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Chat Name
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Message
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Status
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Date |
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| 73899 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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2026-04-10 07:45:55 |
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| 73900 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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2026-04-10 07:45:55 |
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| 73898 |
40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*विषय*~ *_तीर्थंकर वृषभनाथ बनने के पूर्व के तीसरे भव से लेकर गृहस्थ अवस्था तक का परिचय..._*
*(1)* *तीर्थंकर नाम~* _श्री वृषभनाथ जी।_
*(2)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के द्वीप का नाम~* _जम्बूद्वीप।_
*(3)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के क्षेत्र का नाम~* _पूर्व विदेह क्षेत्र।_
*(4)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के देश या प्रांत का नाम~* _पुष्कलावति देश।_
*(5)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर का नाम~* _पुण्डरीकिणी नगर।_
*(6)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर की सीमा~* _पूर्व विदेह क्षेत्र की सीमा।_
*(7)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव का नाम~* _वज्रनाभि।_
*(8)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट पद पर आसीन थे ~* _चक्रवर्ती।_
*(9)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में वहाँ के गुरु का नाम~* _वज्रसेन।_
*(10)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे में शरीर का रंग~* _सुवर्ण रंग।_
*(11)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट ज्ञान के वेत्ता थे ~*
_11अंग 14 पूर्व के वेत्ता थे।_
*(12)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में किस प्रकार के व्रत का आचरण किया था~*
_सिंहनिष्क्रीड़ित व्रत को किया था।_
*(13)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में किस प्रकार के मरण को धारण किया हुआ था~*
_प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(14)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में कितने समय तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया हुआ था~*
_एक मास पर्यन्त तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(15)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में प्रायोपगमन सन्यास को धारणकर मरण करके किस गति को प्राप्त करते हैं~*
_देवगति को।_
*(16)* *किस स्वर्ग से चयकर तीर्थंकर हुए~*
_सर्वार्थ सिद्धि विमान से।_
*(17)* *स्वर्ग में वहाँ किस पद पर आसीन थे~* _अहमिन्द्र पद पर आसीन थे।_
*(18)* *तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मभूमि/ देश का नाम~* _कौशल देश।_
*(19)* *तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मपुरी (नगर या पट्टन) का नाम~* _अयोध्यापुरी (साकेतपुर नगर)।_
*(20)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में वंश का नाम~*
_इक्ष्वाकुवंश।_
*(21)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में जनक (पिता)~*
_राजा नाभिराय।_
*(22)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में जननी (माता)~*
_रानी मरुदेवी।_
*(23)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की गर्भ तिथि~*
_आषाढ़ कृष्ण द्वितीया।_
*(24)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ समय~*
_रात्रि के अंत समय।_
*(25)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ नक्षत्र~*
_उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(26)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म तिथि~*
_चैत्र कृष्ण की नवमीं तिथि।_
*(27)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म समय~*
_अनुपलब्ध।_
*(28)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म नक्षत्र~*
_उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(29)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म राशि~*
_धनु राशि।_
*(30)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर का वर्ण (रंग)~* _तपाते हुए सोने के समान वर्ण।_
*(31)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर की ऊँचाई का माप धनुष में ~* _500 धनुष।_
*(32)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में लांछन (चिह्न)~*
_वृषभ (बैल)।_
*(33)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में कुमार काल प्रमाण~*
_20 लाख पूर्व।_
(34) *तीर्थंकर के वर्तमान भव में राज्यावस्था का काल प्रमाण~* _63 लाख पूर्व।_
*(35) दीक्षाकाल में छद्मस्थ अवस्था का काल प्रमाण~* _1000 वर्ष।_
*(36) दीक्षाकाल में केवली अवस्था का काल प्रमाण~* _1000 वर्ष कम-एक लाख पूर्व।_
*(37) पूर्ण आयु काल प्रमाण वर्ष~* _84 लाख वर्ष पूर्व।_
*(38) दीक्षा तिथि~* _चैत्र कृष्ण नवमीं।_
*(39) दीक्षा समय~* _अपराह्न काल।_
*(40) दीक्षा नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ा नक्षत्र।_
*(41) दीक्षा पालकी का नाम~* _सुदर्शन पालकी।_
*(42) दीक्षा नगर का नाम~* _प्रयाग नगर।_
*(43) दीक्षा वन (उद्यान) का नाम~* _सिध्दार्थ वन।_
*(44) दीक्षा वृक्ष का नाम~* _वट वृक्ष।_
*(45) दीक्षा वृक्ष की ऊँचाई धनुष में~* _6,000 धनुष।_
*(46) वैराग्य का निमित्त कारण~* _नीलांजना की मृत्यु देखकर।_
*(47) दीक्षा कितने उपवास का नियम लेकर ग्रहण की(उत्तर पुराण/ हरिवंश पुराण)~* _6 मास के उपवास का नियम लेकर।_
*(48) दीक्षा के समय कितने राजाओं ने साथ में दीक्षा ली थी?~* _4,000 राजाओं ने।_
*(49) दीक्षा के बाद कितने दिनों बाद आहार लिया था~* _13 मास 9 दिन बाद_
*विशेष~* _चैत्र कृष्ण नवमीं से वैशाख शुक्ल तृतीया तक गणना करने पर 13 मास 9 दिन का समय आता है। फिर भी क्षय तिथि या अधिक तिथि आने पर यह प्रमाण एक दो दिन कम या अधिक हो सकता है।_
*(50) दीक्षा के बाद पारणा में कौन सा आहार लिया था~* _इक्षु रस।_
*(51) दीक्षा के बाद पारणा कराने वाले दाता का नाम~* _राजा श्रेयांस।_
*(52) दीक्षा के बाद पारणा किस नगर में हुई थी~* _हस्तिनापुर।_
*(53) मुनि अवस्था से अयोगकेवली तक के तप काल का प्रमाण~* _एकलाख पूर्व।_
*(54) केवलज्ञान के पहले उपवास अर्थात् धारणा का नियम~* _अष्टम् भक्त अर्थात् तीन उपवास पूर्वक।_
*(55) केवलज्ञान तिथि~* _फाल्गुन कृष्ण एकादशी।_
*(56) केवलज्ञान समय~* _पूर्वाह्न काल।_
*(57) केवलज्ञान नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(58) मानस्तम्भ की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(59) सिद्धार्थ वृक्ष की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(60) कोट की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(61) चैत्यवृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(62) वनों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(63) स्तूपों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(64) ध्वजाओं की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(65) वन वृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(66) प्रासादों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(67) तोरणद्वार की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(68) पर्वतों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(69) वेदिका की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(70) पर्वतों की चौड़ाई (धनुष में)~* _4,00,050 धनुष।_
*(71) स्तूपों की चौड़ाई (धनुष में)~* _500 धनुष से कुछ अधिक।_
*(72) कोट की चौड़ाई (धनुष में)~* _1500 धनुष।_
*(73) वेदिका की चौड़ाई (धनुष में)~* _1500 धनुष।_
*(74) विशेष पद~* _मण्डलीक राजा।_
*(75) केवलज्ञान वन का नाम~* _शकटा वन (पुरिमतालपुर)।_
*(76) केवलज्ञान वृक्ष का नाम~* _वट वृक्ष।_
*(77) समवशरण का विस्तार (योजन प्रमाण)~* _12 योजन।_
*(78) समवशरण का विस्तार (कोस प्रमाण)~* _48 कोस।_
*(79) समवशरण में तीर्थंकर भगवान का आसन~* _पद्मासन।_
*(80) समवशरण में रहने वाले सामान्य केवलियों की संख्या~* _20,000 केवली।_
*(81) समवशरण में रहने वाले पूर्व धारी मुनिराजों की संख्या~* _4,750 पूर्व धारी मुनिराज।_
*(82) समवशरण में रहने वाले शिक्षक मुनिराजों की संख्या~* _4,150 शिक्षक मुनिराज।_
*(83) समवशरण में रहने वाले विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _12,750 विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराज।_
*(84) समवशरण में रहने वाले विक्रिया ऋद्धिधारी योगियों की संख्या~* _20,600 विक्रिया ऋद्धिधारी योगी।_
*(85) समवशरण में रहने वाले अवधिज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _9,000 अवधिज्ञानी मुनिराज।_
*(86) समवशरण में रहने वाले वादी मुनिराजों की संख्या~*
_12,750 वादी मुनिराज।_
*(87) समवशरण में स्थित मुनि संघ की कुल संख्या~* _84,000 मुनि संघ_
*(88) मुख्य गणधर का नाम~* _वृषभसेन।_
*(89) सब गणधर की संख्या~* _84_
*(90) गणिनी आर्यिकाओं की संख्या~* _3,50,000 आर्यिकाएं।_
*(91) मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम~* _ब्राह्मी आर्यिका।_
*(92) मुख्य श्रोता का नाम~* _राजा भरत।_
*(93) श्रावकों की संख्या~* _श्रावक 3 लाख।_
*(94) श्राविकाओं की संख्या~* _श्राविकाएं 5 लाख।_
*(95) तीर्थंकरों का निर्वाण अंतर~* _50 लाख कोटि सागर।_
*(96) आयु के अंत में योग निरोध या विहार कब बंद किया था~* _14 दिन पहले।_
*(97) निर्वाण की तिथि~* _माघ कृष्ण 14_
*(98) निर्वाण का समय (हरिवंश पुराण अध्याय 60 से)~* _पूर्वाह्न काल।_
*(99) निर्वाण का नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(100) निर्वाण भूमि~* _कैलाश पर्वत।_
*(101) निर्वाण क्षेत्र का विशिष्ट स्थान (चूलिका)~* _कैलाश पर्वत की चूलिका।_
*(102) किस आसन से मोक्ष गए~* _पद्मासन।_
*(103) सौधर्म स्वर्ग से लेकर ऊर्ध्व ग्रैवेयक तक जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _3,100 मुनिराज।_
*(104) अनुत्तर विमान में जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _20,000 मुनिराज।_
*(105) तीर्थंकर के साथ सिद्ध होने वाले मुनिराजों की संख्या~* _10,000 मुनिराज।_
*(106) अनुबद्ध केवलियों की संख्या प्रथम मत के अनुसार~* _84 अनुबद्ध केवली।_
*(107) अनुबद्ध केवलियों की संख्या द्वितीय मत के अनुसार~* _100 अनुबद्ध केवली।_
*(108) धर्म का विच्छेद काल~* _आदिनाथ भगवान के समय धर्मतीर्थ का विच्छेद नही हुआ।_
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2026-04-10 07:45:21 |
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?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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*विषय*~ *_तीर्थंकर वृषभनाथ बनने के पूर्व के तीसरे भव से लेकर गृहस्थ अवस्था तक का परिचय..._*
*(1)* *तीर्थंकर नाम~* _श्री वृषभनाथ जी।_
*(2)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के द्वीप का नाम~* _जम्बूद्वीप।_
*(3)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के क्षेत्र का नाम~* _पूर्व विदेह क्षेत्र।_
*(4)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के देश या प्रांत का नाम~* _पुष्कलावति देश।_
*(5)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर का नाम~* _पुण्डरीकिणी नगर।_
*(6)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर की सीमा~* _पूर्व विदेह क्षेत्र की सीमा।_
*(7)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव का नाम~* _वज्रनाभि।_
*(8)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट पद पर आसीन थे ~* _चक्रवर्ती।_
*(9)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में वहाँ के गुरु का नाम~* _वज्रसेन।_
*(10)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे में शरीर का रंग~* _सुवर्ण रंग।_
*(11)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट ज्ञान के वेत्ता थे ~*
_11अंग 14 पूर्व के वेत्ता थे।_
*(12)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में किस प्रकार के व्रत का आचरण किया था~*
_सिंहनिष्क्रीड़ित व्रत को किया था।_
*(13)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में किस प्रकार के मरण को धारण किया हुआ था~*
_प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(14)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में कितने समय तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया हुआ था~*
_एक मास पर्यन्त तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(15)* *तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में प्रायोपगमन सन्यास को धारणकर मरण करके किस गति को प्राप्त करते हैं~*
_देवगति को।_
*(16)* *किस स्वर्ग से चयकर तीर्थंकर हुए~*
_सर्वार्थ सिद्धि विमान से।_
*(17)* *स्वर्ग में वहाँ किस पद पर आसीन थे~* _अहमिन्द्र पद पर आसीन थे।_
*(18)* *तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मभूमि/ देश का नाम~* _कौशल देश।_
*(19)* *तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मपुरी (नगर या पट्टन) का नाम~* _अयोध्यापुरी (साकेतपुर नगर)।_
*(20)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में वंश का नाम~*
_इक्ष्वाकुवंश।_
*(21)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में जनक (पिता)~*
_राजा नाभिराय।_
*(22)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में जननी (माता)~*
_रानी मरुदेवी।_
*(23)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की गर्भ तिथि~*
_आषाढ़ कृष्ण द्वितीया।_
*(24)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ समय~*
_रात्रि के अंत समय।_
*(25)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ नक्षत्र~*
_उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(26)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म तिथि~*
_चैत्र कृष्ण की नवमीं तिथि।_
*(27)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म समय~*
_अनुपलब्ध।_
*(28)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म नक्षत्र~*
_उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(29)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म राशि~*
_धनु राशि।_
*(30)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर का वर्ण (रंग)~* _तपाते हुए सोने के समान वर्ण।_
*(31)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर की ऊँचाई का माप धनुष में ~* _500 धनुष।_
*(32)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में लांछन (चिह्न)~*
_वृषभ (बैल)।_
*(33)* *तीर्थंकर के वर्तमान भव में कुमार काल प्रमाण~*
_20 लाख पूर्व।_
(34) *तीर्थंकर के वर्तमान भव में राज्यावस्था का काल प्रमाण~* _63 लाख पूर्व।_
*(35) दीक्षाकाल में छद्मस्थ अवस्था का काल प्रमाण~* _1000 वर्ष।_
*(36) दीक्षाकाल में केवली अवस्था का काल प्रमाण~* _1000 वर्ष कम-एक लाख पूर्व।_
*(37) पूर्ण आयु काल प्रमाण वर्ष~* _84 लाख वर्ष पूर्व।_
*(38) दीक्षा तिथि~* _चैत्र कृष्ण नवमीं।_
*(39) दीक्षा समय~* _अपराह्न काल।_
*(40) दीक्षा नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ा नक्षत्र।_
*(41) दीक्षा पालकी का नाम~* _सुदर्शन पालकी।_
*(42) दीक्षा नगर का नाम~* _प्रयाग नगर।_
*(43) दीक्षा वन (उद्यान) का नाम~* _सिध्दार्थ वन।_
*(44) दीक्षा वृक्ष का नाम~* _वट वृक्ष।_
*(45) दीक्षा वृक्ष की ऊँचाई धनुष में~* _6,000 धनुष।_
*(46) वैराग्य का निमित्त कारण~* _नीलांजना की मृत्यु देखकर।_
*(47) दीक्षा कितने उपवास का नियम लेकर ग्रहण की(उत्तर पुराण/ हरिवंश पुराण)~* _6 मास के उपवास का नियम लेकर।_
*(48) दीक्षा के समय कितने राजाओं ने साथ में दीक्षा ली थी?~* _4,000 राजाओं ने।_
*(49) दीक्षा के बाद कितने दिनों बाद आहार लिया था~* _13 मास 9 दिन बाद_
*विशेष~* _चैत्र कृष्ण नवमीं से वैशाख शुक्ल तृतीया तक गणना करने पर 13 मास 9 दिन का समय आता है। फिर भी क्षय तिथि या अधिक तिथि आने पर यह प्रमाण एक दो दिन कम या अधिक हो सकता है।_
*(50) दीक्षा के बाद पारणा में कौन सा आहार लिया था~* _इक्षु रस।_
*(51) दीक्षा के बाद पारणा कराने वाले दाता का नाम~* _राजा श्रेयांस।_
*(52) दीक्षा के बाद पारणा किस नगर में हुई थी~* _हस्तिनापुर।_
*(53) मुनि अवस्था से अयोगकेवली तक के तप काल का प्रमाण~* _एकलाख पूर्व।_
*(54) केवलज्ञान के पहले उपवास अर्थात् धारणा का नियम~* _अष्टम् भक्त अर्थात् तीन उपवास पूर्वक।_
*(55) केवलज्ञान तिथि~* _फाल्गुन कृष्ण एकादशी।_
*(56) केवलज्ञान समय~* _पूर्वाह्न काल।_
*(57) केवलज्ञान नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(58) मानस्तम्भ की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(59) सिद्धार्थ वृक्ष की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(60) कोट की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(61) चैत्यवृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(62) वनों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(63) स्तूपों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(64) ध्वजाओं की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(65) वन वृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(66) प्रासादों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(67) तोरणद्वार की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(68) पर्वतों की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(69) वेदिका की ऊँचाई (धनुष में)~* _6,000 धनुष।_
*(70) पर्वतों की चौड़ाई (धनुष में)~* _4,00,050 धनुष।_
*(71) स्तूपों की चौड़ाई (धनुष में)~* _500 धनुष से कुछ अधिक।_
*(72) कोट की चौड़ाई (धनुष में)~* _1500 धनुष।_
*(73) वेदिका की चौड़ाई (धनुष में)~* _1500 धनुष।_
*(74) विशेष पद~* _मण्डलीक राजा।_
*(75) केवलज्ञान वन का नाम~* _शकटा वन (पुरिमतालपुर)।_
*(76) केवलज्ञान वृक्ष का नाम~* _वट वृक्ष।_
*(77) समवशरण का विस्तार (योजन प्रमाण)~* _12 योजन।_
*(78) समवशरण का विस्तार (कोस प्रमाण)~* _48 कोस।_
*(79) समवशरण में तीर्थंकर भगवान का आसन~* _पद्मासन।_
*(80) समवशरण में रहने वाले सामान्य केवलियों की संख्या~* _20,000 केवली।_
*(81) समवशरण में रहने वाले पूर्व धारी मुनिराजों की संख्या~* _4,750 पूर्व धारी मुनिराज।_
*(82) समवशरण में रहने वाले शिक्षक मुनिराजों की संख्या~* _4,150 शिक्षक मुनिराज।_
*(83) समवशरण में रहने वाले विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _12,750 विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराज।_
*(84) समवशरण में रहने वाले विक्रिया ऋद्धिधारी योगियों की संख्या~* _20,600 विक्रिया ऋद्धिधारी योगी।_
*(85) समवशरण में रहने वाले अवधिज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _9,000 अवधिज्ञानी मुनिराज।_
*(86) समवशरण में रहने वाले वादी मुनिराजों की संख्या~*
_12,750 वादी मुनिराज।_
*(87) समवशरण में स्थित मुनि संघ की कुल संख्या~* _84,000 मुनि संघ_
*(88) मुख्य गणधर का नाम~* _वृषभसेन।_
*(89) सब गणधर की संख्या~* _84_
*(90) गणिनी आर्यिकाओं की संख्या~* _3,50,000 आर्यिकाएं।_
*(91) मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम~* _ब्राह्मी आर्यिका।_
*(92) मुख्य श्रोता का नाम~* _राजा भरत।_
*(93) श्रावकों की संख्या~* _श्रावक 3 लाख।_
*(94) श्राविकाओं की संख्या~* _श्राविकाएं 5 लाख।_
*(95) तीर्थंकरों का निर्वाण अंतर~* _50 लाख कोटि सागर।_
*(96) आयु के अंत में योग निरोध या विहार कब बंद किया था~* _14 दिन पहले।_
*(97) निर्वाण की तिथि~* _माघ कृष्ण 14_
*(98) निर्वाण का समय (हरिवंश पुराण अध्याय 60 से)~* _पूर्वाह्न काल।_
*(99) निर्वाण का नक्षत्र~* _उत्तराषाढ़ नक्षत्र।_
*(100) निर्वाण भूमि~* _कैलाश पर्वत।_
*(101) निर्वाण क्षेत्र का विशिष्ट स्थान (चूलिका)~* _कैलाश पर्वत की चूलिका।_
*(102) किस आसन से मोक्ष गए~* _पद्मासन।_
*(103) सौधर्म स्वर्ग से लेकर ऊर्ध्व ग्रैवेयक तक जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _3,100 मुनिराज।_
*(104) अनुत्तर विमान में जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _20,000 मुनिराज।_
*(105) तीर्थंकर के साथ सिद्ध होने वाले मुनिराजों की संख्या~* _10,000 मुनिराज।_
*(106) अनुबद्ध केवलियों की संख्या प्रथम मत के अनुसार~* _84 अनुबद्ध केवली।_
*(107) अनुबद्ध केवलियों की संख्या द्वितीय मत के अनुसार~* _100 अनुबद्ध केवली।_
*(108) धर्म का विच्छेद काल~* _आदिनाथ भगवान के समय धर्मतीर्थ का विच्छेद नही हुआ।_
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गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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? wandami mataji ? |
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गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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2026-04-10 07:43:14 |
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40449677 |
तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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2026-04-10 07:43:14 |
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50889696 |
श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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<a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a>
विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। |
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2026-04-10 07:43:10 |
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श्री सर्वतोभद्र नवग्रह तीर्थ प्रतिष्ठान क्षेत्र आर्यिका श्री चंद्रामती माताजी मंगसुळी |
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विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। |
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2026-04-10 07:43:09 |
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