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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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Gurudev bhkt parivar का app आ गया है ।
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2026-02-13 03:46:08 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि में संभावित पावन दीक्षाएँ*
प्रातः स्मरणीय, राष्ट्रहितचिंतक
*आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज*
एवं
*आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*
के पावन आशीर्वाद से
वर्तमान दिगंबर जैनाचार्य
*आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*
के करकमलों द्वारा
साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों की निर्वाण भूमि,
*तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ स्वामी* के समवशरण से पावन
एवं 52 जिनालयों से सुशोभित
*सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि, जिला बैतूल (म.प्र.)* में
? *19 फरवरी 2026* को
*मुनि दीक्षाएँ होने की पूर्ण संभावना है।*
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*? संभावित दीक्षार्थी ?*
*1. ऐलकश्री उपशमसागर जी महाराज*
*2. ऐलकश्री औचित्यसागर जी महाराज*
*3. ऐलकश्री गहनसागर जी महाराज*
*4. ऐलकश्री कैवल्यसागर जी महाराज*
*5. ऐलकश्री सुदृढ़सागर जी महाराज*
*6. ऐलकश्री समुचितसागर जी महाराज*
*7. ऐलकश्री उचितसागर जी महाराज*
*8. ऐलकश्री अथाहसागर जी महाराज*
*9. ऐलकश्री उत्साहसागर जी महाराज*
*10. ऐलकश्री अमापसागर जी महाराज*
*11. ऐलकश्री उद्यमसागर जी महाराज*
*12. ऐलकश्री गरिष्ठसागर जी महाराज*
*13. ऐलकश्री गौरवसागर जी महाराज*
*14. क्षुल्लकश्री जाग्रतसागर जी महाराज*
*15. क्षुल्लकश्री आदरसागर जी महाराज*
*16. क्षुल्लकश्री चिद्रूपसागर जी महाराज*
*17. क्षुल्लकश्री स्वरुपसागर जी महाराज*
*18. क्षुल्लकश्री सुभगसागर जी महाराज*
*19. क्षुल्लकश्री सविनयसागर जी महाराज*
*20. क्षुल्लकश्री समन्वयसागर जी महाराज*
*21. क्षुल्लकश्री हीरकसागर जी महाराज*
---
यह हम सभी के लिए अपूर्व आध्यात्मिक प्रभावना एवं आत्मकल्याण का अवसर है।
*? निवेदन:*
यह पावन सूचना अपने–अपने जिनालयों के सूचना पट्ट पर अवश्य अंकित करें,
ताकि जिन सज्जनों के वहाँ पहुँचने के भाव हों
वे अपनी सुविधा अनुसार समय रहते यात्रा की व्यवस्था कर सकें।
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2026-02-13 03:34:48 |
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40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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2026-02-13 03:19:21 |
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40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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Posting baki |
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2026-02-13 03:19:19 |
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40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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55000 thosand |
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2026-02-13 03:19:17 |
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40449730 |
True Jainism |
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?*धन संग्रहण करने वाले सुविधाभोगी लुटेरे साधुओं से सावधान* ?
?????
*अगर दीक्षा लेने के बाद साधु के संयम ,अपरीगृह के जीवन में पैसे धन , मेवा मिठाई चाहिए , नौकर ड्राइवर व्हीलचेयर सेवक,कैमरा टीम, महंगे फोन , महंगी चश्मे की फ्रेम, सोशल मीडिया चाहिए, करोड़ो के चढ़ावा बोलिया, क्रियाओं की नीलामी चाहिए , संगीतकार ठग मंडली , भव्य भवन चाहिए , भव्य प्रवेश , चातुर्मास, जन्म दिवस मनाने के लिए लाखों चाहिए तो भाई साधु क्यों बने ? घर आ जाओ अपना कमाओ और खर्च करो । समाज के पैसे पर आस्था की आड में यह मुफ्तखोरी क्यो?*
*चलो यह भी ठीक है लेकिन इनको न धर्म की रक्षा , तीर्थ रक्षा , धर्म का , प्रचार प्रसार, न ही धर्म के विकास, न ही जैन श्रावकों के उत्थान की बात करनी है*
*जबकि ८०% से ज्यादा जैन अपनी निम्न आर्थिक स्थिति से जूझ रहे है। इन धन संग्रहण करने वाले , और सुविधा भोगी साधुओं का कपड़े पहनाकर घर भेजा जाए या मंदिर भोजनशाला भवन स्थानक स्कूल में रोजगार दे।*
*इनको न तो साहित्यकार बनना है न लेखक , न जैन इतिहास , न संस्कृति, न आगम पढ़ना है सिर्फ सफेद कपड़े में मुफ्त का माल उड़ाना है बिना टैक्स दिए। इसलिए बहुत से हिंदू या अन्य जातियां भी जैन साधु बनकर समाज को लुट रही है अन्य जातियों को जैन श्रावक नहीं बनना है सिर्फ लुटेरे साधु बनना है, जहां न ज्ञान चाहिए न शिक्षा , बस सफेद वस्त्रधारी बन जाओ , बनिया जैन समाज उनके पांवों में पड़ेगा , करोड़ो देगा , जिसकी औकात दस हजार महीने कमाई करने की नहीं होती। ऊपर से जैन बच्चों और युवाओं को भी बर्बाद कर रहे है उनके परिवारों को संयम के नाम पर धन , जमीन और व्यवसाय से खत्म कर रहे है*। *कई साधु तो हिंदू संगठनों की दलाली करते है कई नेताओं को चंदा देकर जैन संस्कृति धरोहर अस्तित्व को भी मिटा रहे है। क्योंकि इन धन संग्रहण करने वाले कथावाचकों को अपने धन माल को आर्थिक अपराध की जांच एजेंसियों, ED , IT से बचने के लिए राजनीति भी करनी पड़ती है जो जैन मंदिरों और तीर्थो के विनाश और अतिक्रमण का कारण बनता है!*
*हम समझते है ऐसे साधुओं से धर्म की प्रभावना होती है भव्य जुलुश , भव्य तपस्या, भव्य चतुर्मास से, बड़े बड़े प्रवेश और अरबों के धाम से ,लेकिन यह हमारे सर्वस्व विनाश की नींव खोद रहे है यह आप बीस पच्चीस सालों में जैन धर्म को इतिहास के पन्नो में सिमटता देख सकते है*
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2026-02-13 02:41:39 |
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40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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2026-02-13 02:25:45 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?️ *तात्विक चिंतन | जैन आत्मदर्शन* ?
---? *1. आत्मतत्त्व की पहचान और प्रीति*
? यदि जीव *अपने चैतन्य स्वरूप आत्मतत्त्व* को जानकर उससे प्रीति करता है,
तो *पुरुषार्थ स्वाभाविक रूप से स्वरूपग्राही* हो जाता है ?।
यहाँ “जानना” केवल बौद्धिक ज्ञान ? नहीं,
बल्कि *स्वानुभूति से उपजा आत्मबोध* ?♂️ है।
जब प्रीति आत्मा में होती है ❤️, तब उपयोग स्वतः ही
? शुद्धोपयोग की ओर प्रवाहित होता है ✨।
यह जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है—
> जहाँ रुचि ➡️ वहाँ उपयोग;
जहाँ उपयोग ➡️ वहाँ पुरुषार्थ;
और जहाँ शुद्ध पुरुषार्थ ➡️ वहाँ सुख ?
---? *2. परपदार्थों में प्रीति : विपरीत पुरुषार्थ का कारण*
जब जीव बाहर की वस्तुओं—
स्त्री–पुत्र ???,
मकान–दुकान ??,
समाज ?,
देव–शास्त्र–गुरु ?—
इन सबके *निमित्त से उत्पन्न शुभ–अशुभ भावों में प्रीति* करता है,
तो उपयोग बाहर की ओर दौड़ता है ?♂️?।
फलस्वरूप—
❌ *सुख की खोज बाहर* होती है
? *भावों और पदार्थों में फेरबदल का मिथ्या प्रयास होता है*
↩️ और *पुरुषार्थ विपरीत दिशा* में लग जाता है
इसे जैन दर्शन में *विपरीत पुरुषार्थ* कहा गया है,
जो कर्म-बंधन का कारण बनता है ⛓️।
---? *3. “सर्वत्र अपना ही कारण है” – कारण–कार्य सिद्धांत*
यह वाक्य अत्यंत तात्त्विक है—
? “सर्वत्र अपना ही कारण है”
जैन दर्शन का कारण–कार्य सिद्धांत कहता है:
? जैसा कारण, वैसा कार्य
? जैसी रुचि, वैसा परिणाम
हम किस ओर मुख किए हुए हैं—
?️ *आत्मा की ओर?*
? या *परपदार्थों की ओर?*
उसी के अनुसार उपयोग, पुरुषार्थ और फल तय होता है।
⚖️ *कोई बाहरी सत्ता हमें सुखी या दुःखी नहीं बनाती।*
---? *4. स्वाभाविक बनाम विपरीत पुरुषार्थ*
यदि *स्वभाव की रुचि से पुरुषार्थ* हो, तो—
✅ शुद्धोपयोग ✨
✅ स्थिरता ?♂️
✅ शांति ?️
✅ आत्मसुख ?
लेकिन यदि रुचि बाहर की है, तो—
❌ उपयोग का भटकाव ?
❌ आकुलता ?
❌ दुःख ?
❌ अशांति ?️
? *यह भटकाव ही संसार है।*
? और *उपयोग की स्थिरता ही मोक्ष-मार्ग* ?️।
---? *5. सुख का धाम : चैतन्य स्वरूप आत्मतत्त्व*
? “सुख का धाम कोई बाहरी स्थान नहीं,
अपितु *अपना चैतन्य स्वरूप आत्मतत्त्व है।*”
आत्मा में—
? अनंत ज्ञान
?️ अनंत दर्शन
⚡ अनंत शक्ति
? अनंत सुख
ये सभी निधियाँ आत्मा में ही विद्यमान हैं ?।
*जीव स्वयं इनका स्वामी है* ?।
बाहर सुख खोजने का प्रयास
? *अपनी ही संपदा को भूलने जैसा है।*
---? *6. बारंबार महिमा और प्रमाद-त्याग*
? आत्मा की बार-बार महिमा करो
? स्वरूप का स्मरण रखो
? प्रमाद (असावधानी + विलंब) छोड़ो
क्योंकि प्रमाद ही कारण है ?️
जो *आत्मसुख को ढक देता है।*
जब प्रमाद छूटता है—
? पुरुषार्थ भाव जागृत होता है
? उपयोग स्थिर होता है
? *और आत्मा अपने स्वभाव में रम जाती है*
---? *निष्कर्ष*
यह *केवल हमें संदेश नहीं,*
*बल्कि अनुभव की पुकार* है ?।
यह हमें झकझोर कर कहता है—
? *सुख बाहर नहीं, भीतर है* ?️
? *कारण बाहर नहीं, स्वयं में है* ?
? *पुरुषार्थ बदलो, दिशा बदल जाएगी* ?
और यही जैन दर्शन का सार है—
*स्व से स्व की ओर यात्रा* ?️?️
✍️ *राजेश जैन, मैनपुरी* |
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2026-02-13 01:27:00 |
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40449679 |
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 |
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*ಎಲ್ಲವನ್ನು ಸಹಿಸುವವರಿಗೆ ಸಹನೆ ಹೆಚ್ಚು ಅಂತ ಅಲ್ಲ... ಅವರು ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಅನುಭವಿಸಿದ ನೋವುಗಳೇ ಹೆಚ್ಚು ಅಂತ ಅರ್ಥ*
?
*ಶುಭೋದಯ?ಶುಭಚಿಂತನ?* |
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2026-02-13 01:17:45 |
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40449741 |
07 विशुद्ध देशना प्रसारण केंद्र |
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संस्कार वान संतान किसकी होती है
<a href="https://www.instagram.com/reel/DUj9OJKk2q2/?igsh=MW9mb2RxcmtidHh3dQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DUj9OJKk2q2/?igsh=MW9mb2RxcmtidHh3dQ==</a> |
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2026-02-13 01:11:03 |
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