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9916 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *मुक्तागिरि मै दीक्षा पूर्व , प्रातः काल की बेला मै आचार्य महराज का महाप्रसाद*?? 2026-02-19 09:29:21
9915 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-19 09:27:35
9914 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji ?????? 2026-02-19 09:25:40
9913 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? **जय जिनेंद्र.* *आचार्य श्री विद्यासागर गुरुदेव यांच्या द्वितीय निर्वाणदिना निमित्त गुरुदेवांच्या पावन चरणी शत् शत् नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु.* ????? 2026-02-19 09:25:17
9912 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-02-19 09:23:35
9911 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-02-19 09:23:34
9910 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *1️⃣9️⃣ फरवरी 2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣* ???????? *अपनी जुबान का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, जो आपके घर का नौकर है, वह अपने घर का मालिक भी है* ?❤️❤️❤️❤️❤️❤️? *क्रोध, बदला, अभिमान* *ज्यादा बोझ लेने वाले अक्सर डूब जाते हैं, फिर चाहे वह बोझ क्रोध का हो, बदले का हो, या अभिमान का हो* ???????? *❤️? जय जिनेन्द्र* ?❤️ 2026-02-19 09:23:31
9909 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-02-19 09:23:07
9908 40449749 जिनोदय?JINODAYA *ताज से नहीं, उड़ान से पहचान बनती है* बेशक़ मुर्गों के सर पर ताज होगा, मगर ऊँचा वही उड़ेगा जिसका नाम बाज होगा। यह पंक्ति केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है। आज समाज में दिखावा बहुत है, पद बहुत हैं, उपाधियाँ बहुत हैं, परंतु वास्तविक ऊँचाई केवल वही प्राप्त करता है जिसमें साहस, दृष्टि और आत्मबल होता है। मुर्गा भले ही सिर पर ताज रख ले, पर उसकी उड़ान सीमित रहती है; वह कुछ फीट से अधिक नहीं जा सकता। दूसरी ओर बाज के सिर पर कोई ताज नहीं होता, कोई आडंबर नहीं होता, पर उसकी उड़ान आकाश को चूमती है। जीवन में भी यही सिद्धांत लागू होता है। केवल पद, प्रतिष्ठा, वंश या बाहरी आडंबर से कोई महान नहीं बनता। महानता आती है परिश्रम से, त्याग से, अनुशासन से और दूरदर्शिता से। आज बहुत से लोग केवल नाम और पद के सहारे सम्मान चाहते हैं, पर सम्मान कभी माँगा नहीं जाता, कमाया जाता है। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होता है, जो परिस्थितियों से लड़ने का साहस रखता है, जो आलोचना से घबराता नहीं बल्कि उससे सीखता है, वही बाज की तरह ऊँचा उठता है। हमें यह तय करना है कि हमें केवल सिर पर ताज चाहिए या आसमान में स्थान। यदि जीवन में ऊँचाई चाहिए तो सोच भी ऊँची रखनी होगी, कर्म भी श्रेष्ठ रखने होंगे और चरित्र भी दृढ़ रखना होगा। ताज क्षणिक हो सकता है, पर उड़ान इतिहास बना देती है। इसलिए स्वयं को आडंबर से नहीं, बल्कि क्षमता से सजाइए। दिखावे से नहीं, बल्कि कार्य से पहचान बनाइए। यही जीवन की सच्ची सफलता है और यही आत्मसम्मान का मार्ग है। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-02-19 09:22:41
9907 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *सब कुछ होने के बाद भी* *आप में हौसला है तो,* *समझ लीजिये कि आपने* . *कुछ नहीं खोया..!* *जयजिनेन्द्र??सुप्रभात...* 2026-02-19 09:21:16