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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 221291 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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निज मे रहो,,
न पर गहो,,,
न पर में निज,,
खोकर रहो,,
नयन निज, अंतर लखो,
नेमी स्वातम रस चखो,,
निज कषायो को कसो
पाप रूपी पंक को,,
भव भवांतर वंश को,,
और कर्म रूपी कंश को,
पर मे ही मै रम रहा,,
जम रहा पर सम रहा,
जड़?? चेतना के मेल मे
खेल में और मेल
क्षणिक रस रंग रेल मे
चतुर्गति की जेल में,,
महादुख में रूल रहा,,
गया स्वर्णिम काल,,, तो
फिर नेमी" कर द्वय मल रहा
सत्यार्थ और परर्माथ तज
मन को मलिन कर रह रहा,,
?जड़ बुद्धि जड़?
नेमीचंद विद्यार्थी ।।
9313062282 |
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2026-06-11 08:15:32 |
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| 221290 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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निज मे रहो,,
न पर गहो,,,
न पर में निज,,
खोकर रहो,,
नयन निज, अंतर लखो,
नेमी स्वातम रस चखो,,
निज कषायो को कसो
पाप रूपी पंक को,,
भव भवांतर वंश को,,
और कर्म रूपी कंश को,
पर मे ही मै रम रहा,,
जम रहा पर सम रहा,
जड़?? चेतना के मेल मे
खेल में और मेल
क्षणिक रस रंग रेल मे
चतुर्गति की जेल में,,
महादुख में रूल रहा,,
गया स्वर्णिम काल,,, तो
फिर नेमी" कर द्वय मल रहा
सत्यार्थ और परर्माथ तज
मन को मलिन कर रह रहा,,
?जड़ बुद्धि जड़?
नेमीचंद विद्यार्थी ।।
9313062282 |
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2026-06-11 08:15:31 |
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| 221288 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
अलफ़ाज़ के अंदाज से,
अंदाज के प्रभाव से,,
प्रभाव में दुर्भाव के,,
दुर्भाव के प्रभाव से,,
दिल में कसक हो आपके,,
मुझ पापी के पाप से,,,,
दिल आपका यू दुख गया,,
कहे लबज पर रूक गया,,
तो नेमि तुम से कह रहा,,,
न बिन क्षमा के रह रहा,,
धवल ह्रदय से कह रहा,,
कि माफ करना आज तुम
नयन मेरे आज नम,,,
बुद्धि मुझमें बहुत कम,,,
अहं से भरपूर हूँ,,,
इसलिए सभी से दूर हूँ,,
बस क्षमा की चाहना,,,
और न कोई चाहना।।।
कौन रह गया जो,,,,
मैं रह जाऊँगा,,, नेमि
इक रोज़ चार कंधो पर
मैं भी चला जाऊँ गा।।
आप बढे हम छोटे है
हम तो सिक्के खोटे है
जग में कहीं पर चले नहीं
नैतिकता में फले नहीं,,
फूल हुए पर फले नही।
रिक्त रहे कभी भरे नहीं
!!---नेमीचंद विद्यार्थी----!!
9313062282
जिनागम पंथ जयबंत हो |
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2026-06-11 08:15:30 |
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| 221289 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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अलफ़ाज़ के अंदाज से,
अंदाज के प्रभाव से,,
प्रभाव में दुर्भाव के,,
दुर्भाव के प्रभाव से,,
दिल में कसक हो आपके,,
मुझ पापी के पाप से,,,,
दिल आपका यू दुख गया,,
कहे लबज पर रूक गया,,
तो नेमि तुम से कह रहा,,,
न बिन क्षमा के रह रहा,,
धवल ह्रदय से कह रहा,,
कि माफ करना आज तुम
नयन मेरे आज नम,,,
बुद्धि मुझमें बहुत कम,,,
अहं से भरपूर हूँ,,,
इसलिए सभी से दूर हूँ,,
बस क्षमा की चाहना,,,
और न कोई चाहना।।।
कौन रह गया जो,,,,
मैं रह जाऊँगा,,, नेमि
इक रोज़ चार कंधो पर
मैं भी चला जाऊँ गा।।
आप बढे हम छोटे है
हम तो सिक्के खोटे है
जग में कहीं पर चले नहीं
नैतिकता में फले नहीं,,
फूल हुए पर फले नही।
रिक्त रहे कभी भरे नहीं
!!---नेमीचंद विद्यार्थी----!!
9313062282
जिनागम पंथ जयबंत हो |
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2026-06-11 08:15:30 |
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| 221286 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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लेते रहा करो यारों खबर न जाने कब जिंदगी की शाम हो जाए,,
न जाने कब संस्कार संसार अहंकार से सदा के लिए आराम हो जाए,,,
व्यर्थ में पालकर बैठे हुए हैं बहम,,
व्यर्थ में अकड़ कर पाले हुए हैं अहम,,
व्यर्थ में छोटी-छोटी परेशानियों से जाते हैं शहम,,
जब समय अपनी पारीधी का करेगा अतिक्रमण,,
उस समय यमराज भी नहीं करेगा रहम,,,,
इसलिए क्यों डरूं किससे डरूं क्यों कर डरूं जब एक बार मरना ही है तो क्यों डर-डर कर बार-बार मरूं ।
मृत्यु तो सत्य है ।
उस सत्यता की सत्यता के,,
सत्य को क्यों हरूं।
कौन रह गया "नेमी "
इस जहां में जो हम भी रहजाएंगे एक न एक दिन चार कंधों पर हम भी चले जाएंगे जग में रह जाएंगे कुछ,,
रुसवाईयां कुछ अहसास, प्रशंसा और कुछ जग हसांईया कुछ यादें,
तो कुछ रहनुमाईयां।
यही सत्य है,,,
और सत्य की ,,
उच्चतम सत्यता,,
एहसास करो नेमी"
एहसान न करो।
परेशान रहो नेमी परेशान न करो।।
परेशान करना और ,,
परेशानी का बदला लेना परमात्मा का विषय है,
तुम्हारा नहीं इसलिए, परेशानी की इंतहा तक ,,,,,इंतजार करो।।
----पं.-नेमीचंद विद्यार्थी--दिलली
9313062282------ |
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2026-06-11 08:15:28 |
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| 221287 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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लेते रहा करो यारों खबर न जाने कब जिंदगी की शाम हो जाए,,
न जाने कब संस्कार संसार अहंकार से सदा के लिए आराम हो जाए,,,
व्यर्थ में पालकर बैठे हुए हैं बहम,,
व्यर्थ में अकड़ कर पाले हुए हैं अहम,,
व्यर्थ में छोटी-छोटी परेशानियों से जाते हैं शहम,,
जब समय अपनी पारीधी का करेगा अतिक्रमण,,
उस समय यमराज भी नहीं करेगा रहम,,,,
इसलिए क्यों डरूं किससे डरूं क्यों कर डरूं जब एक बार मरना ही है तो क्यों डर-डर कर बार-बार मरूं ।
मृत्यु तो सत्य है ।
उस सत्यता की सत्यता के,,
सत्य को क्यों हरूं।
कौन रह गया "नेमी "
इस जहां में जो हम भी रहजाएंगे एक न एक दिन चार कंधों पर हम भी चले जाएंगे जग में रह जाएंगे कुछ,,
रुसवाईयां कुछ अहसास, प्रशंसा और कुछ जग हसांईया कुछ यादें,
तो कुछ रहनुमाईयां।
यही सत्य है,,,
और सत्य की ,,
उच्चतम सत्यता,,
एहसास करो नेमी"
एहसान न करो।
परेशान रहो नेमी परेशान न करो।।
परेशान करना और ,,
परेशानी का बदला लेना परमात्मा का विषय है,
तुम्हारा नहीं इसलिए, परेशानी की इंतहा तक ,,,,,इंतजार करो।।
----पं.-नेमीचंद विद्यार्थी--दिलली
9313062282------ |
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2026-06-11 08:15:28 |
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| 221284 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Wandami mataji ????ichami mataji ?? jai jinendra didi ?? |
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2026-06-11 08:14:58 |
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| 221285 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Wandami mataji ????ichami mataji ?? jai jinendra didi ?? |
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2026-06-11 08:14:58 |
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| 221282 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Vandami mataji?????? |
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2026-06-11 08:14:53 |
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| 221283 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Vandami mataji?????? |
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2026-06-11 08:14:53 |
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