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265 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-02-12 08:36:46
264 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-02-12 08:36:45
263 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ 2026-02-12 08:36:43
262 40449732 ? पंच परमेष्ठी जैनसमूह ? *मंगल प्रवचन | निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ | 12 फरवरी 2026 | खनियाधाना* <a href="https://www.youtube.com/live/-uO5EA7jBPk" target="_blank">https://www.youtube.com/live/-uO5EA7jBPk</a> *? धर्मप्रभावना पुण्यार्जक* पंचकल्याणक महोत्सव समिति, खनियांधाना *? वीडियोग्राफी व मीडिया मैनेजमेंट* मित्रा फ़िल्म्स, इंदौर | 9926247717 *? पंचकल्याणक हेल्पलाइन नंबर* 9755543533 | 9752703533 *??पुण्योदय विद्यापथ??* <a href="https://linktr.ee/punyodaya" target="_blank">https://linktr.ee/punyodaya</a> 2026-02-12 08:34:50
260 40449727 GROUP ??दसा नरसिंहपुरा समाज?? *मंगल प्रवचन | निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ | 12 फरवरी 2026 | खनियाधाना* <a href="https://www.youtube.com/live/-uO5EA7jBPk" target="_blank">https://www.youtube.com/live/-uO5EA7jBPk</a> *? धर्मप्रभावना पुण्यार्जक* पंचकल्याणक महोत्सव समिति, खनियांधाना *? वीडियोग्राफी व मीडिया मैनेजमेंट* मित्रा फ़िल्म्स, इंदौर | 9926247717 *? पंचकल्याणक हेल्पलाइन नंबर* 9755543533 | 9752703533 *??पुण्योदय विद्यापथ??* <a href="https://linktr.ee/punyodaya" target="_blank">https://linktr.ee/punyodaya</a> 2026-02-12 08:34:29
261 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी जय जिनेंद्र 2026-02-12 08:34:29
259 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ दिनांक 012.02.2026 की जंगल चर्या के आंनद ? 2026-02-12 08:31:59
258 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ ?? वंदामी माताजी ?? 2026-02-12 08:31:27
257 40449657 ?️?SARVARTHASIDDHI ??️ *_।।करणानुयोग।।_* *!! श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नमः !!* _{श्रीमद्-नेमिचंद्र-आचार्यदेव-प्रणीत}_ *॥श्री गोम्मटसार-जीवकांड॥* मूल प्राकृत गाथा, _आभार : ब्र०पं०रतनचंद मुख्तार_ _(मङ्गलाचरण )_ *सिद्ध सुद्ध पणमिय जिणिदवरणेमिचंदमकलंकं ।* *गुणरयण भूसणुदयं जीवस्स परूवणं वोच्छं ।।* _जन्मों और योनियों के परस्पर सम्बन्ध का कथन_ *उववादे अच्चितं गब्भे मिस्सं तु होबि सम्मुच्छे ।* *सच्चित्तं अच्चित्तं मिस्सं चय होदि जोणी हु ।। ८५।।* *गाथार्थ* - उपपाद जन्म में अचित्तयोनि होती है, गर्भजन्म में मिश्रयोनि होती है और सम्मूर्च्छन जन्म में सचित्त, अचित्त एवं मिश्र तीनों प्रकार की योनियाँ होती हैं ।।८५।। *विशेषार्थ* - सम्मूर्च्छन-गर्भ-उपपाद जन्मों में सचित्तादि योनियों का विभाजन इसप्रकार है- उपपादजन्मवाले देव-नारकियों में सम्पुट शय्या व ऊँट मुखाकार आदि उत्पत्ति-बिल-स्थान विवक्षित जीवोत्पत्ति से पूर्व अचित्त ही हैं, क्योंकि वे योनियाँ अन्य जीवों से अनाश्रित हैं, अथवा इनके उपपादप्रदेशों के पुद्गल अचेतन हैं। उपपादजन्म में सचित्त व मिश्रयोनि नहीं होती । गर्भजन्म में मिश्रयोनि ही होती है, क्योंकि पुरुषशरीर से गलित अचित्त शुक्र का स्त्री के सचित्त शोणित के साथ मिश्रण होने से मिश्रयोनि होती है। केवल अचित्त शुक्र के या केवल सचित्त स्त्रीशोणित के योनिपना सम्भव नहीं है। अथवा माता के उदर में अचेतन वीर्य व रज से चेतन आत्मा का मिश्रण होने से मिश्रयोनि है। सम्मूर्च्छन जन्म में सचित्त, अचित्त और मिश्र तीनों ही प्रकार की योनियाँ होती हैं। एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक सम्मूर्च्छन जन्मवालों में किन्हीं की योनियाँ सचित्त होती हैं, किन्हीं की योनियाँ अचित्त होती हैं और किन्हीं की सचित्त-अचित्त-मिश्र होती हैं। साधारण शरीर वाले निगोदिया सम्मूर्च्छन जीवों के सचित्तयोनि होती है। शेष सम्मूर्च्छनों में किसी के अचित्तयोनि और किसी के मिश्रयोनि होती है।' अन्यत्र (मूलाचार में) भी उपर्युक्त कथन का विषय एक गाथा के द्वारा प्रतिपादित किया गया है। ??????? ? 2026-02-12 08:29:30
256 40449663 ? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? 2026-02-12 08:27:39