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225046 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *?जिज्ञासा समाधान LIVE?* *?पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज?* ? Watch *?LIVE* Now? ? <a href="https://www.youtube.com/live/_QT2_YSCYQg?si=9sG4bQ2J1NYqK7v7" target="_blank">https://www.youtube.com/live/_QT2_YSCYQg?si=9sG4bQ2J1NYqK7v7</a> ? *आपके मन में है जिज्ञासा ? तो भेजिए आपके प्रश्न जिज्ञासा समाधान हेतु* ? *+91 7415707986* पर *Whatsapp* करें या हमारे *वेबसाइट पर विजिट करें* - <a href="https://sudhakalash.in/askjigyasa/" target="_blank">https://sudhakalash.in/askjigyasa/</a> *?Subscribe &amp; Follow?* ? *SSUDHAKALASH | JinDarshan Channel* ? 2026-06-12 17:53:37
225044 52885611 गुणायतन शिखरजी + शांतिधारा *FEEDBACK शांतिधारा गिर गौशाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र में निर्मित* *आयुर्वेदिक मुखवास* *पवित्र मुख*?? *प्रमुख फायदे:* *?मुंह की दुर्गंध, पाचन, गैस, कब्ज,* *?सिर दर्द, आंखों के लिए लाभकारी।* *?खांसी, गले की खराश के लिए लाभकारी।* *?पेट फूलना, सूजन, जलन में* *आराम देता है, उल्टी रोकता है।* *?दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखें।* *?ब्लड सर्कुलेशन, हीमोग्लोबिन बडाए।* *?कैंसर के खतरे को कम करे।* *मात्रा: 16gm/ 40gm* *मूल्य: 40/95/-* *हमसे जुड़े:* *<a href="https://linktr.ee/shantidhara*" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara*</a> *ऑर्डर हेतु संपर्क:-* *हमारी वेबसाइट* *www.shantidhara.in* *6266486223,8770637723* 2026-06-12 17:53:25
225043 52885611 गुणायतन शिखरजी + शांतिधारा *FEEDBACK शांतिधारा गिर गौशाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र में निर्मित* *आयुर्वेदिक मुखवास* *पवित्र मुख*?? *प्रमुख फायदे:* *?मुंह की दुर्गंध, पाचन, गैस, कब्ज,* *?सिर दर्द, आंखों के लिए लाभकारी।* *?खांसी, गले की खराश के लिए लाभकारी।* *?पेट फूलना, सूजन, जलन में* *आराम देता है, उल्टी रोकता है।* *?दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखें।* *?ब्लड सर्कुलेशन, हीमोग्लोबिन बडाए।* *?कैंसर के खतरे को कम करे।* *मात्रा: 16gm/ 40gm* *मूल्य: 40/95/-* *हमसे जुड़े:* *<a href="https://linktr.ee/shantidhara*" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara*</a> *ऑर्डर हेतु संपर्क:-* *हमारी वेबसाइट* *www.shantidhara.in* *6266486223,8770637723* 2026-06-12 17:53:24
225042 40449658 ?शांतिधारा-पुणे? *FEEDBACK शांतिधारा गिर गौशाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र में निर्मित* *आयुर्वेदिक मुखवास* *पवित्र मुख*?? *प्रमुख फायदे:* *?मुंह की दुर्गंध, पाचन, गैस, कब्ज,* *?सिर दर्द, आंखों के लिए लाभकारी।* *?खांसी, गले की खराश के लिए लाभकारी।* *?पेट फूलना, सूजन, जलन में* *आराम देता है, उल्टी रोकता है।* *?दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखें।* *?ब्लड सर्कुलेशन, हीमोग्लोबिन बडाए।* *?कैंसर के खतरे को कम करे।* *मात्रा: 16gm/ 40gm* *मूल्य: 40/95/-* *हमसे जुड़े:* *<a href="https://linktr.ee/shantidhara*" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara*</a> *ऑर्डर हेतु संपर्क:-* *हमारी वेबसाइट* *www.shantidhara.in* *6266486223,8770637723* 2026-06-12 17:52:53
225041 40449658 ?शांतिधारा-पुणे? *FEEDBACK शांतिधारा गिर गौशाला एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र में निर्मित* *आयुर्वेदिक मुखवास* *पवित्र मुख*?? *प्रमुख फायदे:* *?मुंह की दुर्गंध, पाचन, गैस, कब्ज,* *?सिर दर्द, आंखों के लिए लाभकारी।* *?खांसी, गले की खराश के लिए लाभकारी।* *?पेट फूलना, सूजन, जलन में* *आराम देता है, उल्टी रोकता है।* *?दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखें।* *?ब्लड सर्कुलेशन, हीमोग्लोबिन बडाए।* *?कैंसर के खतरे को कम करे।* *मात्रा: 16gm/ 40gm* *मूल्य: 40/95/-* *हमसे जुड़े:* *<a href="https://linktr.ee/shantidhara*" target="_blank">https://linktr.ee/shantidhara*</a> *ऑर्डर हेतु संपर्क:-* *हमारी वेबसाइट* *www.shantidhara.in* *6266486223,8770637723* 2026-06-12 17:52:52
225039 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ನಿಯಮ ಸಾಗರ‌ ಮಹಾರಾಜರ ದರ್ಶನ‌‌ ಮಾಡಿ ಚರ್ಚೆ ಮಾಡಿ ನೋಡಿ 2026-06-12 17:52:13
225040 40449679 ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಜೈನಧರ್ಮ 2 ನಿಯಮ ಸಾಗರ‌ ಮಹಾರಾಜರ ದರ್ಶನ‌‌ ಮಾಡಿ ಚರ್ಚೆ ಮಾಡಿ ನೋಡಿ 2026-06-12 17:52:13
225037 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी *?️‍? आचार्य श्री के अनमोल विचार ?️‍?*। *?️‍??️‍?भेदविज्ञान जैसे गूढ़ विषय पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के बहुत ही सरल शब्दों में अनमोल विचार ???* “ आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं मात्र भेद विज्ञान की आवश्यकता है ।।” इस शरीर का क्या स्वरूप है ? यह जानना ही भेद-विज्ञान है। चतुर्थ गुणस्थान वाला भेदविज्ञान श्रद्धात्मक होता है और सप्तम गुणस्थान वाला भेदविज्ञान अनुभूति परक होता है। जैसे एक स्कूल में है और एक प्रयोगशाला में है। मैं काया में अवश्य हूँ लेकिन काया के बिना भी रह सकता हूँ यह श्रद्धान ही भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान की शुरुआत ही सही जीवन की शुरुआत है, यह केवलज्ञान तक ले जाने वाला है, जो कभी अंत को प्राप्त नहीं होता है। अनेक बार शरीर को पाया पर यह बोध नहीं आया कि मैं कौन हूँ? मैं एक आत्म तत्व हूँ और शरीर से पृथक् हूँ, इस प्रकार का ज्ञान भेदविज्ञान माना जाता है। शरीर की वेदना को पड़ोसी की वेदना समझना सम्यक ज्ञान है, भेदविज्ञान है। भेदविज्ञानियों के पास जाकर सतचित में आनंद की प्राप्ति का प्रयास करो, फिर स्वयं सच्चिदानंद बन जाओगे। भेदविज्ञान का परिणाम है फूल सा मुस्कराना। शरीर अलग है, आत्मा अलग है, इस प्रकार का ज्ञान होना भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान से ध्यान की भूमिका बन जाती है। हम रात-दिन निमित्त को दोष देते रहते हैं, यह सब भेदविज्ञान के अभाव के कारण होता है। भेद-भाव से व्यक्ति राग-द्वेष करता रहता है और भेदविज्ञान प्राप्त कर ले तो राग-द्वेष समाप्त हो जाता है। भेदविज्ञान के बल पर ही धर्म में लीन हुआ जाता है। आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं, मात्र भेदविज्ञान की आवश्यकता है। ?आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?।* *?आपका जीवन मंगलमय हो ?* *?️‍? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है ?️‍?*। <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER</a> 2026-06-12 17:51:50
225038 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी *?️‍? आचार्य श्री के अनमोल विचार ?️‍?*। *?️‍??️‍?भेदविज्ञान जैसे गूढ़ विषय पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के बहुत ही सरल शब्दों में अनमोल विचार ???* “ आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं मात्र भेद विज्ञान की आवश्यकता है ।।” इस शरीर का क्या स्वरूप है ? यह जानना ही भेद-विज्ञान है। चतुर्थ गुणस्थान वाला भेदविज्ञान श्रद्धात्मक होता है और सप्तम गुणस्थान वाला भेदविज्ञान अनुभूति परक होता है। जैसे एक स्कूल में है और एक प्रयोगशाला में है। मैं काया में अवश्य हूँ लेकिन काया के बिना भी रह सकता हूँ यह श्रद्धान ही भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान की शुरुआत ही सही जीवन की शुरुआत है, यह केवलज्ञान तक ले जाने वाला है, जो कभी अंत को प्राप्त नहीं होता है। अनेक बार शरीर को पाया पर यह बोध नहीं आया कि मैं कौन हूँ? मैं एक आत्म तत्व हूँ और शरीर से पृथक् हूँ, इस प्रकार का ज्ञान भेदविज्ञान माना जाता है। शरीर की वेदना को पड़ोसी की वेदना समझना सम्यक ज्ञान है, भेदविज्ञान है। भेदविज्ञानियों के पास जाकर सतचित में आनंद की प्राप्ति का प्रयास करो, फिर स्वयं सच्चिदानंद बन जाओगे। भेदविज्ञान का परिणाम है फूल सा मुस्कराना। शरीर अलग है, आत्मा अलग है, इस प्रकार का ज्ञान होना भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान से ध्यान की भूमिका बन जाती है। हम रात-दिन निमित्त को दोष देते रहते हैं, यह सब भेदविज्ञान के अभाव के कारण होता है। भेद-भाव से व्यक्ति राग-द्वेष करता रहता है और भेदविज्ञान प्राप्त कर ले तो राग-द्वेष समाप्त हो जाता है। भेदविज्ञान के बल पर ही धर्म में लीन हुआ जाता है। आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं, मात्र भेदविज्ञान की आवश्यकता है। ?आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?।* *?आपका जीवन मंगलमय हो ?* *?️‍? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है ?️‍?*। <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER</a> 2026-06-12 17:51:50
225035 40449666 नव आचार्य समय सागर जी भक्त *?️‍? आचार्य श्री के अनमोल विचार ?️‍?*। *?️‍??️‍?भेदविज्ञान जैसे गूढ़ विषय पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के बहुत ही सरल शब्दों में अनमोल विचार ???* “ आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं मात्र भेद विज्ञान की आवश्यकता है ।।” इस शरीर का क्या स्वरूप है ? यह जानना ही भेद-विज्ञान है। चतुर्थ गुणस्थान वाला भेदविज्ञान श्रद्धात्मक होता है और सप्तम गुणस्थान वाला भेदविज्ञान अनुभूति परक होता है। जैसे एक स्कूल में है और एक प्रयोगशाला में है। मैं काया में अवश्य हूँ लेकिन काया के बिना भी रह सकता हूँ यह श्रद्धान ही भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान की शुरुआत ही सही जीवन की शुरुआत है, यह केवलज्ञान तक ले जाने वाला है, जो कभी अंत को प्राप्त नहीं होता है। अनेक बार शरीर को पाया पर यह बोध नहीं आया कि मैं कौन हूँ? मैं एक आत्म तत्व हूँ और शरीर से पृथक् हूँ, इस प्रकार का ज्ञान भेदविज्ञान माना जाता है। शरीर की वेदना को पड़ोसी की वेदना समझना सम्यक ज्ञान है, भेदविज्ञान है। भेदविज्ञानियों के पास जाकर सतचित में आनंद की प्राप्ति का प्रयास करो, फिर स्वयं सच्चिदानंद बन जाओगे। भेदविज्ञान का परिणाम है फूल सा मुस्कराना। शरीर अलग है, आत्मा अलग है, इस प्रकार का ज्ञान होना भेदविज्ञान कहलाता है। भेदविज्ञान से ध्यान की भूमिका बन जाती है। हम रात-दिन निमित्त को दोष देते रहते हैं, यह सब भेदविज्ञान के अभाव के कारण होता है। भेद-भाव से व्यक्ति राग-द्वेष करता रहता है और भेदविज्ञान प्राप्त कर ले तो राग-द्वेष समाप्त हो जाता है। भेदविज्ञान के बल पर ही धर्म में लीन हुआ जाता है। आत्मा में रमण करने के लिए पोथी का ज्ञान आवश्यक नहीं, मात्र भेदविज्ञान की आवश्यकता है। ?आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो ?।* *?आपका जीवन मंगलमय हो ?* *?️‍? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का ऐप है ?️‍?*। <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1188623173?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=N29CX&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=BROADCASTER</a> 2026-06-12 17:51:33