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225462 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-06-12 21:19:04
225459 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर 2026-06-12 21:15:02
225460 50892187 श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर 2026-06-12 21:15:02
225457 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ ?️ ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ?️ ಆಚಾರ್ಯ ಶ್ರೀ 108 ಕುಲರತ್ನ ಭೂಷಣ ಗುರುದೇವರಿಂದ ದೀಕ್ಷಿತಾರಾದ ಐಲಕ ಶ್ರೀ 105 ಶಾಂತಿಧರ್ಮ ಭೂಷಣ ಮಹಾರಾಜರು ಜೈನ ಸಂಪ್ರದಾಯದ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಮತ್ತು ಪವಿತ್ರವಾದ ✨ ಯಮ ಸಲ್ಲೇಖನ ವ್ರತ ✨ ವನ್ನು ಭಕ್ತಿಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಸ್ವೀಕರಿಸಿರುವರು. ? ಇದು ಆತ್ಮಶುದ್ಧಿ, ವೈರಾಗ್ಯ ಮತ್ತು ಸಮತಾಭಾವದ ಉನ್ನತ ಸಾಧನೆ ಆಗಿದೆ. ? ಕಷಾಯಗಳ ತ್ಯಾಗ ಮತ್ತು ಶಾಂತಚಿತ್ತದಿಂದ ಜೀವನದ ಅಂತ್ಯವನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುವ ಮಹಾವ್ರತ. ? ಭಕ್ತರು, ಶ್ರಾವಕ-ಶ್ರಾವಿಕರು ಧರ್ಮಲಾಭ ಪಡೆದು, ಮಹಾರಾಜರ ಆಶೀರ್ವಾದವನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸಲು ವಿನಂತಿ. #KRBVANI subscriber my YouTube channel <a href="https://youtube.com/shorts/b1YnSEnH2rk?si=Iht2tcaSU0czdExO" target="_blank">https://youtube.com/shorts/b1YnSEnH2rk?si=Iht2tcaSU0czdExO</a> Instagram follow this page <a href="https://www.instagram.com/__krbsp__0737?igsh=bGlhMnEyMW9lNHY0" target="_blank">https://www.instagram.com/__krbsp__0737?igsh=bGlhMnEyMW9lNHY0</a> जय जिनेन्द्र ???✨ 2026-06-12 21:15:00
225458 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ ?️ ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ?️ ಆಚಾರ್ಯ ಶ್ರೀ 108 ಕುಲರತ್ನ ಭೂಷಣ ಗುರುದೇವರಿಂದ ದೀಕ್ಷಿತಾರಾದ ಐಲಕ ಶ್ರೀ 105 ಶಾಂತಿಧರ್ಮ ಭೂಷಣ ಮಹಾರಾಜರು ಜೈನ ಸಂಪ್ರದಾಯದ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಮತ್ತು ಪವಿತ್ರವಾದ ✨ ಯಮ ಸಲ್ಲೇಖನ ವ್ರತ ✨ ವನ್ನು ಭಕ್ತಿಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಸ್ವೀಕರಿಸಿರುವರು. ? ಇದು ಆತ್ಮಶುದ್ಧಿ, ವೈರಾಗ್ಯ ಮತ್ತು ಸಮತಾಭಾವದ ಉನ್ನತ ಸಾಧನೆ ಆಗಿದೆ. ? ಕಷಾಯಗಳ ತ್ಯಾಗ ಮತ್ತು ಶಾಂತಚಿತ್ತದಿಂದ ಜೀವನದ ಅಂತ್ಯವನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುವ ಮಹಾವ್ರತ. ? ಭಕ್ತರು, ಶ್ರಾವಕ-ಶ್ರಾವಿಕರು ಧರ್ಮಲಾಭ ಪಡೆದು, ಮಹಾರಾಜರ ಆಶೀರ್ವಾದವನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸಲು ವಿನಂತಿ. #KRBVANI subscriber my YouTube channel <a href="https://youtube.com/shorts/b1YnSEnH2rk?si=Iht2tcaSU0czdExO" target="_blank">https://youtube.com/shorts/b1YnSEnH2rk?si=Iht2tcaSU0czdExO</a> Instagram follow this page <a href="https://www.instagram.com/__krbsp__0737?igsh=bGlhMnEyMW9lNHY0" target="_blank">https://www.instagram.com/__krbsp__0737?igsh=bGlhMnEyMW9lNHY0</a> जय जिनेन्द्र ???✨ 2026-06-12 21:15:00
225455 52947869 +120363211547228892 <a href="https://youtube.com/shorts/FlkIvWAEQPs?si=HeaqR7jzrVn3dCUU" target="_blank">https://youtube.com/shorts/FlkIvWAEQPs?si=HeaqR7jzrVn3dCUU</a> 2026-06-12 21:12:11
225456 52947869 +120363211547228892 <a href="https://youtube.com/shorts/FlkIvWAEQPs?si=HeaqR7jzrVn3dCUU" target="_blank">https://youtube.com/shorts/FlkIvWAEQPs?si=HeaqR7jzrVn3dCUU</a> 2026-06-12 21:12:11
225453 40449695 www yug marble stone work.Com <a href="https://youtube.com/shorts/TFa20evpRCc?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/shorts/TFa20evpRCc?feature=share</a> 2026-06-12 21:08:31
225454 40449695 www yug marble stone work.Com <a href="https://youtube.com/shorts/TFa20evpRCc?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/shorts/TFa20evpRCc?feature=share</a> 2026-06-12 21:08:31
225452 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी सफेद पट्टी भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर है क्या? आज सोशल मीडिया के इस दौर में व्यूज़ की भूख और वायरल होने की सनक ने एक नई जमात को जन्म दिया है—कथित 'इन्फ्लुएंसर्स' की जमात। इस जमात में कुछ लोग यकीनन काबिल-ए-तारीफ काम कर रहे हैं, लेकिन एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जिसका समाज, सच, या सांप्रदायिक सौहार्द से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। उनका एकमात्र धर्म, ईमान और मकसद सिर्फ एक है, किसी भी तरह विवाद खड़ा करना और वायरल हो जाना। मुंबई के घाटकोपर की एक सोसायटी में हाल ही में जो हुआ, वह इसी बीमार मानसिकता का जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण है। जैन मुनियों के आगमन के लिए सोसायटी के परिसर में एक साधारण सी सफेद पट्टी बनाई गई थी। इसके पीछे की वजह पूरी तरह मानवीय और वैज्ञानिक थी ताकि चिलचिलाती धूप में ज़मीन कम तपे, बरसात के मौसम में नंगे पैर चलने वाले साधु-संतों का पैर न फिसले, उन्हें कंकड़-पत्थर न चुभें और रास्ते के सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके। लेकिन अफ़सोस! रील के भूखे कुछ गिद्धों ने इस सामान्य, मानवीय और सेवा भाव से किए गए कार्य को धर्म और क्षेत्रवाद का रंग दे दिया। मैं सीधा और तीखा सवाल पूछता हूँ, क्या उस सफेद पट्टी से किसी का रत्ती भर भी नुकसान हुआ? क्या किसी को उस पर चलने से रोका गया? क्या किसी की ज़मीन हड़प ली गई? क्या सोसायटी के अन्य निवासियों को उससे कोई तकलीफ थी? अगर इन सभी सवालों का जवाब "नहीं" है, तो फिर यह ज़हरीला विवाद किस बात का? भारत वो देश है जहाँ सदियों से राहगीरों के लिए प्याऊ लगाना, मंदिरों के बाहर छांव की व्यवस्था करना, गुरुद्वारों में बिना भेदभाव के चौबीसों घंटे लंगर चलाना और छतों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना हमारी रगों में बसा है। यह हमारी साझी संस्कृति है। जैन मुनि तो वो हैं जो किसी जीव को तकलीफ न पहुंचे, इसके लिए अपना पूरा जीवन नंगे पैर चलकर और अहिंसा के मार्ग पर बिता देते हैं। अगर किसी श्रद्धालु ने उनके पैरों की सहूलियत के लिए एक चूने या पेंट की पट्टी बना दी, तो इसमें पहाड़ टूट पड़ने जैसी क्या बात थी? अगर आज हम इस सफेद पट्टी पर विवाद स्वीकार कर लेते हैं, तो कल ये लोग पूछेंगे कि पक्षियों के लिए पानी क्यों रखा? परसों सवाल उठाएंगे कि गरीबों को मुफ्त भोजन क्यों कराया? फिर किसी बीमार की मदद करने पर भी ये धर्म का चश्मा लगा देंगे! अगर समाज के हर अच्छे और सेवा कार्य में हम नफरत और विवाद का कीड़ा ढूंढने लगेंगे, तो एक इंसानी समाज के रूप में हम आगे बढ़ेंगे या आदिम युग में लौट जाएंगे? कड़वा सच तो यह है कि इन नफरत के सौदागरों को बहुत अच्छे से पता है कि प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की बातों से रील्स पर 'लाइक' और 'व्यूज' की बरसात नहीं होती। सुर्खियां बटोरने के लिए विवाद का तड़का लगाना पड़ता है। इसलिए ये लोग तिल का ताड़ बनाते हैं और भाई को भाई से लड़ाने की स्क्रिप्ट लिखते हैं। इन्हें समाज के बिखरने का कोई गम नहीं है, इन्हें बस अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने की खुशी होती है। ये घटनाएं स्क्रीन पर छोटी दिखती हैं, लेकिन समाज के भीतर अविश्वास और दूरी का ऐसा धीमा ज़हर घोलती हैं जिसे मिटाना नामुमकिन हो जाता है। हमें जागना होगा। किसी भी रील या पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देने या उसे शेयर करने से पहले खुद से पूछिए "कहीं मैं किसी की सस्ती लोकप्रियता और टीआरपी का मोहरा तो नहीं बन रहा?" याद रखिए, किसी शीशे या समाज को तोड़ना बेहद आसान है, लेकिन उसके टुकड़ों को जोड़कर पहले जैसा बनाना सबसे मुश्किल काम है। नफरत फैलाने वाले आपको हर मोड़ पर हज़ारों मिल जाएंगे, लेकिन इस देश के ताने-बाने को, इसके प्रेम और सद्भाव को बचाकर रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। साफ़ लफ़्ज़ों में समझ लीजिए, वह सफेद पट्टी कोई भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर नहीं थी, जिसे देखकर छाती पीटी जाए या हंगामा खड़ा किया जाए। वह सिर्फ सेवा, सम्मान और सुविधा के लिए की गई एक अस्थाई व्यवस्था थी। खतरा उस निर्जीव सफेद पट्टी से कभी था ही नहीं; असली खतरा उस बीमार और संकीर्ण सोच से है जो हर पवित्र और मानवीय कार्य में भी नफरत का एजेंडा खोज लेती है। समाज को जोड़ने का जरिया बनिए, उसे तोड़ने का औजार मत बनिए। क्योंकि याद रखिए, ज़हर की एक छोटी सी बूंद भी पूरे घड़े के अमृत जैसे पानी को बर्बाद करने के लिए काफी होती है। 2026-06-12 21:05:13