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71923 40449670 SRI DIGAMBER JN SAMAJ BANGALORE <a href="https://www.facebook.com/share/r/1DYQHoTyCu/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/r/1DYQHoTyCu/</a> 2026-04-09 12:16:45
71924 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-09 12:16:45
71921 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 Shimoga 2026-04-09 12:16:43
71922 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 Shimoga 2026-04-09 12:16:43
71919 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-09 12:16:36
71920 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-09 12:16:36
71916 40449750 107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप # "*वचन गुप्ति संरक्षक*" : ________________________ भाषा समिति पूर्वक ही वचन गुप्ति का पालन होता है। और वचन गुप्ति से अहिंसा महाव्रत का पालन होता है, जिससे आत्मा का संरक्षण हो जाता है। एक बार आचार्यश्रीजी के प्रवचन चल रहे थे, तभी अचानक तेज वर्षा होने लगी। पांडाल पर पानी की बूंदों के गिरने से उसकी आवाज तेज आ रही थी। और माइक होते हुए भी आचार्यश्रीजी की आवाज श्रोताओं तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंच पा रही थी। सो बोलते बोलते आचार्यश्रीजी चुप हो गए। जब बाद में उनसे पूछा- 'आप चुप क्यों हो गए थे?' तब आचार्यश्रीजी बोले-'भइया! आचार्यों ने हमारे लिए भाषा समिति पूर्वक बोलने का आदेश दिया है। आचार्यों ने कहा कि हमेशा संयम का ध्यान रखना। असंयमी के बीच बैठकर असंयम का व्यवहार नहीं करना। जिस समय सहजरूप से बोलना संभव हो, उसी समय बोलना। यदि बोलते समय किसी व्यवधान के कारण बोलने में विशेष शक्ति लगानी पड़े, तो भाषा समिति भंग होने की संभावना रहती है।और भाषा समिति गई, तो वचन गुप्ति भी कैसे पल सकती है? अतः वर्षा की तेज आवाज के कारण मुझे भी बहुत तेज आवाज में बोलना पड़ता, जो ठीक नहीं था। इसलिए चुप रह गया। क्योंकि मौन से गुप्ति आएगी, समिति नहीं।और फिर हम जोर से बोलेंगे, तो भी दोष मुझे ही लगेगा। जोर-जोर से बोलने से कान और मन पर प्रभाव पड़ता है। वचन गुप्ति जितनी पावन होगी, उतनी ही अहिंसा महाव्रत की भी रक्षा होगी। आप बोलें और उसे (सुनने वाले)अर्थ समझ में नहीं आया, तो आपका बोलना भी व्यर्थ चला गया। भो वचन गुप्ति अनुपालक गुरुवर! आप कहते हैं- शब्द पंगु हैं, जवाब न देना ही, लाजवाब है। धन्य है ! जो मोक्षमार्ग रूपी रथ में आरुढ़ होकर संयम रूपी यात्रा पथ पर निर्बाध विचरण कर रहे हैं। ??? <a href="https://www.facebook.com/share/19qyyzMtw2/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/19qyyzMtw2/</a> 2026-04-09 12:16:34
71917 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-09 12:16:34
71918 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 2026-04-09 12:16:34
71915 40449750 107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप # "*वचन गुप्ति संरक्षक*" : ________________________ भाषा समिति पूर्वक ही वचन गुप्ति का पालन होता है। और वचन गुप्ति से अहिंसा महाव्रत का पालन होता है, जिससे आत्मा का संरक्षण हो जाता है। एक बार आचार्यश्रीजी के प्रवचन चल रहे थे, तभी अचानक तेज वर्षा होने लगी। पांडाल पर पानी की बूंदों के गिरने से उसकी आवाज तेज आ रही थी। और माइक होते हुए भी आचार्यश्रीजी की आवाज श्रोताओं तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंच पा रही थी। सो बोलते बोलते आचार्यश्रीजी चुप हो गए। जब बाद में उनसे पूछा- 'आप चुप क्यों हो गए थे?' तब आचार्यश्रीजी बोले-'भइया! आचार्यों ने हमारे लिए भाषा समिति पूर्वक बोलने का आदेश दिया है। आचार्यों ने कहा कि हमेशा संयम का ध्यान रखना। असंयमी के बीच बैठकर असंयम का व्यवहार नहीं करना। जिस समय सहजरूप से बोलना संभव हो, उसी समय बोलना। यदि बोलते समय किसी व्यवधान के कारण बोलने में विशेष शक्ति लगानी पड़े, तो भाषा समिति भंग होने की संभावना रहती है।और भाषा समिति गई, तो वचन गुप्ति भी कैसे पल सकती है? अतः वर्षा की तेज आवाज के कारण मुझे भी बहुत तेज आवाज में बोलना पड़ता, जो ठीक नहीं था। इसलिए चुप रह गया। क्योंकि मौन से गुप्ति आएगी, समिति नहीं।और फिर हम जोर से बोलेंगे, तो भी दोष मुझे ही लगेगा। जोर-जोर से बोलने से कान और मन पर प्रभाव पड़ता है। वचन गुप्ति जितनी पावन होगी, उतनी ही अहिंसा महाव्रत की भी रक्षा होगी। आप बोलें और उसे (सुनने वाले)अर्थ समझ में नहीं आया, तो आपका बोलना भी व्यर्थ चला गया। भो वचन गुप्ति अनुपालक गुरुवर! आप कहते हैं- शब्द पंगु हैं, जवाब न देना ही, लाजवाब है। धन्य है ! जो मोक्षमार्ग रूपी रथ में आरुढ़ होकर संयम रूपी यात्रा पथ पर निर्बाध विचरण कर रहे हैं। ??? <a href="https://www.facebook.com/share/19qyyzMtw2/" target="_blank">https://www.facebook.com/share/19qyyzMtw2/</a> 2026-04-09 12:16:33