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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*ये आरएसएस राष्ट्रीय स्वयं सेवक के बड़े पदाधिकारी है मिलिंद परांदे इनका मेसेज जरूर सुनना और मनन करना७० परसेंट हिंदुओ की आबादी वाले देश के भारत के ये महानुभाव क्या कह रहे है सोचने की बात है आग्रह है शेयर फॉरवर्ड करिएगा जी।*
*समर्थक:- विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
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2026-02-18 20:03:05 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-02-18 20:03:03 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-02-18 20:03:01 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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<a href="https://youtube.com/shorts/XT9uqjXZUL0?si=axde8Sck37Ev-m9_" target="_blank">https://youtube.com/shorts/XT9uqjXZUL0?si=axde8Sck37Ev-m9_</a> |
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2026-02-18 20:03:00 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*इतना खुलकर ,इतना कटु सत्य और कौन बोल सकता है जी ❓फिर भी भाईचारे वाले हिंदू, मुस्लिम समझ नहीं पा रहे हैं ।यह आश्चर्य विनाश काल विपरीत बुद्धि का ही निशान हैं जागो अहिंसकों जागो अब तो मत भागो❗*
????? |
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2026-02-18 20:02:59 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*जिस दर पर सर ना झुके*
*वह सच्चा दर नाही*
*जो हर हर दर पर झुके*
*वह सच्चा सर नाही*
*मुनि श्री उत्तमसागरजी महाराजजी* |
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2026-02-18 20:02:58 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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????️?????
*एक कप टी*
*एक कपटी*
*जैन संत समाधिसागर*
*" विद्यासागर दास'*
*हस्तिनापुरजी*
*०५/०२/२०२४*
*जैसे खतरनाक कपटी*
*वैसे समझो एक कप टी*
*पिए बिना ना हो टट्टी*
*डकारें आये अपच की खट्टी*
*धर्म धर्मात्मा से होती कट्टी*
*मोक्ष से हो जाए छुट्टी*
*शृंगारयुक्त दिखे जैसे नकटी*
*वैसे धर्म से जिंदगी कटी*
*गर मेरी बात आपको पटी*
*जिनवाणी ने पढ़ाई यह पट्टी*
*करो अभी छोड़ छुट्टी*
*इसकी चाह में गृहस्थी फटी*
*आत्मा को पिलाओ घुट्टी*
*बहिरात्मा में चेतना क्यों बटी*
*तन तो है जैसे खेत की मिट्टी*
*साहस से छोड़, मत बन हटी*
*पीने से कौन बना शिल्पा शेट्टी*
*जहाॅं चाय की चाह है।*
*वहाॅं मोक्ष की राह नहीं।*
*पहला दूध माय का,*
*दूसरा दूध धाय का*
*तीसरा दूध गाय का*
*चौथा दूध आजकल चाय का*
*पाॅंचवा दूध काय का❓*
*ना पिओ नाय माय का*
*मत पीना कभी काॅपी*
*कैसे बनती सुनकर है*
*खुद खुद से मांगेंगे माफी*
*अशुध्द मत खाओ टाॅपी*
*खुद को लगेगा मैं हूॅं पापी*
*खबर अखबार में क्यों न छापी❓*
*दुनिया चाहती हैं छूटे आपा-धापी*
*जीवन बने ऐसा कहे लोग जापी*
*धर्मात्मा भी और प्रतापी*
*चाय-काॅफी पी मत बनो संतापी*
*ठंडक नहीं मिले ,*
*चाहे नदी डूबो तापी*
*बड़बड़ाते वे जैसे आलापी प्रलापी*
*थकोगे चलेगी जोर से हापी*
*मुंबई रहो सूरत या वापी*
*धार्मिकता कभी नापी❓*
*समझदार को इशारा काफी*
*लिख लो लेकर पेन कापी*
*बाॅंटो करके खूप फोटो काॅपी*
*मत पियो चाय और काॅपी* |
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2026-02-18 20:02:58 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*सत्पात्र मदद पेटी ( गुल्लक Good Luck गुड़ लक)*
*केवल नशा,व्यसन, मिथ्यात्व मुक्त सत्पात्र परिवार को मदद हेतु* |
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2026-02-18 20:02:57 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*गुरू को श्रीफल चढ़ाते है*
*भेंट लेकर लोग मढ़ा़ते हैं।*
*दोनों में अंतर बढ़ाते है।*
*जैसे ब्र क्षुल्लक आर्यिका को त्रिकाल में समाधि होने पर निर्वाण होना बताना सैध्दांतिक दोष है वैसे मुनि को भी वर्तमान और उत्सर्पिणी के आनेवाले मतलब पंचम छठे काल में मोक्ष संभव न होने से निर्वाण कहा नहीं जाता वैसे कभी भी कहीं भी देव शास्त्र गुरूओं को श्रीफल चढ़ाना कहा जाता है न कि भेंट करना। यद्यपि कर्नाटक में मुनि के स्थान निर्वाण भी कहते हैं मतलब समाधि सल्लेखना के बाद का मोक्ष नहीं मुनि होता है।भेंट में स्वीकारा जाता है साथ रखते हैं जैसे शास्त्र, पिच्छिका,कमंडल ।पर श्रीफल स्वीकारते भी नहीं रखते भी नहीं।इसलिए भेंट का उपयोग गलत है वह निर्माल्य होता है। सूटकेस, चैन, कप़ड़े भेट करते हैं गृहस्थ एक दूसरे को तो वह लेते हैं।जैसे रोटी खाना,खाना खाना,जीमना, भोजन करना आहार करने में एक ही समान क्रिया होती है आहार कहते हैं त्यागी व्रती आते हैं। लड़का लड़की देखने जाते हैं विवाह के लिए न कि दर्शन के लिए।मुनिराजजी को देखने मिलने नहीं दर्शन करते हैं ।जब कि दोनों में ऑंखों का ही उपयोग हो रहा है ।देखने में चमड़ी आती है ।दर्शन में काला गोरा चमड़ी गौण गुणों की मुख्यता होती है ।आइएगा शाब्दिक चयन भी जैनागम अनुसार करके कहिए। भूल चूक के लिए क्षमा का लेनदेन शेष रखिएगाजी।*
*विश्व भारतीय संस्कृति बचाओ मंच* |
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2026-02-18 20:02:55 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*जैन समुदाय के २२००० लोगो की हत्या किसने करवाई थीं ?*
इतिहास की एक ऐसी घटना जिसे पढ़ने या सुनने मात्र से रोंगटे खड़े हो जाएंगे,बात 500 साल पुरानी है,मगर हमें कभी पढ़ाया नहीं गया की कहा और कब हमारे जैन समुदाय के २२००० लोगो की हत्या किसने करवाई थीं ? गोवा में राजा कुमुद का साशन था, मगर उसपर पोर्टुगीझो ने हमला करके कब्जा कर लिया, पोर्टुगीझ सेना के साथ बड़ी संख्या में ईसाई धर्म गुरुओ की फ़ौज भी उतार दी गयी थी उस दौरान, मकसद था मात्र हिन्दुस्तानियो का धर्म परिवर्तन करवाना,
जैन समुदाय के २२००० लोगो की हत्या किसने करवाई थीं? यह काले इतिहास की शुरुआत ......
फ्रांसिस जेवियर 6 मई 1542 को ईसाई धर्म का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार के लिए हिंदुस्तान की भूमि पर एक संकल्प के साथ आता है,
फ्रांसिस जेवियर जो क्रूर व्यक्ति था, वो एक संकल्प के साथ हिन्दुस्तान में आया था, आते ही उसने ज्यादा से ज्यादा हिन्दुस्तानियो का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए साम दाम दंड भेद निति का अमल शुरू करा,
पोर्टुगीझ सेना के साथ आऐ सभी ईसाई धर्म गुरुओंको अलग अलग गांव में भेजा जाता है, जो भी हिन्दुस्तानी ईसाई धर्म अंगीकार नहीं करता उसे डराया जाता, नहीं मानता तो दण्डित करा जाता था,
जैन समुदाय पर आया धर्म संकट
उस दौरान गोवामें राजा कुमुद थे, फ्रांसिस जेवियर राजा कुमुद को बुलाता है और गोवा के सभी जैन लोगो को ईसाई धर्म अपना ने कहते है,सोचने के लिए 6 माह का समय दिया जाता है,
अहिंसा परमो धर्म में मानने वालो के सामने बड़ा धर्म संकट आता है, छः महीने तक अनेक तरकीबे आजमाई जाती है सभी जैन धर्मि लोगो को धर्म परिवर्तन करवाने के लिए,
(अगर कोई आपकी कनपट्टी पर छः महीने तक पिस्तौल ताने रहे तो कैसा लगेगा,कैसे जिएंगे ? )
मगर जैन धर्मी लोग अपने धर्म पर अटूट श्रद्धा रखते है, सभी ने एक जुट होकर तय कर दिया की प्राण दे देंगे मगर धर्म परिवर्तन हरगिज नहीं करेंगे,
जैन समुदाय के २२००० लोगो की हत्या हिंदुस्तान का सबसे बड़ा हत्याकांड
तक़रीबन 22000 जैन धर्मि स्त्री-पुरुष-बच्चे-जैन गुरु सभी को फ्रांसिस जेवियर के आदेश पर एक कतार में खड़े रख्खे और पोर्टुगीझ की फ़ौज सभी को क्रूर तरीके से मारने लगी, शुरुआत में डराने के लिए किसी के जबड़े तोड़ते और जीभ को काटते, तो किसी के शरीर के एक एक अंग को काटा जाता था, लोग चीखते रहते और
फ्रांसिस जेवियर ठहाके मारकर हँसता रहा था, फिर भी जैन समुदाय के लोग अपने निर्णय पर अडिग रहे, तब सभी को कतार में खड़े करके तोप के गोलों से भून दिया जाता है, एक भी व्यक्ति नहीं बच पायी, इतनी क्रूर मौत कोई शैतान या राक्षस भी नहीं देता,
फ्रांसिस जेवियर बने सेंट फ्रांसिस जेवियर
22000 जैन समुदाय के लोगो की हत्याओं की खबर Italy Rome के Pope तक जाती है, जो फ्रांसिस जेवियर को "सेंट फ्रांसिस जेवियर" St.Francis Xavier नाम देने के साथ संत जैसी उपाधि से सम्मानित भी करते है,
( आखिर कौन से धर्मग्रंथ में लिखा है निर्दोष लोगो से जोर जबरदस्ती करते हुए किसी भी धर्म का पालन करवाए ? )
सेंट फ्रांसिस जेवियर के अरमान
St.Francis Xavier की ख्वाइश थी की हिंदुस्तान के हर कोने में चर्च और प्रत्येक चर्च में एक स्कूल बनाऐ, जिसके लिए उसे मोटी रकम पॉप के कहने पर पोर्टुगीझ शासन के जरिये मिलि थी ,
सेंट फ्रांसिस जेवियर पोर्टुगीझ राजा के शरण में उसके सैन्य शक्तियो का इस्तेमाल करते हुए हिन्दुस्तान में ईसाई धर्म का फैलावा करता है,जब तक वह ज़िंदा रहा यही कृत्य करता रहा,
उसके बाद हिन्दुस्तान में अनेक चर्च और स्कूल भी बने जिसे नाम दिया जाता था सेंट फ्रांसिस जेवियर्स ( St.Francis Xavier) जो प्रथा आज भी चल रही है,
जैन समुदाय के २२००० लोगो की हत्या किसने करवाई थीं ? यह जानने के बाद सवाल खड़े होने ही है
ऐसी क्रूर व्यक्ति के नाम को हिन्दुस्तान में आज भी क्यों एक विशेष स्थान प्राप्त है ?
जलियावाला बाग़ जहा तक़रीबन 379 लोगो की ब्रिटिशरो ने ह्त्या करी थी उसके बारे में ही क्यों इतिहास में हमें पढ़ाया जाता है क्यों 22000 जैन हत्या के बारे मे इतिहास में पढ़ाया नहीं जाता ?
क्यों हम हिन्दुस्तानी आज भी हमारे बच्चो को ऐसी संस्थान में पढ़ाने उतावले होते है |
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2026-02-18 20:02:54 |
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