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Chat Name
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Sender
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Message
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Status
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Date |
View |
| 223741 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-12 07:40:45 |
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| 223739 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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डेली क्विज
? प्रारंभ तिथि: 2026-06-12 12:00 AM
? समाप्ति तिथि: 2026-06-12 11:59 PM
? पुरस्कार: प्रथम पुरस्कार-शांतिधारा
द्वितीय पुरस्कार-शांतिधारा
तृतीय पुरस्कार-शांतिधारा
गुरुमाँ की कृति आइकन में से कड़वे प्रश्न मीठे उत्तर की पीडीएफ डाऊनलोड करें|
इसी पुस्तक में से आपको प्रश्नों के उत्तर "अ" अक्षर से भरना है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क-9784727100,9602652047
? क्विज़ खेलें: <a href="https://vigyajyoti.com/slink/QZ_645" target="_blank">https://vigyajyoti.com/slink/QZ_645</a>
? ऐप डाउनलोड करें एंड्रॉइड: <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inroys.vigyashree" target="_blank">https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inroys.vigyashree</a> |
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2026-06-12 07:40:40 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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डेली क्विज
? प्रारंभ तिथि: 2026-06-12 12:00 AM
? समाप्ति तिथि: 2026-06-12 11:59 PM
? पुरस्कार: प्रथम पुरस्कार-शांतिधारा
द्वितीय पुरस्कार-शांतिधारा
तृतीय पुरस्कार-शांतिधारा
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क-9784727100,9602652047
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2026-06-12 07:40:40 |
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| 223738 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?????????
⁉️ *बूझो तो जानें*⁉️
?????????
? *सभी इंद्रियां बहुत सयानी*_
? *सबकी अपनी अमिट कहानी*_
? *सबके हमें नाम दर्शाओ*_
? *ज्ञान बढ़ाओ पुण्य कमाओ*_⁉️⁉️
??????
?????????
*प्रेषक, श्रीमति छाया जैन, मंडीदीप*? |
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2026-06-12 07:38:52 |
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| 223737 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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?????????
⁉️ *बूझो तो जानें*⁉️
?????????
? *सभी इंद्रियां बहुत सयानी*_
? *सबकी अपनी अमिट कहानी*_
? *सबके हमें नाम दर्शाओ*_
? *ज्ञान बढ़ाओ पुण्य कमाओ*_⁉️⁉️
??????
?????????
*प्रेषक, श्रीमति छाया जैन, मंडीदीप*? |
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2026-06-12 07:38:51 |
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| 223735 |
40449670 |
SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE |
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*आज शुक्रवार है १००८श्री पुष्पदंत भगवान का दिन है जय बोले पुष्पदन्त भगवान की जय*
*जय -जय विदेही आप जिनवर, पुष्पदंत जिनेश्वरम् |*
*श्री सुविधिनाथ जिनेश जय जय, भंवोदघि तारणम्*.
मैं करुॅ निर्मल भाव पूजन, ज्ञान सूर्यप्रकाशम्
मम आतमा में आ पधारो,हे मेरे परमेश्वरम्||
????????
*ॐ ह्रीं श्री पुष्पदंतजिनेन्द्राय् नमः*
????????????
*दिन की शुरुवात पुष्पदंत भगवन् के दर्शन से,* ????????
पुष्पदंत भगवन् के पावन चरणों में त्रिवार वंदन
नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु। ?❤❤❤❤❤?साध्य की सिद्धि साधन से है, पर साधन साध्य नहीं...?
जो जीव साध्य को प्राप्त करने से पहले साधन को छोड़कर बैठ जाता है, वह बालकवत् है..!!
??????
*श्रमण संघ जयवंत हो, नमोस्तु शासन जयवंत हो, जयवंत हो वीतराग श्रमण संस्कृति.*
??????
*?आपका आज दिन शुक्रवार मंगलमय हो?*
*? जय जिनेन्द्र ?*
?❤❤❤❤❤?
*आप और आपके परिवार के यशस्वी वर्चस्वी स्वस्थ जीवन के लिए बहुत बहुत मंगल शुभकामनाएं*?????????? |
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2026-06-12 07:38:31 |
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| 223736 |
40449670 |
SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE |
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*आज शुक्रवार है १००८श्री पुष्पदंत भगवान का दिन है जय बोले पुष्पदन्त भगवान की जय*
*जय -जय विदेही आप जिनवर, पुष्पदंत जिनेश्वरम् |*
*श्री सुविधिनाथ जिनेश जय जय, भंवोदघि तारणम्*.
मैं करुॅ निर्मल भाव पूजन, ज्ञान सूर्यप्रकाशम्
मम आतमा में आ पधारो,हे मेरे परमेश्वरम्||
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*ॐ ह्रीं श्री पुष्पदंतजिनेन्द्राय् नमः*
????????????
*दिन की शुरुवात पुष्पदंत भगवन् के दर्शन से,* ????????
पुष्पदंत भगवन् के पावन चरणों में त्रिवार वंदन
नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु। ?❤❤❤❤❤?साध्य की सिद्धि साधन से है, पर साधन साध्य नहीं...?
जो जीव साध्य को प्राप्त करने से पहले साधन को छोड़कर बैठ जाता है, वह बालकवत् है..!!
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*श्रमण संघ जयवंत हो, नमोस्तु शासन जयवंत हो, जयवंत हो वीतराग श्रमण संस्कृति.*
??????
*?आपका आज दिन शुक्रवार मंगलमय हो?*
*? जय जिनेन्द्र ?*
?❤❤❤❤❤?
*आप और आपके परिवार के यशस्वी वर्चस्वी स्वस्थ जीवन के लिए बहुत बहुत मंगल शुभकामनाएं*?????????? |
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2026-06-12 07:38:31 |
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| 223733 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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<a href="https://www.facebook.com/share/v/193SUHwvwZ/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/v/193SUHwvwZ/</a> |
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2026-06-12 07:38:07 |
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| 223734 |
40449749 |
जिनोदय?JINODAYA |
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<a href="https://www.facebook.com/share/v/193SUHwvwZ/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/v/193SUHwvwZ/</a> |
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2026-06-12 07:38:07 |
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| 223731 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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### *"प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान, आलोचना क्या है ?"*
### *"जो आत्मा है, वही प्रतिक्रमण है। जो आत्मा है, वही प्रत्याख्यान है। जो आत्मा है, वही आलोचना है"*
" स्वभावसे विभावमें जाना ही अतिक्रमण है "
#### *1. व्यवहार vs निश्चय - दोनों का भेद समझो*
*तस्वीर बिल्कुल साफ बोल रही है*:
*व्यवहार रुप* = _बाह्य क्रिया_
*1. प्रतिक्रमण* = _भूतकाल के दोषों से निवृत्ति_ → _"पिछले पापों के लिए खेद"_
*2. प्रत्याख्यान* = _भविष्य के दोषों का त्याग_ → _"आगे पाप नहीं करूंगा का संकल्प"_
*3. आलोचना* = _वर्तमान के दोषों का त्याग_ → _"अभी जो गलती हो रही है उसे छोड़ना"_
_ये सब शुभ भाव हैं, पाप से बचाते हैं, पुण्य बंध कराते हैं_। _पर अंतिम लक्ष्य नहीं_।
*निश्चय रुप* = _अंतर स्वभाव में लीन होना_
*सार एक लाइन में*: _स्वभाव से उपयोग का बाहर आना ही अतिक्रमण है_।
_और उसी का प्रतिक्रमण = "मैं त्रिकाल ज्ञायक चैतन्य आत्मतत्व हूँ" - उसी में स्थिर हो जाना_।
_मतलब: रटना नहीं, अनुभव करना है_। _तोते की तरह "मिच्छामि दुक्कडं" बोला और मन में राग = खाली पिंजरे का तोता_।
#### *2. अभेद साधना क्या है? - कर्म-चेतना छोड़ो, ज्ञान-चेतना में आओ*
*तस्वीर का सार*:
*जो आत्मा है = वही प्रतिक्रमण है* = _भूतकाल के पापों को देखो ही मत, अपने ज्ञायक स्वभाव को देखो_।
*जो आत्मा है = वही प्रत्याख्यान है* = _भविष्य का संकल्प नहीं, वर्तमान में ज्ञायक में रम जाओ_।
*जो आत्मा है = वही आलोचना है* = _वर्तमान की गलती पकड़ो मत, "मैं ज्ञायक हूँ" भासो_।
_क्यों? क्योंकि कर्म-चेतना = "मैंने पाप किया, मैं पुण्य करूंगा" = पर-सन्मुख_।
_ज्ञान-चेतना = "मैं ज्ञायक हूँ, मैं शुद्ध हूँ" = स्व-सन्मुख_।
_कल पढ़ा न? वस्तु में भूल नहीं, भूल मात्र दृष्टि में है_। _दृष्टि स्व में टिक गई = सच्चा प्रतिक्रमण हो गया_।
#### *3. तोते वाला दृष्टांत - हम कहाँ गलती कर रहे हैं?*
_"बहुत प्रतिक्रमण किए, धर्म क्यों नहीं हुआ?"_
*उत्तर*: _"बिना समझे रटना कार्यकारी नहीं"_।
*शब्दों का अर्थ और अर्थ का भाव भासन हो तब सच्चा प्रतिक्रमण , प्रत्याख्यान और आलोचना होती है _ पारसमणी*
*हम क्या करते हैं?*
_मुंह से बोलते हैं "मैं क्षमा चाहता हूँ"_ → _मन में वही व्यक्ति, वही क्रोध याद_।
_ऊपर से प्रतिक्रमण, अंदर राग के संस्कार_ → _ये मोक्ष मार्ग नहीं, पुण्य मार्ग है_।
*सच्चा प्रतिक्रमण कब?*
_जब "मैंने गाली दी" की जगह "मैं ज्ञायक हूँ" भासे_।
_गलती पर्याय में हुई, मैं तो त्रिकाल शुद्ध हूँ_ → _यही निश्चय आलोचना है_।
### *आज का 1 मिनट का निश्चय प्रयोग*
*रात को सोने से पहले, 3 काल के लिए*:
*1. भूतकाल प्रतिक्रमण*: _आंख बंद → "मैं त्रिकाल ज्ञायक हूँ" → पाप याद मत करो, स्वभाव याद करो_।
*2. वर्तमान आलोचना*: _"अभी उपयोग बाहर गया था" → वापस "मैं दृष्टा हूँ" में ले आओ_।
*3. भविष्य प्रत्याख्यान*: _संकल्प नहीं → निश्चय: "आगे भी मैं ज्ञायक ही रहूंगा, परद्रव्य कर्ता नहीं"_।
_बोला नहीं, भासा_ → _यही शुद्धि के तीन आवश्यक अंग हैं_।
### *सार: 8 दिन की पूरी माला पूरी हुई*
_1. मिथ्यात्व छोड़ो_ → _2. निमित्ताधीन दृष्टि हटाओ_ → _3. क्रमबद्ध_ → _4. अहमेक्को शुद्धों_
_5. वत्थु सहावो धम्मो_ → _6. निज वैभव_ → _7. यथार्थ निर्णय_ → _8. दृष्टि बदलो_ → _9. आज: निश्चय प्रतिक्रमण_
_व्यवहार से शुरू करो, निश्चय पर रुको_। _रटना से शुरू करो, अनुभव पर जमो_।
_आत्मा को कभी मत बेचना - न प्रतिक्रमण के अहंकार के लिए_।
_क्योंकि आत्मा खुद शुद्ध है - उसमें स्थिर हो जाना ही सच्चा प्रायश्चित है_।
_पूर्णता के लक्ष से ही धर्म की शुरुआत होती है_।
*_स्वयंकी ओर देखते हुये स्वयंमें मग्न हुआ वही सच्चा निज-दर्शन हैं_ ?*
*स्वाध्याय परम निर्दोष तप है। आज से प्रतिक्रमण का मतलब बदल दो: "मिच्छामि दुक्कडं" + "अहमेक्को शुद्धों"* ?✨
*सर्वज्ञ शासन जयवंत वर्ते*
*शुद्ध आगम वाणी* |
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2026-06-12 07:37:12 |
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