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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
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| 221735 |
41139993 |
+120363368584592632 |
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2026-06-11 11:38:08 |
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| 221734 |
41139993 |
+120363368584592632 |
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2026-06-11 11:38:07 |
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| 221732 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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2026-06-11 11:35:58 |
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| 221733 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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2026-06-11 11:35:58 |
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| 221730 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*? धार्मिक एवं संघ के कार्यक्रम अब रिसॉर्ट नहीं, धर्मस्थान में करें*
?? एक विनम्र निवेदन... ??
आजकल अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं संघ की बैठकों तथा कार्यक्रमों का आयोजन रिसॉर्ट, होटल या विवाह हॉल में होने लगा है। यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पुण्य के अवसरों से दूर जाने का कारण भी बन रहा है।
*? आइए, पुनः धर्मस्थान संस्कृति को अपनाएँ...*
*? धर्मस्थान में कार्यक्रम करने के अमूल्य लाभ :*
✨ 1. परमात्मा और गुरु भगवंत का सान्निध्य
कार्यक्रम के साथ जिनेन्द्र भगवान के दर्शन, गुरु भगवंत के दर्शन एवं वंदन का लाभ मिलता है।
✨ 2. लक्ष्मी का सदुपयोग
धर्मशाला, भोजनशाला एवं तीर्थ की व्यवस्थाओं में सहयोग देकर धर्मकार्य को बल मिलता है।
✨ 3. जयणा पूर्वक एवं सात्विक भोजन
अहिंसा और संयम की भावना से निर्मित भोजन शरीर और आत्मा दोनों के लिए हितकारी होता है।
✨ 4. पवित्र भूमि का प्रभाव
धर्मस्थान की शुद्ध एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से कार्यों में मंगलता और सफलता बढ़ती है।
✨ 5. निर्दोष सुपात्र दान का लाभ
हमारी प्रत्येक राशि धर्म, साधु-साध्वीजी एवं समाज के हित में लगती है।
✨ 6. साधर्मिक भक्ति का लाभ
अपने ही समाज के सेवाभावी साधर्मिकों को सहयोग देने का अवसर प्राप्त होता है।
✨ 7. अनुकम्पा एवं जीवदया का पुण्य
अनेक धर्मस्थानों में गौशाला, जीवदया, जरूरतमंदों की सहायता जैसी सेवाओं से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर मिलता है।
✨ 8. नई पीढ़ी को संस्कार
बच्चे और युवा धर्मस्थान से जुड़ेंगे, तभी उनमें जिनशासन के प्रति श्रद्धा और संस्कार विकसित होंगे।
✨ 9. धर्म और समाज दोनों का संवर्धन
धर्मस्थान जीवंत रहेंगे, संघ मजबूत होगा और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।
⚠️ रिसॉर्ट या विवाह हॉल में अधिक खर्च करने पर भी हमें ये आध्यात्मिक लाभ प्राप्त नहीं होते। कई स्थानों पर अभक्ष्य पदार्थों और असंयमित वातावरण के कारण शरीर और आत्मा दोनों को हानि पहुँचने की संभावना रहती है।
? आइए, एक सुंदर संकल्प लें...
? "जहाँ धर्म है, वहीं हमारे धार्मिक और संघीय कार्यक्रम हों।"
यदि हम धर्मस्थान को प्राथमिकता देंगे,
तो केवल एक कार्यक्रम नहीं करेंगे, बल्कि प्रत्येक अवसर को दर्शन, दान, साधर्मिक भक्ति, जीवदया और पुण्य का महापर्व बना देंगे।
? मेरी समस्त जैन समाज, संघों, ट्रस्टों एवं युवा मंडलों से
?
विनम्र प्रार्थना
है कि
धार्मिक एवं संघ के कार्यक्रमों के लिए रिसॉर्ट संस्कृति के स्थान पर पुनः धर्मस्थान संस्कृति को अपनाने का शुभ प्रयास करें।
? पहले धर्म... फिर आयोजन।
? पहले धर्मस्थान... फिर चर्चा विचारणा।
? पहले पुण्य... फिर प्रदर्शन।
? मिच्छामि दुक्कडम्
लेकिन
? :::
यह संदेश आलोचना नहीं, बल्कि धर्मस्थान के प्रति श्रद्धा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का एक विनम्र आव्हान है। |
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2026-06-11 11:35:55 |
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| 221731 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*? धार्मिक एवं संघ के कार्यक्रम अब रिसॉर्ट नहीं, धर्मस्थान में करें*
?? एक विनम्र निवेदन... ??
आजकल अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं संघ की बैठकों तथा कार्यक्रमों का आयोजन रिसॉर्ट, होटल या विवाह हॉल में होने लगा है। यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पुण्य के अवसरों से दूर जाने का कारण भी बन रहा है।
*? आइए, पुनः धर्मस्थान संस्कृति को अपनाएँ...*
*? धर्मस्थान में कार्यक्रम करने के अमूल्य लाभ :*
✨ 1. परमात्मा और गुरु भगवंत का सान्निध्य
कार्यक्रम के साथ जिनेन्द्र भगवान के दर्शन, गुरु भगवंत के दर्शन एवं वंदन का लाभ मिलता है।
✨ 2. लक्ष्मी का सदुपयोग
धर्मशाला, भोजनशाला एवं तीर्थ की व्यवस्थाओं में सहयोग देकर धर्मकार्य को बल मिलता है।
✨ 3. जयणा पूर्वक एवं सात्विक भोजन
अहिंसा और संयम की भावना से निर्मित भोजन शरीर और आत्मा दोनों के लिए हितकारी होता है।
✨ 4. पवित्र भूमि का प्रभाव
धर्मस्थान की शुद्ध एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से कार्यों में मंगलता और सफलता बढ़ती है।
✨ 5. निर्दोष सुपात्र दान का लाभ
हमारी प्रत्येक राशि धर्म, साधु-साध्वीजी एवं समाज के हित में लगती है।
✨ 6. साधर्मिक भक्ति का लाभ
अपने ही समाज के सेवाभावी साधर्मिकों को सहयोग देने का अवसर प्राप्त होता है।
✨ 7. अनुकम्पा एवं जीवदया का पुण्य
अनेक धर्मस्थानों में गौशाला, जीवदया, जरूरतमंदों की सहायता जैसी सेवाओं से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर मिलता है।
✨ 8. नई पीढ़ी को संस्कार
बच्चे और युवा धर्मस्थान से जुड़ेंगे, तभी उनमें जिनशासन के प्रति श्रद्धा और संस्कार विकसित होंगे।
✨ 9. धर्म और समाज दोनों का संवर्धन
धर्मस्थान जीवंत रहेंगे, संघ मजबूत होगा और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।
⚠️ रिसॉर्ट या विवाह हॉल में अधिक खर्च करने पर भी हमें ये आध्यात्मिक लाभ प्राप्त नहीं होते। कई स्थानों पर अभक्ष्य पदार्थों और असंयमित वातावरण के कारण शरीर और आत्मा दोनों को हानि पहुँचने की संभावना रहती है।
? आइए, एक सुंदर संकल्प लें...
? "जहाँ धर्म है, वहीं हमारे धार्मिक और संघीय कार्यक्रम हों।"
यदि हम धर्मस्थान को प्राथमिकता देंगे,
तो केवल एक कार्यक्रम नहीं करेंगे, बल्कि प्रत्येक अवसर को दर्शन, दान, साधर्मिक भक्ति, जीवदया और पुण्य का महापर्व बना देंगे।
? मेरी समस्त जैन समाज, संघों, ट्रस्टों एवं युवा मंडलों से
?
विनम्र प्रार्थना
है कि
धार्मिक एवं संघ के कार्यक्रमों के लिए रिसॉर्ट संस्कृति के स्थान पर पुनः धर्मस्थान संस्कृति को अपनाने का शुभ प्रयास करें।
? पहले धर्म... फिर आयोजन।
? पहले धर्मस्थान... फिर चर्चा विचारणा।
? पहले पुण्य... फिर प्रदर्शन।
? मिच्छामि दुक्कडम्
लेकिन
? :::
यह संदेश आलोचना नहीं, बल्कि धर्मस्थान के प्रति श्रद्धा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का एक विनम्र आव्हान है। |
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2026-06-11 11:35:55 |
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| 221729 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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*दान देने में ये न समझे कि आप ही दान दे रहे हो, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सोलह हजार सफेद गायों का दान किया था.....* युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ???✨✨??? ???????? राम रहे अविराम निज - में रमते अभिराम। राम नाम लेता रहूँ, प्रणाम आठों याम ।।७४।। ? *सर्वोदय शतक* ? आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-06-11 11:35:52 |
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आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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*दान देने में ये न समझे कि आप ही दान दे रहे हो, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सोलह हजार सफेद गायों का दान किया था.....* युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ???✨✨??? ???????? राम रहे अविराम निज - में रमते अभिराम। राम नाम लेता रहूँ, प्रणाम आठों याम ।।७४।। ? *सर्वोदय शतक* ? आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-06-11 11:35:51 |
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40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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*दान देने में ये न समझे कि आप ही दान दे रहे हो, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सोलह हजार सफेद गायों का दान किया था.....* युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ???✨✨??? ???????? राम रहे अविराम निज - में रमते अभिराम। राम नाम लेता रहूँ, प्रणाम आठों याम ।।७४।। ? *सर्वोदय शतक* ? आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-06-11 11:35:17 |
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40449667 |
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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*दान देने में ये न समझे कि आप ही दान दे रहे हो, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सोलह हजार सफेद गायों का दान किया था.....* युगश्रेष्ठ संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ???✨✨??? ???????? राम रहे अविराम निज - में रमते अभिराम। राम नाम लेता रहूँ, प्रणाम आठों याम ।।७४।। ? *सर्वोदय शतक* ? आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-06-11 11:35:17 |
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