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40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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*धरोहर सुरक्षा एवं समाधान बैठक कल रविवार 15 फरवरी 2026*
चारदीवारी जयपुर शहर के सभी जैन मंदिरों के पदाधिकारीगण एवं कार्यकारिणी सदस्य से विनम्र अनुरोध है कि अपने-अपने मंदिरों की समस्याओं के स्थायी निराकरण एवं हमारी अमूल्य धरोहरों की सुरक्षा व विकास हेतु आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में अनिवार्य रूप से पधारें। इस आवश्यक मीटिंग में निम्न विशेषज्ञ मंदिरजी की समस्याओं के समाधान में विशेष रूप से सहयोग करेंगे।
*श्री राजेशजी जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता*
*श्री निहालजी सोगानी, वरिष्ठ अधिवक्ता*
*श्री विकासजी, जैन चार्टर्ड अकाउंटेंट*
*समय:* दोपहर 1:00 बजे *स्थान:* श्री दिगंबर जैन मंदिर, यति यशोदानंदजी, चौड़ा रास्ता
इस बैठक की सूचना व्हाट्सएप एवं टेलीफोन के माध्यम से सभी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है। यदि किसी कारणवश व्यक्तिगत संपर्क न हो पाया हो तो हम क्षमाप्रार्थी हैं, आपसे निवेदन है कि बैठक प्रारंभ होने से 10 मिनट पूर्व अपने स्थान ग्रहण करें। *आपका सक्रिय सहयोग ही स्थायी समाधान और सुरक्षित भविष्य का आधार है।*
निवेदक
*जयपुर जैन सभा समिति* |
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2026-02-14 07:43:26 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-02-14 07:43:25 |
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47534159 |
Maharstra (kartick) |
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*आत्मचिंतन - (सं.2531)*
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*श्रीतत्त्वार्थसूत्र एवं मोक्षशास्त्र*
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(*178*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* उर्फ *मोक्षशास्त्र* एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ / आगम / शास्त्र है, जो जैन दर्शन का सुंदर विश्लेषण करता है। हम इसकी व्याख्या चरण दर चरण समझ रहे हैं -
*॥ दूसरा अध्याय ॥*
*एकसमयाSविग्रहा ॥*
(अध्याय 2 / सूत्र 29)
*एक समया अविग्रह ॥ 2/29॥*
*अर्थ -*
~~~~~~
*जो गति किसी भी मोड़ से रहित होती है वह केवल एक समय के लिए होती है।*
*इस गति को "ऋजु गति" कहते हैं। इस गति को "इषु गति" भी कहते हैं।*
○ जब दो समय लगते हैं, उसे *पाणिमुक्तागति..*
○ जब तीन बार लगते हैं, उसे *लांगलिकागति..*
○ जब चार समय लगते हैं, उसे *गोमूत्रिकागति..*
...कहते है ।
*(क्रमशः) ( ता. 14/02/2026 )*
*--डॉ.अजीत जे.पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र*
???
(कु.9044/आ.3185) |
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2026-02-14 07:41:06 |
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| 2983 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Vandami mataji ?? |
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2026-02-14 07:40:52 |
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40449732 |
? पंच परमेष्ठी जैनसमूह ? |
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*? झलकियाँ Exclusive Highlight Video सिर्फ पुण्योदय विद्यापथ चैनल पर उपलब्ध | प्रथम दिवस | खनियांधाना पंचकल्याणक*
निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ व मुनिश्री निरापद सागर जी महाराज | 11 फरवरी 2026
*? Full HD क्वालिटी में देखिये*
<a href="https://youtu.be/magavNs2VZI" target="_blank">https://youtu.be/magavNs2VZI</a>
*? धर्मप्रभावना पुण्यार्जक*
पंचकल्याणक महोत्सव समिति, खनियांधाना
*? वीडियोग्राफी व मीडिया मैनेजमेंट*
मित्रा फ़िल्म्स, इंदौर | 9926247717
*??पुण्योदय विद्यापथ??*
<a href="https://linktr.ee/punyodaya" target="_blank">https://linktr.ee/punyodaya</a> |
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2026-02-14 07:40:16 |
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| 2981 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Vandami mataji ??? |
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2026-02-14 07:39:58 |
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40449689 |
? विद्या शरणम ०१ ? |
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<a href="https://youtube.com/shorts/Rl22o7PY6bc?si=7XARywSXRljfVujD" target="_blank">https://youtube.com/shorts/Rl22o7PY6bc?si=7XARywSXRljfVujD</a> |
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2026-02-14 07:39:25 |
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40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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*शादी सादगी से कीजिए, दिखावे से नहीं — क्योंकि मेहमान स्वाद लेकर चले जाते हैं और कर्ज़ उम्र भर साथ चलता है*
शादी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र संस्कार है, लेकिन आज यही संस्कार दिखावे, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव का शिकार बनता जा रहा है। लोग यह देखने में अधिक रुचि रखते हैं कि “लोग क्या कहेंगे”, बजाय इसके कि यह सोचें कि शादी के बाद जीवन कैसे चलेगा। बड़े-बड़े पंडाल, महंगे होटल, सैकड़ों व्यंजन, भव्य सजावट, महंगे कपड़े और अनावश्यक रस्मों में लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, जबकि इन सबका लाभ कुछ घंटों का ही होता है। मेहमान आते हैं, खाते हैं, तुलना करते हैं और चले जाते हैं। किसी को यह याद नहीं रहता कि आपने कितना कर्ज़ लेकर यह सब किया, लेकिन उस कर्ज़ की किश्तें आपकी पूरी ज़िंदगी का सुकून छीन लेती हैं।
शादी के तुरंत बाद असली जीवन की जिम्मेदारियाँ शुरू होती हैं। घर बसाने का खर्च, बच्चों का भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, माता-पिता की सेवा और आपात परिस्थितियाँ—इन सबके लिए आर्थिक स्थिरता आवश्यक होती है। यदि शादी के नाम पर पहले ही भारी कर्ज़ सिर पर लाद लिया गया तो हर खुशी बोझ लगने लगती है। कई परिवारों में इसी कारण तनाव, कलह और मानसिक दबाव पैदा होता है। सादगी से की गई शादी न केवल आर्थिक रूप से सुरक्षित होती है, बल्कि मानसिक शांति भी देती है। सादगी का अर्थ यह नहीं कि खुशी कम हो जाती है, बल्कि यह दर्शाता है कि परिवार में समझदारी, आत्मविश्वास और संतुलन है।
समाज को भी आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। बारात में व्यंजनों की संख्या गिनना, कपड़ों की कीमत आँकना और आयोजन की तुलना करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। विवाह का उद्देश्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि दो जीवनों का जिम्मेदारीपूर्ण और स्थायी बंधन है। यदि हम आज सादगी को अपनाएँगे तो न केवल अपने बच्चों को कर्ज़ से बचाएँगे, बल्कि उन्हें यह संदेश भी देंगे कि सम्मान दिखावे से नहीं, विचार और आचरण से मिलता है। सच्ची खुशहाली उसी घर में होती है जहाँ खर्च सीमित हो और सोच व्यापक।
— नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-02-14 07:39:10 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtu.be/Bp5vUhy-dDc?si=XorPpdUv0iCgPQ2D" target="_blank">https://youtu.be/Bp5vUhy-dDc?si=XorPpdUv0iCgPQ2D</a> |
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2026-02-14 07:39:01 |
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संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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<a href="https://www.youtube.com/live/u0S7FipI1Mk?si=OOkmUbwar6k1FM_t" target="_blank">https://www.youtube.com/live/u0S7FipI1Mk?si=OOkmUbwar6k1FM_t</a> 卐▬▬▬▬▬ஜ?ஜ▬▬▬▬▬卐 ?️卐अजित वाणी 1️⃣4️⃣फरवरी 26卐?️ 卐▬▬▬▬▬ஜ?ஜ ▬▬▬▬卐 *शांत रहना कमजोरी नहीं, यह समझदारी की निशानी हैं,, क्योंकि हर ज़बाब शब्दों से नहीं व्यवहार से दिया जाता है,,* ✍ प्रवचनांश~मुनिवर श्री अजितसागर जी ╭══════ஜ۩۞۩ஜ═══════╮ ? *परम् पूज्य प्रशममूर्ति, मुनिवर श्री १०८ अजितसागर जी महाराज*? ससंघ 03 पिच्छी आज ?*श्री चंद्रप्रभु जिनालय (वडाला वेस्ट )में विराजमान है*? <a href="https://maps.app.goo.gl/hntVW1PpsR9vunsr5?g_st=..." target="_blank">https://maps.app.goo.gl/hntVW1PpsR9vunsr5?g_st=...</a> <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179326530?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179326530?utm_source=android_post_share_web&referral_code=JBHJP&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=PENDING</a> |
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2026-02-14 07:38:45 |
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