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1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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2026-06-13 06:18:34 |
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1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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जय जिनेन्द्र,,जैन धर्म और हिंदू धर्म में किसी तरह की कोई समानता नही है दोनो भारत के सविधान में पूर्ण रूप से अलग अलग धर्म है अब जरा सा हिंदू धर्म के बारे में विस्तृत जानकारी पूरे भारत में जान लेते हैं जैन धर्म के श्रावक श्राविकाओं को मुस्लिम इस्लामिक धर्म बोहोत हिसक लगता है अब हिन्दू धर्म भी कुछ ज्यादा अलग नही है कुछ बाते अच्छे से सभी जान ले हिंदू धर्म में मास अंडा चिकन मटन मछली खाने वालो की संख्या करीब 80 से 85 प्रतिशत है जो जैन धर्म में छूआ भी नही जाता और बाकी बचे 15 प्रतिशत में अधिकांश जमीकंद प्याज लहसुन आलू का सेवन करते हैं जो जैन धर्म में किसी श्रावक श्राविकाओं को सेवन पूर्ण वर्जित है अब खाने पीने की आदत पूर्ण रूप से जैन धर्म जिन शासन और हिंदू धर्म में कही से कही भी समानता नही है अब दूसरे कुछ प्रथा पर आते हैं हिंदू धर्म वैदिक कर्म काण्ड को ही मानता है जबकि जैन धर्म अरिहंत तीर्थंकर प्रभुजी के द्वारा प्रतिपादित श्रमण परंपराओं को भी मानता है और वैदिक कर्म काण्ड जो हिंदू धर्म के पंडोओ द्वारा करी जाती है कोई भी जैन श्रावक श्राविकाओं का उसमे कोई भी लेना देना नहीं है सिर्फ और सिर्फ श्रमण परंपराओं को ही जैन श्रावक श्राविकाओं द्वारा अंगीकार किया जाता है अब कुछ और बाते हिंदू धर्म में इस्लामिक मुस्लिम धर्म की तरह बली देने की परम्परा है जबकि जैन धर्म में अहिंसा परमो धर्म किसी भी परिस्थिति में कोई भी जीव की हिंसा को भयंकर पाप कर्म का बंधन माना गया है हिंदू धर्म में अधिकांश लोगों द्वारा दीपावली पर पटाखे फोड़े जाते हैं और असंख्य छोटे छोटे जीवो की हिंसा करी जाती है जबकि जैन धर्म में किसी भी परिस्थिति में किसी भी प्रकार की हिंसा वर्जित है और पटाखे जलाना तो दूर देखते भी नहीं है क्युकी अनुमोदन की हिंसा लगती हैं हिंदू धर्म में मास अंडा मछली चिकन मटन अधिकांश हिंदू लोगो द्वारा सेवन किया जाता है और जो 10 से 15 प्रतिशत नही भीं करते इस में से अधिकांश अभस्य वस्तु का सेवन करते हैं जैसे जमीकंद आलू प्याज लहसुन आदि और जैन धर्म में रात्रि भोजन का त्याग रहता है वही हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार के रात्रि भोजन के त्याग की कोई भी परंपरा नहीं है और वैदिक कर्म काण्ड को भी माना जाता है और अधिकांश हिंदू बलि चराते है जैसे बकरा ईद पर मुस्लिम इस्लामिक धर्म द्वारा मासूम निर्दोष जीवो की घाट करी जाती है और हिंदू धर्म के अधिकांश लोगों द्वारा दीपावली में भी हर तरह की हिंसा छोटे छोटे सूक्ष्म जीवों की करी जाती हैं जैन धर्म और हिंदू धर्म में कुछ भी समानता नही है और पुरी तरह से अलग अलग धर्म भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित है जैन हिंदू नही होते और हिंदू जैन किसी भी प्रकार से नही होते राष्ट्रीय धार्मिक आधार पर जनगणना कुछ ही महीनों में पूरे भारत में होने जा रही है सभी से निवेदन और अनुरोध है धर्म हमारा जैन जाति हमारी जैन उपनाम में भी सिर्फ और सिर्फ जैन लिखे हमारा पूरा अस्तित्व ही जैन जैन जैन जिन शासन का परचम पूरे भारत में लहरा दे क्युकी यह जन गणना जैन धर्म का भविष्य निर्धारण करेगी पूरे भारत में जैन 5 करोड़ से भी अधिक है लेकिन सरकारी रिकार्ड में बोहोत कम दर्ज हे जैन धर्म जिन शासन के साथ आज पूरे भारत में अन्याय अत्याचार के समाचार आप रोज देख सुन रहे हैं जैन धर्म संस्कृति हमारे तीर्थ स्थल की रक्षा सुरक्षा जैन धर्म जिन शासन की आत्मा सभी सभी संत और महा सती जी साध्वी जी की रक्षा सुरक्षा और सभी श्रावक श्राविकाओं की रक्षा सुरक्षा हमारे बच्चो का भविष्य भीं जन गणना से सुनिश्चित होगी क्युकी कमजोर की आवाज कोई भी नहीं सुनता लेकिन जब पूरे भारत में सभी को अच्छी तरह से मालूम होगा जैन धर्म के परिवारों श्रावक श्राविकाओं की संख्या पूरे भारत में 5 करोड़ से भी अधिक है पूरे भारत का जैन धर्म जिन शासन को देखने का नजरिया बदल जाएगा और जैन धर्म जिन शासन को कोई भी हल्के में लेने की जीवन में भूल नहीं करेंगे भारत के संविधान की अधिकृत प्रति भी साथ में भेज रहे हैं जिसमें स्पष्ट रूप से वर्णित है जैन धर्म पूर्ण रूप से अलग और भारत के संविधान में स्वतंत्र धर्म के रूप में भारत के संविधान में मान्यता प्राप्त है और किसी भी भारत के दूसरे धर्म से कोई लेना देना नहीं है जय जिनेन्द्र जय जिन शासन जी |
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2026-06-13 06:18:31 |
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1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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जय जिनेन्द्र,,जैन धर्म और हिंदू धर्म में किसी तरह की कोई समानता नही है दोनो भारत के सविधान में पूर्ण रूप से अलग अलग धर्म है अब जरा सा हिंदू धर्म के बारे में विस्तृत जानकारी पूरे भारत में जान लेते हैं जैन धर्म के श्रावक श्राविकाओं को मुस्लिम इस्लामिक धर्म बोहोत हिसक लगता है अब हिन्दू धर्म भी कुछ ज्यादा अलग नही है कुछ बाते अच्छे से सभी जान ले हिंदू धर्म में मास अंडा चिकन मटन मछली खाने वालो की संख्या करीब 80 से 85 प्रतिशत है जो जैन धर्म में छूआ भी नही जाता और बाकी बचे 15 प्रतिशत में अधिकांश जमीकंद प्याज लहसुन आलू का सेवन करते हैं जो जैन धर्म में किसी श्रावक श्राविकाओं को सेवन पूर्ण वर्जित है अब खाने पीने की आदत पूर्ण रूप से जैन धर्म जिन शासन और हिंदू धर्म में कही से कही भी समानता नही है अब दूसरे कुछ प्रथा पर आते हैं हिंदू धर्म वैदिक कर्म काण्ड को ही मानता है जबकि जैन धर्म अरिहंत तीर्थंकर प्रभुजी के द्वारा प्रतिपादित श्रमण परंपराओं को भी मानता है और वैदिक कर्म काण्ड जो हिंदू धर्म के पंडोओ द्वारा करी जाती है कोई भी जैन श्रावक श्राविकाओं का उसमे कोई भी लेना देना नहीं है सिर्फ और सिर्फ श्रमण परंपराओं को ही जैन श्रावक श्राविकाओं द्वारा अंगीकार किया जाता है अब कुछ और बाते हिंदू धर्म में इस्लामिक मुस्लिम धर्म की तरह बली देने की परम्परा है जबकि जैन धर्म में अहिंसा परमो धर्म किसी भी परिस्थिति में कोई भी जीव की हिंसा को भयंकर पाप कर्म का बंधन माना गया है हिंदू धर्म में अधिकांश लोगों द्वारा दीपावली पर पटाखे फोड़े जाते हैं और असंख्य छोटे छोटे जीवो की हिंसा करी जाती है जबकि जैन धर्म में किसी भी परिस्थिति में किसी भी प्रकार की हिंसा वर्जित है और पटाखे जलाना तो दूर देखते भी नहीं है क्युकी अनुमोदन की हिंसा लगती हैं हिंदू धर्म में मास अंडा मछली चिकन मटन अधिकांश हिंदू लोगो द्वारा सेवन किया जाता है और जो 10 से 15 प्रतिशत नही भीं करते इस में से अधिकांश अभस्य वस्तु का सेवन करते हैं जैसे जमीकंद आलू प्याज लहसुन आदि और जैन धर्म में रात्रि भोजन का त्याग रहता है वही हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार के रात्रि भोजन के त्याग की कोई भी परंपरा नहीं है और वैदिक कर्म काण्ड को भी माना जाता है और अधिकांश हिंदू बलि चराते है जैसे बकरा ईद पर मुस्लिम इस्लामिक धर्म द्वारा मासूम निर्दोष जीवो की घाट करी जाती है और हिंदू धर्म के अधिकांश लोगों द्वारा दीपावली में भी हर तरह की हिंसा छोटे छोटे सूक्ष्म जीवों की करी जाती हैं जैन धर्म और हिंदू धर्म में कुछ भी समानता नही है और पुरी तरह से अलग अलग धर्म भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित है जैन हिंदू नही होते और हिंदू जैन किसी भी प्रकार से नही होते राष्ट्रीय धार्मिक आधार पर जनगणना कुछ ही महीनों में पूरे भारत में होने जा रही है सभी से निवेदन और अनुरोध है धर्म हमारा जैन जाति हमारी जैन उपनाम में भी सिर्फ और सिर्फ जैन लिखे हमारा पूरा अस्तित्व ही जैन जैन जैन जिन शासन का परचम पूरे भारत में लहरा दे क्युकी यह जन गणना जैन धर्म का भविष्य निर्धारण करेगी पूरे भारत में जैन 5 करोड़ से भी अधिक है लेकिन सरकारी रिकार्ड में बोहोत कम दर्ज हे जैन धर्म जिन शासन के साथ आज पूरे भारत में अन्याय अत्याचार के समाचार आप रोज देख सुन रहे हैं जैन धर्म संस्कृति हमारे तीर्थ स्थल की रक्षा सुरक्षा जैन धर्म जिन शासन की आत्मा सभी सभी संत और महा सती जी साध्वी जी की रक्षा सुरक्षा और सभी श्रावक श्राविकाओं की रक्षा सुरक्षा हमारे बच्चो का भविष्य भीं जन गणना से सुनिश्चित होगी क्युकी कमजोर की आवाज कोई भी नहीं सुनता लेकिन जब पूरे भारत में सभी को अच्छी तरह से मालूम होगा जैन धर्म के परिवारों श्रावक श्राविकाओं की संख्या पूरे भारत में 5 करोड़ से भी अधिक है पूरे भारत का जैन धर्म जिन शासन को देखने का नजरिया बदल जाएगा और जैन धर्म जिन शासन को कोई भी हल्के में लेने की जीवन में भूल नहीं करेंगे भारत के संविधान की अधिकृत प्रति भी साथ में भेज रहे हैं जिसमें स्पष्ट रूप से वर्णित है जैन धर्म पूर्ण रूप से अलग और भारत के संविधान में स्वतंत्र धर्म के रूप में भारत के संविधान में मान्यता प्राप्त है और किसी भी भारत के दूसरे धर्म से कोई लेना देना नहीं है जय जिनेन्द्र जय जिन शासन जी |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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मुश्किल वक्त हमारे लिए आईने की तरह होता है,
जो हमारी क्षमताओ का सही आभास हमे कराता है।
।। जय जिनेन्द्र, जय गुरुदेव, सुप्रभात।। |
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2026-06-13 06:17:07 |
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