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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 72011 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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बी प्रैक्टिकल भौतिक जगत में मिलता ऐसा उपदेश जबकि धर्म में कहते जुड़ो अध्यात्म से नहीं समझ आता क्या है सही ? अरे ! आपने समझा ग़लत ही पुराण ग्रंथ / चारों अनुयोगों में परिचय कराया सिद्धांत से उसे लाओ प्रैक्टिकल में अध्यात्म में लग के अध्यात्म भी तो है साधना ही पर से हटकर होओ स्थित स्व में ये मोह राग द्वेष सब हैं पर तुझसे ,,,, इनसे परे निरालंब होकर निरखना स्वात्म तत्व को यही तो है अध्यात्म यानि प्रैक्टिकल करोगे जभी उसकी अनुभूति होगी तुम्हें ,,,, नमोस्तु गुरूवर मुनिपुंगव श्र... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 12:56:12 |
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| 72012 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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बी प्रैक्टिकल भौतिक जगत में मिलता ऐसा उपदेश जबकि धर्म में कहते जुड़ो अध्यात्म से नहीं समझ आता क्या है सही ? अरे ! आपने समझा ग़लत ही पुराण ग्रंथ / चारों अनुयोगों में परिचय कराया सिद्धांत से उसे लाओ प्रैक्टिकल में अध्यात्म में लग के अध्यात्म भी तो है साधना ही पर से हटकर होओ स्थित स्व में ये मोह राग द्वेष सब हैं पर तुझसे ,,,, इनसे परे निरालंब होकर निरखना स्वात्म तत्व को यही तो है अध्यात्म यानि प्रैक्टिकल करोगे जभी उसकी अनुभूति होगी तुम्हें ,,,, नमोस्तु गुरूवर मुनिपुंगव श्र... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 12:56:12 |
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| 72009 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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बी प्रैक्टिकल भौतिक जगत में मिलता ऐसा उपदेश जबकि धर्म में कहते जुड़ो अध्यात्म से नहीं समझ आता क्या है सही ? अरे ! आपने समझा ग़लत ही पुराण ग्रंथ / चारों अनुयोगों में परिचय कराया सिद्धांत से उसे लाओ प्रैक्टिकल में अध्यात्म में लग के अध्यात्म भी तो है साधना ही पर से हटकर होओ स्थित स्व में ये मोह राग द्वेष सब हैं पर तुझसे ,,,, इनसे परे निरालंब होकर निरखना स्वात्म तत्व को यही तो है अध्यात्म यानि प्रैक्टिकल करोगे जभी उसकी अनुभूति होगी तुम्हें ,,,, नमोस्तु गुरूवर मुनिपुंगव श्र... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 12:55:05 |
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| 72010 |
40449666 |
निर्यापक समय सागर जी भक्त |
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बी प्रैक्टिकल भौतिक जगत में मिलता ऐसा उपदेश जबकि धर्म में कहते जुड़ो अध्यात्म से नहीं समझ आता क्या है सही ? अरे ! आपने समझा ग़लत ही पुराण ग्रंथ / चारों अनुयोगों में परिचय कराया सिद्धांत से उसे लाओ प्रैक्टिकल में अध्यात्म में लग के अध्यात्म भी तो है साधना ही पर से हटकर होओ स्थित स्व में ये मोह राग द्वेष सब हैं पर तुझसे ,,,, इनसे परे निरालंब होकर निरखना स्वात्म तत्व को यही तो है अध्यात्म यानि प्रैक्टिकल करोगे जभी उसकी अनुभूति होगी तुम्हें ,,,, नमोस्तु गुरूवर मुनिपुंगव श्र... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183797406?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-04-09 12:55:05 |
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| 72007 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-09 12:54:58 |
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| 72008 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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2026-04-09 12:54:58 |
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| 72005 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-09 12:54:43 |
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| 72006 |
50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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2026-04-09 12:54:43 |
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| 72003 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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*एकाकी यात्री*
उस पार
पहुँचने का
पूरा विश्वास
मन में धार
यद्यपि शारीरिक पक्ष
अत्यन्त शिथिल
दौर्बल्य का अनुभव !....
केवल
आत्मीय पक्ष !
निष्पक्ष
सलक्ष्य
अक्ष-विषय से ऊपर उठा हुआ
*आपको बना साक्ष्य*
*आदर्श प्रत्यक्ष*
*अपने कार्य क्षेत्र में*
*पूर्ण दक्ष !*
*साक्षी बने हैं*
साहस उत्साह
और अपने
दुर्बल बाहुओं से
निरंतर तैर रहा हूँ.....
एकाकी यात्री
अबाधित यात्रा कर रहा हूँ
अपार का पार पाने
- _११, नर्मदा का नरम कंकर_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-04-09 12:54:34 |
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| 72004 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
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*एकाकी यात्री*
उस पार
पहुँचने का
पूरा विश्वास
मन में धार
यद्यपि शारीरिक पक्ष
अत्यन्त शिथिल
दौर्बल्य का अनुभव !....
केवल
आत्मीय पक्ष !
निष्पक्ष
सलक्ष्य
अक्ष-विषय से ऊपर उठा हुआ
*आपको बना साक्ष्य*
*आदर्श प्रत्यक्ष*
*अपने कार्य क्षेत्र में*
*पूर्ण दक्ष !*
*साक्षी बने हैं*
साहस उत्साह
और अपने
दुर्बल बाहुओं से
निरंतर तैर रहा हूँ.....
एकाकी यात्री
अबाधित यात्रा कर रहा हूँ
अपार का पार पाने
- _११, नर्मदा का नरम कंकर_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-04-09 12:54:34 |
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