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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 71312 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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2026-04-09 08:45:39 |
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| 71311 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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2026-04-09 08:45:38 |
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| 71310 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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*विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है* ? *7977363758*? <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183754993?utm_source=android_post_share_web&referral_code=Z3WPJ&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183754993?utm_source=android_post_share_web&referral_code=Z3WPJ&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 08:45:00 |
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| 71309 |
40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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*विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है* ? *7977363758*? <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1183754993?utm_source=android_post_share_web&referral_code=Z3WPJ&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1183754993?utm_source=android_post_share_web&referral_code=Z3WPJ&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-04-09 08:44:59 |
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| 71307 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*लोग कहते है, कि किसी*
*एक के चले जाने से जिंदगी*
*अधूरी नहीं होती,*
*लेकिन..*
*लाखों के मिल जाने से उस*
*एक की कमी पुरी नहीं* *होती..*
*जय जिनेंद्र??????*
*आपका हर पल मंगलमय हो???* |
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2026-04-09 08:44:26 |
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| 71308 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*लोग कहते है, कि किसी*
*एक के चले जाने से जिंदगी*
*अधूरी नहीं होती,*
*लेकिन..*
*लाखों के मिल जाने से उस*
*एक की कमी पुरी नहीं* *होती..*
*जय जिनेंद्र??????*
*आपका हर पल मंगलमय हो???* |
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2026-04-09 08:44:26 |
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| 71305 |
40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-09 08:42:22 |
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| 71306 |
40449681 |
JAINAM JAYATI SHASANAM |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-09 08:42:22 |
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| 71304 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-09 08:42:01 |
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| 71303 |
42131354 |
जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन |
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*भारतीय इतिहास का सबसे जघन्य हत्याकांड था 8000 जैन संतों और श्रावकों की निर्मम हत्या* क्योंकि
*इन्होंने अपना धर्म नहीं त्यागा* लेकिन *वर्तमान में महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा (जैन) अपने कुतर्क और राजनीति की चिकनी चुपड़ी बातों से जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान और सिद्धांतों को त्यागकर अन्य धर्म का हिस्सा बनाने का दुस्साहस कर रहे है?, लेकिन कम जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक सिख और बौद्ध धर्म को स्वतंत्र धर्म का हिस्सा मानते है। क्यों???*
क्या भारत का लाखों करोड़ो वर्ष प्राचीन मूल जैन धर्म और समाज इतना कमजोर हो गया कि अपनी स्वतंत्र पहचान का अधिकारी नहीं?
समय के अनुसार जैन समाज की संख्या कम या अधिक रही और कुछ डरपोक जैनों ने अपना धर्म परिवर्तन किया लेकिन अधिकतर जोनों ने किसी के डर या बहकावे में अपने धर्म को न छोड़ा और न छोड़ेंगे ??
देश का सबसे अधिक पढ़ा लिखा जैन समाज अपनी स्वतंत्र पहचान, तीर्थ संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रयास करता आया है और करता रहेगा।
प्राचीन जैन तीर्थों और प्रतिमाओं का स्वरूप परिवर्तन किया गया और करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन हमारे कुछ बंधु कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनका अपने धर्म के प्रति समर्पण ही नहीं।
कृपया अपने स्वतंत्र धर्म की पहचान के लिए आवाज उठाएं और आज इस आवश्यक विषय में अवश्य चर्चा करें...संजय जैन
??जैनम जयतु शासनम?? |
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2026-04-09 08:42:00 |
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