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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Message
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Status
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Date |
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40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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<a href="https://www.youtube.com/live/Klvjr0A5BAU?si=NX7Y_iygyiwaa_Es" target="_blank">https://www.youtube.com/live/Klvjr0A5BAU?si=NX7Y_iygyiwaa_Es</a> |
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2026-04-11 19:29:08 |
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| 77986 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*जैन समाज : एकता नहीं तो अस्तित्व संकट*
यहूदी समुदाय आज विश्व के हर कोने में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। दुनिया के किसी भी देश में संकट में फंसा यहूदी चाहे अनजान हो, उसकी मदद के लिए पूरा समुदाय तत्पर हो जाता है। यह व्यवस्था उनकी सोच का परिणाम है— *'एक दूसरे का हाथ थामो, तभी टिकोगे।'*
छोटी सी पारसी कौम को देखिए—संख्या में कम होने के बावजूद उनकी एकता और आपसी सहयोग अद्भुत रहा है। सर सोराबजी पोचखानावाला द्वारा स्थापित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नेशनलाइजेशन से पहले के दौर में प्रबंधन, नेटवर्क और कार्यसंस्कृति में पारसियों का वर्चस्व था। यह भी जगजाहिर है कि यदि जज पारसी होता था, तो केस जीतने के लिए पारसी काउंसलर का होना अनिवार्य जैसा समझा जाता था। आज वे शिक्षा, उद्योग, सेवा हर क्षेत्र में आगे हैं। उनकी संख्या नगण्य है, पर प्रभाव अद्भुत।
*और हम जैन?*
हम विश्वशांति के लिए नवकार मंत्र के भव्य आयोजन करते हैं। जीवदया के नाम पर गौशालाएं और कबूतरखाने बनाते हैं। *मंदिरों की भव्यता पर करोड़ों लुटा देते हैं। लेकिन अपने ही*
जैन बच्चे को नौकरी नहीं दे सकते। अपने ही जैन डॉक्टर के अस्पताल में जैन मरीज को छूट नहीं मिलती। अपने ही जैन के व्यापार में जैन को रोजगार नहीं। कहां गई वह भावना? क्यों हमारे यहां 'जैन अपना' होने का कोई अर्थ नहीं रह गया?
हमें व्यापारिक जगत के दो अलग-अलग छोरों से सीखने की जरूरत है। एक तरफ *पटनी कंप्यूटर* का उदाहरण है—एक समय देश की टॉप आईटी कंपनियों में गिनी जाने वाली इस कंपनी के संस्थापक जैन थे, लेकिन उन्होंने अपनी ही कंपनी के महत्वपूर्ण पदों पर *जैन समाज के योग्य लोगों को स्थान नहीं दिया। परिणाम?* वही कंपनी धीरे-धीरे लुप्त हो गई, आज उसका नामोनिशान मिट चुका है।
वहीं दूसरी ओर, *RSBL (रिद्धिसिद्धि बुलियंस)* और *MTC ग्रुप* जैसे सफल उद्योगों ने एक मिसाल कायम की है। इन समूहों की असाधारण प्रगति का एक बड़ा रहस्य यह है कि इन्होंने अपनी संगठनात्मक संरचना में अपनों को प्राथमिकता दी और समाज के योग्य लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर रखा। इन्होंने साबित कर दिखाया कि जब व्यापारिक प्रतिभा को ' *सामुदायिक भरोसे' का साथ मिलता है, तो सफलता के शिखर तक पहुँचना आसान हो जाता है।* यह जैन समाज के लिए सबसे बड़ा सबक है—महत्वपूर्ण पदों पर अपनों को रखना सबके हित में है।
*आज राजनीति हमारे विपरीत चल रही है। हम बिखरे हैं—* कभी संप्रदाय की दीवार, कभी भाषा का भेद, कभी गांव की पुरानी पहचान। और इन दीवारों को मजबूत करने का काम *हमारे कुछ गुरु भगवंतों ने अपने अलग-अलग समुदाय बनाकर पूरा कर दिया* । अब हम टुकड़ों में बंटे हैं, और हर टुकड़ा अपनी ही दुनिया में खोया है।
समय आ गया है— *जैन एकता और वात्सल्य* की कल्पना को साकार करने वाला मंच आगे आए।
*एक ऐसा मंच, जहां हर जैन, चाहे वह श्वेतांबर हो, दिगंबर, स्थानकवासी, तेरापंथी या किसी* भी परंपरा को भूल कर —सिर्फ जैन बन कर एक हों। एक ऐसा संगठन जो जैन बच्चों को शिक्षा में प्राथमिकता दे, जैन युवाओं को रोजगार से जोड़े, जैन उद्यमियों को एक-दूसरे के साथ व्यापार करने को प्रेरित करे। जो यह सुनिश्चित करे कि हर जैन उद्योग, अस्पताल, स्कूल, वित्तीय संस्थान में जैनों को प्राथमिकता मिले—न कि उपेक्षा।
*जैन वात्सल्य की भावना हमारे धर्म का मूल है,* पर यह सिर्फ गाय-कबूतरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए—यह हमारे अपने जैन बच्चों, बुजुर्गों, जरूरतमंदों के लिए भी होनी चाहिए।
अगर आज हम नहीं जागे, तो कल यह बिखराव इतना गहरा हो जाएगा कि भावी पीढ़ियां चाहकर भी नहीं जुड़ पाएंगी। *पटनी कंप्यूटर जैसी विभीषिका* हमारे पूरे समाज पर आ सकती है। एकता के बिना समाज निर्माण असंभव है। *हाथ बढ़ाइए, अपनों को पहचानिए।* तभी हम मजबूत होंगे, तभी हमारा अस्तित्व सुरक्षित होगा।
*जागो जैन समाज, एक बार फिर से एक होने का संकल्प लो।* अपनों को अपनाओ, वरना मिट जाओगे।
✍?NJ ???? |
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2026-04-11 19:28:28 |
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| 77985 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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*जैन समाज : एकता नहीं तो अस्तित्व संकट*
यहूदी समुदाय आज विश्व के हर कोने में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। दुनिया के किसी भी देश में संकट में फंसा यहूदी चाहे अनजान हो, उसकी मदद के लिए पूरा समुदाय तत्पर हो जाता है। यह व्यवस्था उनकी सोच का परिणाम है— *'एक दूसरे का हाथ थामो, तभी टिकोगे।'*
छोटी सी पारसी कौम को देखिए—संख्या में कम होने के बावजूद उनकी एकता और आपसी सहयोग अद्भुत रहा है। सर सोराबजी पोचखानावाला द्वारा स्थापित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नेशनलाइजेशन से पहले के दौर में प्रबंधन, नेटवर्क और कार्यसंस्कृति में पारसियों का वर्चस्व था। यह भी जगजाहिर है कि यदि जज पारसी होता था, तो केस जीतने के लिए पारसी काउंसलर का होना अनिवार्य जैसा समझा जाता था। आज वे शिक्षा, उद्योग, सेवा हर क्षेत्र में आगे हैं। उनकी संख्या नगण्य है, पर प्रभाव अद्भुत।
*और हम जैन?*
हम विश्वशांति के लिए नवकार मंत्र के भव्य आयोजन करते हैं। जीवदया के नाम पर गौशालाएं और कबूतरखाने बनाते हैं। *मंदिरों की भव्यता पर करोड़ों लुटा देते हैं। लेकिन अपने ही*
जैन बच्चे को नौकरी नहीं दे सकते। अपने ही जैन डॉक्टर के अस्पताल में जैन मरीज को छूट नहीं मिलती। अपने ही जैन के व्यापार में जैन को रोजगार नहीं। कहां गई वह भावना? क्यों हमारे यहां 'जैन अपना' होने का कोई अर्थ नहीं रह गया?
हमें व्यापारिक जगत के दो अलग-अलग छोरों से सीखने की जरूरत है। एक तरफ *पटनी कंप्यूटर* का उदाहरण है—एक समय देश की टॉप आईटी कंपनियों में गिनी जाने वाली इस कंपनी के संस्थापक जैन थे, लेकिन उन्होंने अपनी ही कंपनी के महत्वपूर्ण पदों पर *जैन समाज के योग्य लोगों को स्थान नहीं दिया। परिणाम?* वही कंपनी धीरे-धीरे लुप्त हो गई, आज उसका नामोनिशान मिट चुका है।
वहीं दूसरी ओर, *RSBL (रिद्धिसिद्धि बुलियंस)* और *MTC ग्रुप* जैसे सफल उद्योगों ने एक मिसाल कायम की है। इन समूहों की असाधारण प्रगति का एक बड़ा रहस्य यह है कि इन्होंने अपनी संगठनात्मक संरचना में अपनों को प्राथमिकता दी और समाज के योग्य लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर रखा। इन्होंने साबित कर दिखाया कि जब व्यापारिक प्रतिभा को ' *सामुदायिक भरोसे' का साथ मिलता है, तो सफलता के शिखर तक पहुँचना आसान हो जाता है।* यह जैन समाज के लिए सबसे बड़ा सबक है—महत्वपूर्ण पदों पर अपनों को रखना सबके हित में है।
*आज राजनीति हमारे विपरीत चल रही है। हम बिखरे हैं—* कभी संप्रदाय की दीवार, कभी भाषा का भेद, कभी गांव की पुरानी पहचान। और इन दीवारों को मजबूत करने का काम *हमारे कुछ गुरु भगवंतों ने अपने अलग-अलग समुदाय बनाकर पूरा कर दिया* । अब हम टुकड़ों में बंटे हैं, और हर टुकड़ा अपनी ही दुनिया में खोया है।
समय आ गया है— *जैन एकता और वात्सल्य* की कल्पना को साकार करने वाला मंच आगे आए।
*एक ऐसा मंच, जहां हर जैन, चाहे वह श्वेतांबर हो, दिगंबर, स्थानकवासी, तेरापंथी या किसी* भी परंपरा को भूल कर —सिर्फ जैन बन कर एक हों। एक ऐसा संगठन जो जैन बच्चों को शिक्षा में प्राथमिकता दे, जैन युवाओं को रोजगार से जोड़े, जैन उद्यमियों को एक-दूसरे के साथ व्यापार करने को प्रेरित करे। जो यह सुनिश्चित करे कि हर जैन उद्योग, अस्पताल, स्कूल, वित्तीय संस्थान में जैनों को प्राथमिकता मिले—न कि उपेक्षा।
*जैन वात्सल्य की भावना हमारे धर्म का मूल है,* पर यह सिर्फ गाय-कबूतरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए—यह हमारे अपने जैन बच्चों, बुजुर्गों, जरूरतमंदों के लिए भी होनी चाहिए।
अगर आज हम नहीं जागे, तो कल यह बिखराव इतना गहरा हो जाएगा कि भावी पीढ़ियां चाहकर भी नहीं जुड़ पाएंगी। *पटनी कंप्यूटर जैसी विभीषिका* हमारे पूरे समाज पर आ सकती है। एकता के बिना समाज निर्माण असंभव है। *हाथ बढ़ाइए, अपनों को पहचानिए।* तभी हम मजबूत होंगे, तभी हमारा अस्तित्व सुरक्षित होगा।
*जागो जैन समाज, एक बार फिर से एक होने का संकल्प लो।* अपनों को अपनाओ, वरना मिट जाओगे।
✍?NJ ???? |
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2026-04-11 19:28:27 |
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| 77983 |
40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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<a href="https://youtu.be/hB4NPpNQ9ys?si=LmvlaaHLUth8Twu3" target="_blank">https://youtu.be/hB4NPpNQ9ys?si=LmvlaaHLUth8Twu3</a> |
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2026-04-11 19:26:15 |
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| 77984 |
40449659 |
सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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<a href="https://youtu.be/hB4NPpNQ9ys?si=LmvlaaHLUth8Twu3" target="_blank">https://youtu.be/hB4NPpNQ9ys?si=LmvlaaHLUth8Twu3</a> |
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2026-04-11 19:26:15 |
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| 77981 |
40449697 |
हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 |
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*बच्चो की पहली पसंद गुड़वीटा*
*गर्मियों मे शेक बनाकर पीने के लिए बच्चो मे बढ़ती मांग, आर्गेनिक कोको पाउडर, ड्राई फ्रूटस, व अनेक सीड्स से तैयार किया हुआ यह सबकी पसंद बनता जा रहा है, नेहा दीदी जयपुर वालो ने अपने बच्चो के लिए 500 gm -400 Rs के तीन डिब्बे ऑर्डर कर दिए है, यदि आप भी अहिंसक व केमिकल फ्री उत्पाद चाहते है तो शीघ्र सम्पर्क करे, विद्यासागर इंटरप्राइजेज,9893112665*??? |
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2026-04-11 19:23:23 |
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| 77982 |
40449697 |
हथकरघा शांतिधारा पूर्णायु 1 |
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*बच्चो की पहली पसंद गुड़वीटा*
*गर्मियों मे शेक बनाकर पीने के लिए बच्चो मे बढ़ती मांग, आर्गेनिक कोको पाउडर, ड्राई फ्रूटस, व अनेक सीड्स से तैयार किया हुआ यह सबकी पसंद बनता जा रहा है, नेहा दीदी जयपुर वालो ने अपने बच्चो के लिए 500 gm -400 Rs के तीन डिब्बे ऑर्डर कर दिए है, यदि आप भी अहिंसक व केमिकल फ्री उत्पाद चाहते है तो शीघ्र सम्पर्क करे, विद्यासागर इंटरप्राइजेज,9893112665*??? |
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2026-04-11 19:23:23 |
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| 77980 |
40449673 |
वीरसागरजी के भक्त 37 |
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*Bhajan Jamming | Wellness Retreat 2026 (WIT Solapur In Association With HL) 11 अप्रैल 2026 | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
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*<a href="https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*" target="_blank">https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-11 19:19:19 |
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| 77979 |
40449673 |
वीरसागरजी के भक्त 37 |
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*Bhajan Jamming | Wellness Retreat 2026 (WIT Solapur In Association With HL) 11 अप्रैल 2026 | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
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*<a href="https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*" target="_blank">https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-11 19:19:18 |
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| 77978 |
40449672 |
वीरसागर जी के भक्त 34 |
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*Bhajan Jamming | Wellness Retreat 2026 (WIT Solapur In Association With HL) 11 अप्रैल 2026 | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
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*<a href="https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*" target="_blank">https://www.youtube.com/live/KFGZ-UDyN1c*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
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2026-04-11 19:18:28 |
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