:00 |
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| 1514 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
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2026-02-13 06:44:32 |
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40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-02-13 06:44:16 |
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40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
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2026-02-13 06:43:45 |
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| 1511 |
40449705 |
☸️ अच्छीबातेअमृतवाणी ग्रुप |
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2026-02-13 06:43:33 |
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