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Message
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40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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*?ऐंसे होते हैं आचार्य?*
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_मैंने माँ बनकर देखा है की दुनिया भरी पड़ी है खुद के लिए जीने वालों से, वह महापुरुष ही होता है निज के साथ पर कल्याण की भावना रखता है, और मात्र भावना ही नहीं रखता उसे निज पुरुषार्थ से पूर्ण भी करता है,_
_हम अपने मन का एक कोना बसाकर, स्वयं की इच्छा एवं सुविधा अनुसार शेष जगत के प्रति विमुख होकर स्वयं को कर्तव्य निष्ठ मान लेते हैं, यह भारी भूल है, वास्तव में समूचे लोक के कल्याण का भाव ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म कर्तव्य है यह सीख तुम्हें आचार्य श्री विद्यासागर जी से मिल चुकी थी, इसलिए मैं देख रही हूँ तुम्हारे कदम बढ़ चुके हैं आचार्य भगवान के सपनों, उनके प्रकल्पों को पूरा करने की ओर!_
_*हथकरघा, प्रतिभास्थली, पूर्णायु, दयोदय, शांतिधारा, भव्य अधूरे पाषाण जिनालय आदि को उनके लक्ष्य तक पहुंचाने की ओर तुम सारा ध्यान केंद्रित किये हो, अभी नागपुर में तुम्हारा संघस्थ साधकों से यह कहना की " मुझे आचार्य श्री बहुत बड़ी जिम्मेदारी दे कर गए हैं, समस्त मुनियों - ऐलकों की जिम्मेदारी, समस्त संघस्थ आर्यिकाओं की जिम्मेदारी, व्रतधारी ब्रह्मचारीयों की जिम्मेदारी, समस्त बहिनों की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है, और मेरे पास समय कम है, मुझे अन्य किसी प्रयोजन से कोई लगन नहीं, मुझे केवल और केवल गुरु जी के संघ का पालन - शिक्षण - और उनका भविष्य निर्धारित करना है, आपने स्पष्ट कहा है की मुझे नई राह नहीं बनाना अपितु जो राह गुरु देकर गए हैं उस पर चलना है, मुझे कुछ नया करना ही नहीं है जो मिला है उसे आगे ले जाना ही गुरु आज्ञा है.*_
_मैं देखती हूँ की प्रतिदिन प्रवचन में आप का एक शब्द भी आगम प्रतिकूल नहीं होता, न उसमें कोई विषाद, न कोई अहंकार, न कोई क्रोध तनिक भी जनमानस को दिखाई देता है, तुमने निंदा करने वाले की भी निंदा तो दूर की बात एक शब्द भी उसके लिए बोलना आज तक उचित नहीं समझा है, तुम स्वयं ज्ञान के सागर होकर भी अपने प्रवचन में निजवाणी की प्रभावना से दूर होकर केवल जिनवाणी का आश्रय लेते हो और कहते हो हर बार की ऐंसा आगमकारो नें कहा है और गुरु जी ऐंसा कहते थे.....यही गुण आपको सर्वोपरि - सर्वोच्च महाश्रमण के पद पर स्वतः ही शोभायमान करता हुआ स्थापित करता है, जिसकी अनुभूति हर भक्त को है!_
_*मैंने देखा है आज जहाँ श्रावक और कुछ साधक निरंतर संसार के प्रलोभनो के पीछे दौड़ पड़े है, खेद है की अनेक साधक यशकीर्ति की इस प्रतिकूल दौड़ में साधकता पर कम ध्यान दे पा रहे हैं किन्तु आप अब भी इस रंगारंग जगत में केवल आत्म सरोवर में डूबकर पुण्यवानों का मार्गदर्शन कर रहे हैं, आप अतीत की स्मृति एवं अनागत की आकांक्षा से परे होकर, अपने आत्मकल्याण एवं पर कल्याण में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं, आज तक एक भी प्रश्न आप पर खड़ा करने का अवसर धरती पर किसी को मिला नहीं है, जबकि इस काल में जिनकी साधुता पर अनेकों प्रश्न होकर भी साधक स्वयं को सचेत नहीं कर पा रहा है, आप जैसे महान आचार्य को पाकर आज पूरा संघ एवं समाज धन्य हो गया है.*_
_तुम्हारा यही व्यक्तित्व तुम्हें समस्त संघ से अलग उच्चतम स्तर का साधक प्रतिपादित करता है शायद तुम्हारा यही अद्भुत गुण था जिसे उन महान शिल्पी नें बहुत पहले परख लिया था, जो उस शिल्पी को इस कलश को सर्वोच्च मंगलकलश बनाने के लिए प्रेरित करता रहा, तुम जीवन भर अपने गुरु के पीछे पीछे चले उसका ही परिणाम है की आज ये दुनिया ये समाज, ये संघ आपके पीछे पीछे चलने को समर्पित है और चलकर अपना सौभाग्य मान रही है..._
••_तुमने अपने जीवन को ज्ञान -दर्शन -चर्चा -चर्या -एवं आचरण की वो त्रिवेणी बना लिया है जिसमें अवगाहित होकर हर मनुष्य अपने पापों का प्रक्षालन करके शुद्ध बन सकता है,_••
_जन जन के मानस पर एक दिगंबर जैन संत की जितनी साफ सुथरी सौम्य छवि आपने अंकित की है उसे अन्य से तुलना करना ज्ञान का ह्रास ही मालूम पड़ता है!यही आदर्श आचार्य की परिभाषा आचार्य श्री जी नें बताई थी जिसे तुम जीवन में आत्मसात करके दिखा रहे हो और यही विद्यावंश का स्वर्णिम इतिहास रहा है!_
••••ऐंसे महान आगमानुकूल आचार्य को लेखनी का प्रणिपात!•••
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✍️आशीष सिंघई श्री जी
12-6-2026
(आप भी पढ़कर सभी को भेजें )
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2026-06-12 12:44:12 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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पूज्य गुरुदेव ने भी देखी युवाओं द्वारा बनाई गई रंगोली |
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2026-06-12 12:43:10 |
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| 224449 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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पूज्य गुरुदेव ने भी देखी युवाओं द्वारा बनाई गई रंगोली |
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2026-06-12 12:43:09 |
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40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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✿༺ *मंगल विहार सूचना* ༻✿
*वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) का संभावित मंगल विहार एवं अल्प प्रवास सूचना*
दिनांक *12 जून 2026*
को आज
*श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बेगस*, जिला जयपुर मैं विराजमान है।
?
<a href="https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac</a>
???????????
दिनांक *13 जून 2026* को
प्रातः विहार 5.15 बजे से
*5.6 किलोमीटर*
बेगस से
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, *चक बैगास*
?
<a href="https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac</a>
नोट:- ससंघ का 13 जून का रात्रि विश्राम यहीं होगा।
➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪➤⃪
➡️ विहार दिशा *जोबनेर की ओर*
*════════════*
*सूचना प्रदाता*
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
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2026-06-12 12:41:35 |
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| 224448 |
40449664 |
?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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✿༺ *मंगल विहार सूचना* ༻✿
*वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) का संभावित मंगल विहार एवं अल्प प्रवास सूचना*
दिनांक *12 जून 2026*
को आज
*श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बेगस*, जिला जयपुर मैं विराजमान है।
?
<a href="https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/YZNfi7Vumy6mbWn1A?g_st=ac</a>
???????????
दिनांक *13 जून 2026* को
प्रातः विहार 5.15 बजे से
*5.6 किलोमीटर*
बेगस से
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, *चक बैगास*
?
<a href="https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/oxLs4Hs6p9ybA7eVA?g_st=ac</a>
नोट:- ससंघ का 13 जून का रात्रि विश्राम यहीं होगा।
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➡️ विहार दिशा *जोबनेर की ओर*
*════════════*
*सूचना प्रदाता*
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
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2026-06-12 12:41:35 |
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| 224445 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://www.instagram.com/reel/DZacwI7iVii/?igsh=MW16b2I4a3RlcDZoYg==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DZacwI7iVii/?igsh=MW16b2I4a3RlcDZoYg==</a>
Follow me |
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2026-06-12 12:40:38 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://www.instagram.com/reel/DZacwI7iVii/?igsh=MW16b2I4a3RlcDZoYg==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DZacwI7iVii/?igsh=MW16b2I4a3RlcDZoYg==</a>
Follow me |
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2026-06-12 12:40:38 |
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| 224443 |
40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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2026-06-12 12:38:04 |
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40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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2026-06-12 12:38:04 |
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40449701 |
??संत शिरोमणि अपडेट?? |
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*?भ.पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बिबेवाडी,पुणे,महाराष्ट्र ?*
*आहार अपडेट*
ता-12/06/2026
*संत शिरोमणी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के परम शिष्य*
*विद्या शिरोमणिआचार्य श्री समय सागर जी महाराजजी*
परम शिष्य
*मुनिश्री अक्षय सागर जी महाराज जी*
*मुनि श्री निराकुल सागर महाराज जी*
ससंघ
*पडगाहन, आहार दृष्य*
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*साधुवसवनी चौक,पुणे*
??????लोकेशन
<a href="https://maps.app.goo.gl/1GJDBUdmSdydsyNp7?g_st=aw" target="_blank">https://maps.app.goo.gl/1GJDBUdmSdydsyNp7?g_st=aw</a>
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*सौभाग्य-सौ.संगिता काकु श्री अतुल काका सराफ, पुणे*
संकलन-
*?शांति विद्या धर्म प्रभावना संघ?* |
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2026-06-12 12:38:02 |
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