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227755 42709912 विद्या के कुन्थु (Vidya ke Kunthu) <a href="https://youtube.com/shorts/pBNOK6rl8CE?si=-wwn2ZedBwIBUTQ2" target="_blank">https://youtube.com/shorts/pBNOK6rl8CE?si=-wwn2ZedBwIBUTQ2</a> 2026-06-13 18:40:04
227754 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी तिजारा के बाईपास स्थित पार्श्व पद्मावती दिव्य जैन मंदिर पर स्थित मां दोग्घी गिर गाय गौशाला में शुद्धता और पारंपरिक विधि के साथ गिर गायों के दूध से निकले मक्खन से शुद्ध देसी घी तैयार किया जाता है। इस शुद्ध देसी घी के उपयोग से शरीर निरोग होता है*। अपना ऑर्डर बुक करवाए संपर्क करें .........? ?मां दोग्घी गिर गौशाला ? *पार्श्व पद्मावती दिव्य #जैनमंदिर, तिजारा* संपर्क करें = ?9166686975?7619077777? 2026-06-13 18:38:04
227753 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी तिजारा के बाईपास स्थित पार्श्व पद्मावती दिव्य जैन मंदिर पर स्थित मां दोग्घी गिर गाय गौशाला में शुद्धता और पारंपरिक विधि के साथ गिर गायों के दूध से निकले मक्खन से शुद्ध देसी घी तैयार किया जाता है। इस शुद्ध देसी घी के उपयोग से शरीर निरोग होता है*। अपना ऑर्डर बुक करवाए संपर्क करें .........? ?मां दोग्घी गिर गौशाला ? *पार्श्व पद्मावती दिव्य #जैनमंदिर, तिजारा* संपर्क करें = ?9166686975?7619077777? 2026-06-13 18:38:03
227751 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है हिन्दू धर्म में पुराणों में वर्णित ८४००००० योनियों के बारे में आपने कभी ना कभी अवश्य सुना होगा। हम जिस मनुष्य योनि में जी रहे हैं वो भी उन चौरासी लाख योनियों में से एक है। अब समस्या ये है कि कई लोग ये नहीं समझ पाते कि वास्तव में इन योनियों का अर्थ क्या है? ये देख कर और भी दुःख होता है कि आज की पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी इस बात पर व्यंग करती और हँसती है कि इतनी सारी योनियाँ कैसे हो सकती है। कदाचित अपने सीमित ज्ञान के कारण वे इसे ठीक से समझ नहीं पाते। गरुड़ पुराण में योनियों का विस्तार से वर्णन दिया गया है... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707239?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707239?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:38
227752 40449668 आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है हिन्दू धर्म में पुराणों में वर्णित ८४००००० योनियों के बारे में आपने कभी ना कभी अवश्य सुना होगा। हम जिस मनुष्य योनि में जी रहे हैं वो भी उन चौरासी लाख योनियों में से एक है। अब समस्या ये है कि कई लोग ये नहीं समझ पाते कि वास्तव में इन योनियों का अर्थ क्या है? ये देख कर और भी दुःख होता है कि आज की पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी इस बात पर व्यंग करती और हँसती है कि इतनी सारी योनियाँ कैसे हो सकती है। कदाचित अपने सीमित ज्ञान के कारण वे इसे ठीक से समझ नहीं पाते। गरुड़ पुराण में योनियों का विस्तार से वर्णन दिया गया है... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707239?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707239?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:38
227747 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त जेठ का महीना था,सूरज मानो आग बरसा रहा था ,धरती तप रही थी, पेड़ों की छाया भी गर्म लग रही थी लोग दोपहर में घरों से निकलने से बच रहे थे, ऐसे कठिन समय में भी आर्यिका संघ , अपने नियम और संयम के अनुसार विहार कर रही थीं,, नंगे पाँव तपती सड़क पर चलते हुए उनके चरणों में गर्मी का प्रभाव दिखाई देता था, लेकिन उनके चेहरे पर अद्भुत शांति थी, साथ चल रहे श्रद्धालु बार-बार निवेदन करते, "माताजी, धूप बहुत तेज है, थोड़ी देर विश्राम कर लीजिए" माताजी मुस्कराकर बोलीं, "शरीर को कष्ट हो सकता है, लेकिन आत्मा का मार्ग क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:13
227748 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी जेठ का महीना था,सूरज मानो आग बरसा रहा था ,धरती तप रही थी, पेड़ों की छाया भी गर्म लग रही थी लोग दोपहर में घरों से निकलने से बच रहे थे, ऐसे कठिन समय में भी आर्यिका संघ , अपने नियम और संयम के अनुसार विहार कर रही थीं,, नंगे पाँव तपती सड़क पर चलते हुए उनके चरणों में गर्मी का प्रभाव दिखाई देता था, लेकिन उनके चेहरे पर अद्भुत शांति थी, साथ चल रहे श्रद्धालु बार-बार निवेदन करते, "माताजी, धूप बहुत तेज है, थोड़ी देर विश्राम कर लीजिए" माताजी मुस्कराकर बोलीं, "शरीर को कष्ट हो सकता है, लेकिन आत्मा का मार्ग क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:13
227749 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त जेठ का महीना था,सूरज मानो आग बरसा रहा था ,धरती तप रही थी, पेड़ों की छाया भी गर्म लग रही थी लोग दोपहर में घरों से निकलने से बच रहे थे, ऐसे कठिन समय में भी आर्यिका संघ , अपने नियम और संयम के अनुसार विहार कर रही थीं,, नंगे पाँव तपती सड़क पर चलते हुए उनके चरणों में गर्मी का प्रभाव दिखाई देता था, लेकिन उनके चेहरे पर अद्भुत शांति थी, साथ चल रहे श्रद्धालु बार-बार निवेदन करते, "माताजी, धूप बहुत तेज है, थोड़ी देर विश्राम कर लीजिए" माताजी मुस्कराकर बोलीं, "शरीर को कष्ट हो सकता है, लेकिन आत्मा का मार्ग क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:13
227750 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी जेठ का महीना था,सूरज मानो आग बरसा रहा था ,धरती तप रही थी, पेड़ों की छाया भी गर्म लग रही थी लोग दोपहर में घरों से निकलने से बच रहे थे, ऐसे कठिन समय में भी आर्यिका संघ , अपने नियम और संयम के अनुसार विहार कर रही थीं,, नंगे पाँव तपती सड़क पर चलते हुए उनके चरणों में गर्मी का प्रभाव दिखाई देता था, लेकिन उनके चेहरे पर अद्भुत शांति थी, साथ चल रहे श्रद्धालु बार-बार निवेदन करते, "माताजी, धूप बहुत तेज है, थोड़ी देर विश्राम कर लीजिए" माताजी मुस्कराकर बोलीं, "शरीर को कष्ट हो सकता है, लेकिन आत्मा का मार्ग क... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188707254?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-06-13 18:32:13
227746 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-13 18:32:04