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69840 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती..इसलिए हिम्मत से हारना पर हिम्मत मत हारना..* ✨ *ऊॅ हूं कल्पतरू प्रसन्न सागराय नमः*✨ ? *ANTARMANA VAANI* ? <a href="https://linktr.ee/Antarmanavaani" target="_blank">https://linktr.ee/Antarmanavaani</a> `•हर मास १ उपवास•` 2026-04-06 19:08:37
69839 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती..इसलिए हिम्मत से हारना पर हिम्मत मत हारना..* ✨ *ऊॅ हूं कल्पतरू प्रसन्न सागराय नमः*✨ ? *ANTARMANA VAANI* ? <a href="https://linktr.ee/Antarmanavaani" target="_blank">https://linktr.ee/Antarmanavaani</a> `•हर मास १ उपवास•` 2026-04-06 19:08:36
69837 40449702 Mahaveer Ki Pathshala Main 2026-04-06 19:05:06
69838 40449702 Mahaveer Ki Pathshala Main 2026-04-06 19:05:06
69835 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.instagram.com/reel/DWxysArE-mz/?igsh=MWlvbnh3ZnAwdjl3bQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DWxysArE-mz/?igsh=MWlvbnh3ZnAwdjl3bQ==</a> Follow Like Share with your friends and family ??? 2026-04-06 19:04:07
69836 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.instagram.com/reel/DWxysArE-mz/?igsh=MWlvbnh3ZnAwdjl3bQ==" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DWxysArE-mz/?igsh=MWlvbnh3ZnAwdjl3bQ==</a> Follow Like Share with your friends and family ??? 2026-04-06 19:04:07
69833 40449702 Mahaveer Ki Pathshala Main 2026-04-06 19:02:53
69834 40449702 Mahaveer Ki Pathshala Main 2026-04-06 19:02:53
69832 40449749 जिनोदय?JINODAYA *ज्ञान का पतन और अज्ञान का उत्थान — वर्तमान समाज का कटु यथार्थ* महिमा घटते ज्ञान की, बढ़ते मूढ़ अजान। पूजत भूत पिशाच सब, पंडित बैठ मसान।। यह दोहा आज के समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जिसे हम रोज देखते तो हैं, लेकिन स्वीकार करने से बचते हैं। एक समय था जब ज्ञान, विवेक और सत्य को सर्वोपरि माना जाता था। विद्वानों का सम्मान उनके आचरण, त्याग और सच्चे ज्ञान के कारण होता था। परंतु आज स्थिति बिल्कुल उलटती दिखाई दे रही है। ज्ञान की महिमा दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है और अज्ञान, अंधविश्वास तथा दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। आज मूर्खता को भीड़ का समर्थन मिल रहा है और सच्चा ज्ञानी उपेक्षित होकर किनारे बैठा है। समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो सत्य और तर्क की बजाय चमत्कार, ढोंग और भ्रम में विश्वास करने लगे हैं। भूत-प्रेत, पिशाच और काल्पनिक शक्तियों की पूजा करने वाले लोग बढ़ रहे हैं, जबकि सच्चा ज्ञान देने वाले पंडित, आचार्य और विद्वान उपेक्षा का शिकार होकर जैसे श्मशान में बैठे प्रतीत होते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज और जीवन के हर क्षेत्र में फैल चुकी है। आज लोग दिखावे और बाहरी आडंबर में इतने उलझ चुके हैं कि उन्हें सच्चाई और असल ज्ञान में कोई रुचि ही नहीं रही। जो व्यक्ति जितना अधिक भ्रम फैलाता है, उतना ही अधिक लोकप्रिय हो जाता है, और जो सच्चाई बोलता है, उसे विरोध और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि समाज धीरे-धीरे अपनी मूल जड़ों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं समझा गया तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है, जहाँ ज्ञान पूरी तरह हाशिये पर चला जाएगा और अज्ञान ही समाज का मार्गदर्शक बन जाएगा। आवश्यकता है कि हम स्वयं जागरूक बनें, सच्चे ज्ञान की पहचान करें और अंधविश्वास तथा ढोंग से दूर रहें। तभी हम एक सशक्त, जागरूक और संतुलित समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ ज्ञान को उसका वास्तविक सम्मान मिल सके। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-06 19:02:28
69831 40449749 जिनोदय?JINODAYA *ज्ञान का पतन और अज्ञान का उत्थान — वर्तमान समाज का कटु यथार्थ* महिमा घटते ज्ञान की, बढ़ते मूढ़ अजान। पूजत भूत पिशाच सब, पंडित बैठ मसान।। यह दोहा आज के समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जिसे हम रोज देखते तो हैं, लेकिन स्वीकार करने से बचते हैं। एक समय था जब ज्ञान, विवेक और सत्य को सर्वोपरि माना जाता था। विद्वानों का सम्मान उनके आचरण, त्याग और सच्चे ज्ञान के कारण होता था। परंतु आज स्थिति बिल्कुल उलटती दिखाई दे रही है। ज्ञान की महिमा दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है और अज्ञान, अंधविश्वास तथा दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। आज मूर्खता को भीड़ का समर्थन मिल रहा है और सच्चा ज्ञानी उपेक्षित होकर किनारे बैठा है। समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो सत्य और तर्क की बजाय चमत्कार, ढोंग और भ्रम में विश्वास करने लगे हैं। भूत-प्रेत, पिशाच और काल्पनिक शक्तियों की पूजा करने वाले लोग बढ़ रहे हैं, जबकि सच्चा ज्ञान देने वाले पंडित, आचार्य और विद्वान उपेक्षा का शिकार होकर जैसे श्मशान में बैठे प्रतीत होते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज और जीवन के हर क्षेत्र में फैल चुकी है। आज लोग दिखावे और बाहरी आडंबर में इतने उलझ चुके हैं कि उन्हें सच्चाई और असल ज्ञान में कोई रुचि ही नहीं रही। जो व्यक्ति जितना अधिक भ्रम फैलाता है, उतना ही अधिक लोकप्रिय हो जाता है, और जो सच्चाई बोलता है, उसे विरोध और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि समाज धीरे-धीरे अपनी मूल जड़ों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं समझा गया तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है, जहाँ ज्ञान पूरी तरह हाशिये पर चला जाएगा और अज्ञान ही समाज का मार्गदर्शक बन जाएगा। आवश्यकता है कि हम स्वयं जागरूक बनें, सच्चे ज्ञान की पहचान करें और अंधविश्वास तथा ढोंग से दूर रहें। तभी हम एक सशक्त, जागरूक और संतुलित समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ ज्ञान को उसका वास्तविक सम्मान मिल सके। नितिन जैन संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-06 19:02:27