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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 74879 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share</a> |
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2026-04-10 15:02:18 |
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| 74880 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/5Rp8kcVuVxk?feature=share</a> |
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2026-04-10 15:02:18 |
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| 74877 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-10 15:01:42 |
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| 74878 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-04-10 15:01:42 |
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| 74876 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/kOxdt5qVBYU" target="_blank">https://youtu.be/kOxdt5qVBYU</a> |
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2026-04-10 15:01:00 |
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| 74875 |
40449687 |
अध्यात्मयोगी |
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<a href="https://youtu.be/kOxdt5qVBYU" target="_blank">https://youtu.be/kOxdt5qVBYU</a> |
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2026-04-10 15:00:59 |
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| 74873 |
40449692 |
7 धर्म का मर्म |
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*सावधान*
कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे
- णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है,
- प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है
- इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार
- हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं,
- "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है
- अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता
- अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है
- यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे
- अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी
- यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है,
- यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो
- यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं
- सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे
*धर्म का मर्म*
शब्दार्थ
णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन
कार = पुनः पुनः
सही उच्चारण
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आइरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्वसाहूणं
एसो पंच णमोयारो
सव्व पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वेसिं
पढमं होहि मंगलं |
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2026-04-10 14:55:41 |
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| 74874 |
40449692 |
7 धर्म का मर्म |
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*सावधान*
कल विश्व नवकार दिवस मनाया गया, विश्व में जैन धर्म को प्रसिद्ध करने के लिए यह उपक्रम सराहनीय है परंतु इसमें हमसे *बहुत गंभीर भूल हो रही है* इसे ध्यान से समझे
- णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में बोला जाता है, इसी भाषा में लिखा गया है, इसमें सभी छंद "ण" से प्रारंभ होते है,
- प्राचीन जैन आगमों और ग्रंथों में इसका मूल नाम “णमोकार मंत्र” लिखा है
- इसमें बारंबार "णमो" शब्द का उच्चारण आया है इसलिए इसे णमोकार मंत्र कहते हैं, बारंबार एक ही शब्द दोहराने को "कार" कहते है जैसे जयजयकार हाहाकार
- हमारे श्वेतांबर भाई "न" से णमोकार मंत्र कहते हैं न से भी कहे तो यह मंत्र नमोकार होना चाहिए था नवकार नहीं,
- "णमोकार" प्राकृत शब्द है परंतु प्राकृत भाषा के (अपभ्रंश) विकृत उच्चारण से, अशुद्ध उच्चारण से, या संस्कृत के प्रभाव से नमस्कार शब्द बना है
- अगर संस्कृत भाषा में भी कहे तो इसे नमस्कार मंत्र कहना चाहिए परंतु इसे नवकार क्यों कहा गया? क्यों किया गया? यह समझ नहीं आता
- अतः इसे णमोकार कहना ही उचित है, आगम प्रमाण है, नवकार कहना उचित नहीं है
- यह भाषा की चूक है और इसी गलत परंपरा से हम मूल शब्द और भाषा से दूर होते चले जाएंगे
- अगर हम ही गलत बोलेंगे तो अगली पीढ़ी इसे क्या समझ पाएगी कि यह णमोकार मंत्र है नवकार नहीं, वह तो इसे नवकार ही बोलेगी और इसे नवकार ही समझेगी
- यह विवाद करने के लिए नहीं और ना ही कार्यक्रम को असफल करने के लिए लिखा है,
- यह जानबूझकर आज ही लिखा है ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा ना आए, ना विवाद हो
- यह इसीलिए लिखा है क्योंकि आज तक हुई गलती हम आगे ना दोहराएं और हम भी इसे समझे और सभी को समझाएं
- सही समझ से सकल जैन समाज की एकता और अखंडता बनी रहे
*धर्म का मर्म*
शब्दार्थ
णमो = नमस्कार, प्रणाम, वंदन
कार = पुनः पुनः
सही उच्चारण
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आइरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्वसाहूणं
एसो पंच णमोयारो
सव्व पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वेसिं
पढमं होहि मंगलं |
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2026-04-10 14:55:41 |
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| 74871 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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|
_*आहारचर्या* (पड़गाहन), 10/4/26, नागपुर, वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
_*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर आज के *मंगल प्रवचन*, 10/4/26_
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=tBr_WHkWDYacOj9J" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=tBr_WHkWDYacOj9J</a>
????
ग्रीष्म काल में गिरि पर तपते
वर्षा में तरुतल रहते
शीतकाल आकाश तले रह
व्यतीत करते अघ दहते।
*बहुजन हितकर चरित धारते*
*पुण्य पुंज हैं अभय रहे*
*प्रभावना के हेतुभूत उन*
*महाभाव के निलय रहे॥9॥*
- _आचार्य भक्ति पद्यानुवाद_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-04-10 14:47:54 |
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| 74872 |
48925761 |
आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज.3 |
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_*आहारचर्या* (पड़गाहन), 10/4/26, नागपुर, वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
_*'सावधानी पूर्वक प्रवृत्ति करें'* विषय पर आज के *मंगल प्रवचन*, 10/4/26_
<a href="https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=tBr_WHkWDYacOj9J" target="_blank">https://youtu.be/ei4xfLuulXk?si=tBr_WHkWDYacOj9J</a>
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ग्रीष्म काल में गिरि पर तपते
वर्षा में तरुतल रहते
शीतकाल आकाश तले रह
व्यतीत करते अघ दहते।
*बहुजन हितकर चरित धारते*
*पुण्य पुंज हैं अभय रहे*
*प्रभावना के हेतुभूत उन*
*महाभाव के निलय रहे॥9॥*
- _आचार्य भक्ति पद्यानुवाद_
- _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-04-10 14:47:54 |
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