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222616 40449660 Acharya PulakSagarji 07 *परम् पूज्य भारत गौरव प्रातः स्मरणीय राष्ट्रसंत, शान्तिदूत आचार्यश्री पुलक सागरजी गुरुदेव के चरणों में शत शत नमन* नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ??? 2026-06-11 18:56:56
222614 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा 2026-06-11 18:56:23
222613 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा 2026-06-11 18:56:22
222611 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? <a href="https://www.instagram.com/reel/DZbc1Kxjb-6/?igsh=bmFhNzU2dzZxOG1s" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DZbc1Kxjb-6/?igsh=bmFhNzU2dzZxOG1s</a> ?????? _मोक्ष की भूमि_ *सिद्धवरकूट* ?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️ _जहाँ से_ *साढ़े 3 करोड़* _मुनिराजों ने पाया_ *मोक्ष* ?????????????? 2026-06-11 18:55:30
222612 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? <a href="https://www.instagram.com/reel/DZbc1Kxjb-6/?igsh=bmFhNzU2dzZxOG1s" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DZbc1Kxjb-6/?igsh=bmFhNzU2dzZxOG1s</a> ?????? _मोक्ष की भूमि_ *सिद्धवरकूट* ?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️?‍♀️ _जहाँ से_ *साढ़े 3 करोड़* _मुनिराजों ने पाया_ *मोक्ष* ?????????????? 2026-06-11 18:55:30
222609 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) *मुंबई में जैन संतों पर शर्मनाक टिप्पणी, कहा "चरमपंथी कबूतर गिरोह"* ????????? <a href="https://youtu.be/VWNATnux7Uw" target="_blank">https://youtu.be/VWNATnux7Uw</a> 2026-06-11 18:55:21
222610 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) *मुंबई में जैन संतों पर शर्मनाक टिप्पणी, कहा "चरमपंथी कबूतर गिरोह"* ????????? <a href="https://youtu.be/VWNATnux7Uw" target="_blank">https://youtu.be/VWNATnux7Uw</a> 2026-06-11 18:55:21
222607 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा ऊऔऊऔऔऊऔऊऊऔऊऔऊ ओ और औ औ औ औ औ औ औ औ ध्वजा आऔआऔआऔआआऔआऔआऔआ ओआऔआऔआऔ औआ में औआऔआऔ औआऔ औआऔ औआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआौौऊएएऊऐऔऔआऔआऔऔआौऔअअौऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔौआऔआऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔ 2026-06-11 18:55:02
222608 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा ऊऔऊऔऔऊऔऊऊऔऊऔऊ ओ और औ औ औ औ औ औ औ औ ध्वजा आऔआऔआऔआआऔआऔआऔआ ओआऔआऔआऔ औआ में औआऔआऔ औआऔ औआऔ औआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआऔआौौऊएएऊऐऔऔआऔआऔऔआौऔअअौऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔौआऔआऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔ 2026-06-11 18:55:02
222606 40449680 श्री हुमड़ जैन समाज, पुणे ?(21 ) महिलाओं के द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक भाग-21 जो महिलाओ को भगवान का पंचामृत अभिषेक करने से रोकता है वह अगले जन्म में क्या फल मिलता है आचार्य कुंदकुंद उसका फल बताते हैं। खय-कुट्ठ-मूल-सूलो लूय-भयंदर-जलोयरक्खि-सिरो । सीदुण्ह-वाहि-राई पूया-दाणंतराय-कम्मफलं ॥36॥ अन्वयार्थ- [खय-कुट्ठ-मूल-सूलो] क्षय रोग, कुष्ठ रोग, मूल व्याधि, शूल [लूय] लूता {वायु का एक रोग अथवा मकड़ी का फरना} [भयंदर] भगंदर [जलोयरक्खि-सिरो] जलोदर अक्षी/नेत्र रोग, सिर पीड़ा/सिर के रोग [सीदुण्ह-वाहि-राइ] शीत से, उष्णता से, शीतोष्ण से होने वाली सन्निपात आदि व्याधियाँ- ये सब [पूया-दाणंतराय-कम्मफलं] पूजा (अभिषेक)-दान आदि धर्म कार्यों में किये गये अन्तराय कर्म का फल है। आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी के 'रयणसार' (गाथा 36) के माध्यम से उस कठोर सत्य को सामने रखा है, जो 'अंतराय कर्म' के भयानक विपाक (फल) को दर्शाता है। यह गाथा उन लोगों के लिए एक महान चेतावनी है जो अपनी संकीर्ण मान्यताओं के कारण दूसरों की भक्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं। यहाँ इस गाथा का दार्शनिक और कर्म-सिद्धांत की दृष्टि से विश्लेषण है: 1. अन्तराय कर्म: भक्ति के मार्ग का रोड़ा- जैन दर्शन के अनुसार, 'अन्तराय कर्म' वह है जो जीव की शक्ति और लाभ में बाधा डालता है। जब कोई व्यक्ति किसी महिला को भगवान का अभिषेक या पूजन करने से रोकता है, तो वह केवल एक व्यक्ति को नहीं रोक रहा, बल्कि वह 'पूजा-दान अन्तराय' कर्म का तीव्र बंध कर रहा है। 2. कुन्दकुन्द स्वामी द्वारा वर्णित भयानक फल गाथा में बताए गए रोग केवल शारीरिक व्याधियाँ नहीं हैं, बल्कि वे आत्मा पर पड़े उस 'मल' का परिणाम हैं जो दूसरों के धर्म में विघ्न डालने से उत्पन्न हुआ है: कुष्ठ और क्षय (Leprosy &amp; TB): जो हाथ भगवान के अभिषेक के कलश को रोकते हैं, वे अगले जन्मों में कुष्ठ जैसे असाध्य रोगों से ग्रस्त होते हैं। नेत्र और शिर रोग: जो आँखें दूसरों की भक्ति को देखकर द्वेष से भर जाती हैं, वे भविष्य में दृष्टिहीनता या नेत्र रोगों का फल भोगते हैं। भगंदर और जलोदर: ये अत्यंत कष्टकारी रोग उस 'अंतराय' का फल हैं जो किसी के आध्यात्मिक आनंद (हर्ष) में बाधा डालने से पैदा होता है। 3. 'अवर्णवाद' और 'अन्तराय' का संगम जब कोई व्यक्ति यह कहता है कि "शास्त्र में उल्लेख नहीं है" (जबकि उल्लेख मौजूद है), तो वह दोहरे पाप का भागी बनता है: दर्शनमोहनीय (मिथ्यात्व): सत्य को झुठलाने के कारण। अन्तराय कर्म: श्राविकाओं की पूजा-भक्ति में बाधा डालने के कारण। 4. कर्म का अटल सिद्धांत- आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी स्पष्ट करते हैं कि कर्म किसी के सामाजिक पद या प्रभाव को नहीं देखते। नियम सरल है: दाता/भक्त को रोकना = स्वयं के लिए दरिद्रता और रोगों को आमंत्रण देना। अभिषेक से रोकना = अपनी ही आत्मा के कल्याण के मार्ग में दीवार खड़ी करना। निष्कर्ष- यह प्रस्तुति सिद्ध करती है कि महिलाओं को अभिषेक से रोकना कोई 'मर्यादा' नहीं, बल्कि एक 'महापाप' है जिसका फल नरक गति और तिर्यंच गति के समान दुखों से भरा है। "जो दूसरों के हाथों से पुण्य का कलश छीनते हैं, उन्हें भविष्य में स्वयं की देह का बोझ उठाना भी भारी हो जाता है।" यह गाथा आज के समाज के लिए एक आईना है। यदि सम्यग्दर्शन सुरक्षित रखना है और इन भयानक रोगों (व्याधियों) से बचना है, तो प्रत्येक भव्य जीव (चाहे वह स्त्री हो या पुरुष) की भक्ति की अनुमोदना करनी चाहिए, न कि उसमें विघ्न डालना चाहिए। ✋शुभाशीर्वाद आर्षमार्ग संरक्षक प्रभावना प्रभाकर आगम दिवाकर आचार्य पावनकीर्ति 2026-06-11 18:54:48