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Message
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Date |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-02-12 09:28:50 |
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40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Wandami mataji??? |
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2026-02-12 09:28:12 |
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| 323 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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लो अब रोटी का भी कैप्सूल आ गया? |
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2026-02-12 09:26:39 |
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| 322 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*दूसरों के दोषों पर*
*पीएचडी करने से*
*_बेहतर है कि हम खुद_*
*_की मानसिकता पर_*
*_केवल ग्रेजुएशन ही कर लें_*
*“परिस्थिति कितनी भी, विकट क्यों न हो…अपनों को हराने के लिए परायों का सहारा कभी नहीं लेना चाहिए!”*
*जय जिनेंद्र??????*
*आपका हर पल मंगलमय हो???* |
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2026-02-12 09:26:32 |
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| 321 |
40449750 |
107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
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_*याचना तो दूर, संकेत तक नहीं देते :-*_
...................................................................
कुण्डलपुर, (दमोह, मध्यप्रदेश) मई २०१६ का प्रसंग है। एक दिन स्वाध्याय करते-करते आचार्यश्रीजी ने पेंसिल उठाई, उसे देखा और रख दिया। यह दृश्य सामने कुछ दूरी पर आचार्यश्रीजी से चर्चा करने के भाव से प्रतीक्षा कर रहीं दो ब्रह्मचारिणी बहनों ने देखा। उन्हें समझते देर न लगी, उन्होंने तुरंत जाकर संघस्थ मुनिश्रीजी को बताया कि संभवतः गुरुजी कुछ लिखना चाह रहे हैं, पर पेंसिल व्यवस्थित (नोंक) न होने से उन्होंने लिखा नहीं। मुनिश्री ने तत्काल ही पेंसिल लाकर गुरुजी को दे दी। आचार्यश्रीजी ने उन्हें बड़े ही आश्चर्य से देखा कि इन्हें कैसे ज्ञात हुआ ? जब उनकी दृष्टि सामने कुछ दूरी पर प्रतीक्षारत उन बहनों पर गई, तब वह समझ गए और मुस्करा दिए। बाद में उन मुनिश्री ने बताया कि आचार्यश्रीजी कभी भी किसी वस्तु के लिए इशारा भी नहीं करते हैं। संघस्थ ज्येष्ठ साधु प्राय:कर गुरुजी का बाजौटा (चौका) व्यवस्थित कर देते हैं। इसके बावजूद भी कई बार तीन-तीन, चार-चार दिन तक गुरुजी का लेखन कार्य रुका रहता।
उन्होंने बताया एक बार तीन-चार दिन से गुरुजी का लेखन कार्य रुका हुआ देखकर सहजता से किसी ने पूछ लिया, “आचार्यश्रीजी! क्या आपका लेखन कार्य पूर्ण हो गया ?' आचार्यश्रीजी ने न तो ‘हाँ' कहा और न ही 'ना' । उपदेशात्मक शैली में बोले- ‘योग्य उपादान और योग्य निमित्त के मिलने पर कार्य की सिद्धि होती है। निमित्त के अभाव में नैमित्तिक का भी अभाव हो जाता है। प्रत्येक कार्य का कारण होता है। कारण मिलने पर कार्य सिद्ध होता है। बाद में ज्ञात हुआ कि आचार्यश्रीजी के बाजौटे पर पेंसिल नहीं रखी थी। जब पेंसिल साफ़ करके उनके चौके पर रख दी।| तब लेखन कार्य पुनः प्रारंभ हो गया। धन्य है। गुरुवर की धैर्य एवं गंभीरता की पराकाष्ठा। लेखन कार्य रोक दिया, पर आगम की आज्ञा, अचौर्य महाव्रत की भावना रूप अयाचकवृत्ति का पालन पूर्ण निष्ठा से किया |
??? |
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2026-02-12 09:25:47 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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???*जय जिनेन्द्र* ???
*आज का संदेश 12/2/26 गुरुवार*
*जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा यह जानने में है कि आप दूसरों के लिए एक प्रेरणा हैं, जागिए और आज से एक प्रेरणादायक जीवन जीना शुरू कीजिये।*
*प. पू. गणिनी प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न 105 श्री शुभमती माताजी सहसंघ (27 पीछी) मंगलमय आशीर्वाद ?*
*आज ग्यारस का नियम*
*बच्चों को मंदिर लेकर जाए।*
*प्रशन : 2792*
*ऐसे तीर्थंकर का नाम बताओ जिसका चिन्ह हर मांगलिक कार्य मे प्रयोग मे आता है?*
*2791 नंबर प्रशन का उत्तर*
*लवण समुद्र* |
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2026-02-12 09:25:42 |
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40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
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????????
*जय हो पार्श्वनाथ भगवान की जय हो* |
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2026-02-12 09:24:54 |
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40449657 |
?️?SARVARTHASIDDHI ??️ |
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पुण्य उदय को भूल जाना चाहिए |
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2026-02-12 09:24:19 |
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40449676 |
राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ |
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2026-02-12 09:22:10 |
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40449674 |
JAIN MAHILAMANDAL |
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2026-02-12 09:21:56 |
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