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75177 42131354 जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन <a href="https://youtu.be/ShK-yxeVFzA?si=vdXvaRaO6bBoh0F0" target="_blank">https://youtu.be/ShK-yxeVFzA?si=vdXvaRaO6bBoh0F0</a> 2026-04-10 17:39:28
75178 42131354 जिनधर्म प्रभावक प्रकोष्ठ (JAIN INFLUENCER), विश्व जैन संगठन <a href="https://youtu.be/ShK-yxeVFzA?si=vdXvaRaO6bBoh0F0" target="_blank">https://youtu.be/ShK-yxeVFzA?si=vdXvaRaO6bBoh0F0</a> 2026-04-10 17:39:28
75176 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *जानने मात्र से कर्म बन्ध नहीं होता* - आचार्य श्री समयसागर जी - 7/4/26, नागपुर ??? *पूरा प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a> _(देखें 5.55 से 6.44 तक)_ ???? *पर - परिणति को लखकर,* *जड़मति बिलख - हरख कर।* *कर्मों से है बंधता,* *वृथा भव - वन भटकता॥१८॥* - _मुक्तकशतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-10 17:31:43
75175 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *जानने मात्र से कर्म बन्ध नहीं होता* - आचार्य श्री समयसागर जी - 7/4/26, नागपुर ??? *पूरा प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a> _(देखें 5.55 से 6.44 तक)_ ???? *पर - परिणति को लखकर,* *जड़मति बिलख - हरख कर।* *कर्मों से है बंधता,* *वृथा भव - वन भटकता॥१८॥* - _मुक्तकशतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-10 17:31:42
75173 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा *जानने मात्र से कर्म बन्ध नहीं होता* - आचार्य श्री समयसागर जी - 7/4/26, नागपुर ??? *पूरा प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a> _(देखें 5.55 से 6.44 तक)_ ???? *पर - परिणति को लखकर,* *जड़मति बिलख - हरख कर।* *कर्मों से है बंधता,* *वृथा भव - वन भटकता॥१८॥* - _मुक्तकशतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-10 17:31:35
75174 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा *जानने मात्र से कर्म बन्ध नहीं होता* - आचार्य श्री समयसागर जी - 7/4/26, नागपुर ??? *पूरा प्रवचन-* <a href="https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z" target="_blank">https://youtu.be/wVPg2Ko6FZ0?si=uF2sKlytyd3KLN7z</a> _(देखें 5.55 से 6.44 तक)_ ???? *पर - परिणति को लखकर,* *जड़मति बिलख - हरख कर।* *कर्मों से है बंधता,* *वृथा भव - वन भटकता॥१८॥* - _मुक्तकशतक_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ 2026-04-10 17:31:35
75171 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-04-10 17:31:34
75172 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म 2026-04-10 17:31:34
75169 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा _जो कवियों ने ऋषियों ने लिखा है, *सभी मुद्राओं को देखकर के ऐसा लगता है* कि, *मैं अकेले ही प्रसन्न नहीं हूं, सारा जगत ही प्रसन्न है*_ ???? _महाकवि आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज के समाधि दिवस पर उनकी अनुपम कृति जयोदय महाकाव्य पर राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी, पपौरा जी (जिला-टीकमगढ़, म.प्र.) १४-१५ मई २०१८, में राष्ट्रहित चिंतक *आचार्य विद्यासागर जी महाराज* का प्रवचनांश-_ <a href="https://youtu.be/gPcVOCgL_fc?si=m5PyWlfQ1XgZKjo8" target="_blank">https://youtu.be/gPcVOCgL_fc?si=m5PyWlfQ1XgZKjo8</a> _(देखें 3.50 से 6.44 तक)_ *_15 मि. का प्रवचनांश पूरा अवश्य सुनें_* ???????? हम ही सब कुछ हैं यूँ कहता है 'ही' सदा, तुम तो तुच्छ, कुछ नहीं हो ! और, 'भी' का कहना है कि *हम भी हैं* *तुम भी हो* *सब कुछ !* *'ही' देखता है हीन दृष्टि से पर को* *'भी' देखता है समीचीन दृष्टि से सब को* - _मूकमाटी :: पृ १७२,१७३_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ 2026-04-10 17:31:33
75170 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा _जो कवियों ने ऋषियों ने लिखा है, *सभी मुद्राओं को देखकर के ऐसा लगता है* कि, *मैं अकेले ही प्रसन्न नहीं हूं, सारा जगत ही प्रसन्न है*_ ???? _महाकवि आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज के समाधि दिवस पर उनकी अनुपम कृति जयोदय महाकाव्य पर राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी, पपौरा जी (जिला-टीकमगढ़, म.प्र.) १४-१५ मई २०१८, में राष्ट्रहित चिंतक *आचार्य विद्यासागर जी महाराज* का प्रवचनांश-_ <a href="https://youtu.be/gPcVOCgL_fc?si=m5PyWlfQ1XgZKjo8" target="_blank">https://youtu.be/gPcVOCgL_fc?si=m5PyWlfQ1XgZKjo8</a> _(देखें 3.50 से 6.44 तक)_ *_15 मि. का प्रवचनांश पूरा अवश्य सुनें_* ???????? हम ही सब कुछ हैं यूँ कहता है 'ही' सदा, तुम तो तुच्छ, कुछ नहीं हो ! और, 'भी' का कहना है कि *हम भी हैं* *तुम भी हो* *सब कुछ !* *'ही' देखता है हीन दृष्टि से पर को* *'भी' देखता है समीचीन दृष्टि से सब को* - _मूकमाटी :: पृ १७२,१७३_ - _आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज_ 2026-04-10 17:31:33