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69096 40449749 जिनोदय?JINODAYA *महावीर के नाम पर चलता हुआ पाखंड – जैन साधु या संगठित व्यापार? एक झकझोर देने वाला सच* आज जो लिखा जा रहा है, वह केवल शब्द नहीं हैं—यह एक दर्पण है, जिसमें यदि समाज ईमानदारी से देख ले, तो उसकी आत्मा तक कांप उठे। भगवान महावीर ने जिस जैन धर्म को कठोर तप, निर्विकार त्याग, अहिंसा और पूर्ण अपरिग्रह की चरम सीमा पर स्थापित किया, उसी धर्म के नाम पर आज जो कुछ चल रहा है, वह केवल विचलित करने वाला नहीं, बल्कि शर्मसार करने वाला है। सीधी बात—यह धर्म है या व्यवस्थित व्यापार? यह साधुता है या प्रबंधन तंत्र? भगवान महावीर ने अपने शरीर तक का मोह छोड़ दिया, और आज कुछ तथाकथित साधु अपने चारों ओर ऐसा “सुविधा तंत्र” खड़ा कर चुके हैं कि त्याग शब्द भी उनके सामने दम तोड़ देता है। यह विडंबना नहीं, यह सीधा-सीधा धर्म का अपमान है। अपरिग्रह का मखौल – प्रत्यक्ष नहीं, परोक्ष संग्रह का साम्राज्य आगम कहता है—साधु कुछ भी संग्रह नहीं करेगा। आज हकीकत क्या है? साधु के नाम पर ट्रस्ट, संपत्तियाँ, दान की नदियाँ, चढ़ावे की व्यवस्था—पूरा आर्थिक ढांचा खड़ा है। साधु स्वयं हाथ नहीं लगाता, लेकिन उसके इशारे पर सब कुछ संचालित होता है। यह त्याग नहीं, यह नियमों की आड़ में किया गया सबसे बड़ा छल है। धर्म नहीं, “सेटिंग” का तंत्र – हर आयोजन में फिक्स व्यवस्था अब सबसे खतरनाक और खुला सच— कहीं प्रतिष्ठा हो, चातुर्मास हो, पंचकल्याणक हो या कोई भी धार्मिक कार्यक्रम— टेंट वाले “फिक्स” संगीतकार “फिक्स” कैटरर “फिक्स” डेकोरेटर “फिक्स” स्टेज वाले “फिक्स” लाइट वाले “फिक्स” यहाँ तक कि छोटे-छोटे काम करने वाले भी “फिक्स” समाज के पास विकल्प होते हुए भी, उसे विकल्प नहीं दिए जाते—उसे निर्देश दिए जाते हैं। “यही लोग काम करेंगे…” “यही व्यवस्था होगी…” यह सेवा नहीं—यह नियंत्रण है। यह भक्ति नहीं—यह नेटवर्क है। और जब हर काम “अपने लोगों” से ही करवाया जाएगा, तो सवाल उठता है— क्या यह धार्मिक आयोजन है… या एक संगठित आर्थिक सर्किट? खुले शब्दों में कहें तो— यह स्थिति एक मोटी दलाली के खेल जैसी प्रतीत होती है, जहाँ मंच धर्म का है, लेकिन संचालन कमीशन और सेटिंग के आधार पर हो रहा है। यह आरोप नहीं, यह वह सच्चाई है जिसे समाज बार-बार देख रहा है, लेकिन बोल नहीं पा रहा। भव्यता का पागलपन – त्याग की हत्या करोड़ों के पंडाल, एसी व्यवस्था, चमक-दमक, मीडिया प्रचार— यह सब किसलिए? भगवान महावीर ने तो जंगलों में तप किया, पत्थरों पर सोए, अपमान सहा—और आज उनके नाम पर विलासिता का प्रदर्शन? यह श्रद्धा नहीं, यह दिखावे की होड़ है। नियमों का “तकनीकी पालन” – असल में उल्लंघन आगम कहता है—पैदल विहार। आज—व्यवस्था के नाम पर सब संभव। मोबाइल खुद नहीं रखते, लेकिन उनके आदेश पर पूरी डिजिटल मशीनरी चलती है। साधु स्वयं नहीं छूता, लेकिन सब कुछ उसके लिए होता है। यह त्याग नहीं—यह नियमों के साथ चालाकी है। साधु या सत्ता का केंद्र? राजनीतिज्ञों से नजदीकी, उद्योगपतियों से संबंध, आयोजनों पर नियंत्रण— यह आध्यात्म नहीं, यह प्रभाव का खेल है। जहाँ साधु को मार्गदर्शक होना चाहिए, वहाँ वह “निर्णयकर्ता” और “प्रभावक” बन गया है। संयम या छिपा हुआ भोग? आहार में चयन, विशेष व्यवस्थाएँ, अलग-अलग पसंद— क्या यही वह साधु जीवन है, जहाँ “जो मिले उसमें संतोष” होना चाहिए? दीक्षा और चातुर्मास – आत्मकल्याण या सामाजिक शो? जहाँ आत्मा की मुक्ति का मार्ग होना चाहिए था, वहाँ अब प्रतिष्ठा, संख्या, और प्रचार का खेल चल रहा है। कहाँ चातुर्मास होगा—यह भी कई बार भक्ति से नहीं, बल्कि सुविधा और प्रभाव से तय होता है। संघों के भीतर राजनीति – वैराग्य या वर्चस्व की लड़ाई? एक ही परंपरा के भीतर प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या, गुटबाजी— यह देखकर प्रश्न उठता है—क्या यह साधु जीवन है या कोई संगठनात्मक सत्ता संघर्ष? और सबसे बड़ा अपराध—समाज की चुप्पी गलत को गलत कहने की हिम्मत खत्म हो गई है। सवाल पूछना “अपराध” बन गया है। अंधभक्ति ने विवेक को कुचल दिया है। सच्चाई यह है— अगर समाज जाग जाए, तो यह पूरा ढांचा एक दिन भी नहीं टिकेगा। लेकिन समाज ही अगर आंखें बंद कर ले, तो फिर यह खेल चलता रहेगा। यह भी स्पष्ट है— सभी साधु ऐसे नहीं हैं। आज भी अनेक सच्चे तपस्वी हैं, जो वास्तव में भगवान महावीर के मार्ग पर चल रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों के कारण पूरे धर्म पर प्रश्नचिह्न लग रहा है—और यह सहन करने योग्य नहीं है। अब समय आ गया है—निर्णय का क्या हम सच के साथ खड़े होंगे? या सुविधा के साथ बहते रहेंगे? क्योंकि याद रखिए— धर्म प्रवचनों से नहीं बचेगा, धर्म आयोजनों से नहीं बचेगा, धर्म बचेगा तो केवल सत्य, साहस और शुद्ध आचरण से। और यदि अब भी हम नहीं जागे— तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल एक ही प्रश्न पूछेंगी— “जब धर्म बिक रहा था, तब आप चुप क्यों थे?” *नितिन जैन* संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-06 12:40:15
69095 40449749 जिनोदय?JINODAYA *महावीर के नाम पर चलता हुआ पाखंड – जैन साधु या संगठित व्यापार? एक झकझोर देने वाला सच* आज जो लिखा जा रहा है, वह केवल शब्द नहीं हैं—यह एक दर्पण है, जिसमें यदि समाज ईमानदारी से देख ले, तो उसकी आत्मा तक कांप उठे। भगवान महावीर ने जिस जैन धर्म को कठोर तप, निर्विकार त्याग, अहिंसा और पूर्ण अपरिग्रह की चरम सीमा पर स्थापित किया, उसी धर्म के नाम पर आज जो कुछ चल रहा है, वह केवल विचलित करने वाला नहीं, बल्कि शर्मसार करने वाला है। सीधी बात—यह धर्म है या व्यवस्थित व्यापार? यह साधुता है या प्रबंधन तंत्र? भगवान महावीर ने अपने शरीर तक का मोह छोड़ दिया, और आज कुछ तथाकथित साधु अपने चारों ओर ऐसा “सुविधा तंत्र” खड़ा कर चुके हैं कि त्याग शब्द भी उनके सामने दम तोड़ देता है। यह विडंबना नहीं, यह सीधा-सीधा धर्म का अपमान है। अपरिग्रह का मखौल – प्रत्यक्ष नहीं, परोक्ष संग्रह का साम्राज्य आगम कहता है—साधु कुछ भी संग्रह नहीं करेगा। आज हकीकत क्या है? साधु के नाम पर ट्रस्ट, संपत्तियाँ, दान की नदियाँ, चढ़ावे की व्यवस्था—पूरा आर्थिक ढांचा खड़ा है। साधु स्वयं हाथ नहीं लगाता, लेकिन उसके इशारे पर सब कुछ संचालित होता है। यह त्याग नहीं, यह नियमों की आड़ में किया गया सबसे बड़ा छल है। धर्म नहीं, “सेटिंग” का तंत्र – हर आयोजन में फिक्स व्यवस्था अब सबसे खतरनाक और खुला सच— कहीं प्रतिष्ठा हो, चातुर्मास हो, पंचकल्याणक हो या कोई भी धार्मिक कार्यक्रम— टेंट वाले “फिक्स” संगीतकार “फिक्स” कैटरर “फिक्स” डेकोरेटर “फिक्स” स्टेज वाले “फिक्स” लाइट वाले “फिक्स” यहाँ तक कि छोटे-छोटे काम करने वाले भी “फिक्स” समाज के पास विकल्प होते हुए भी, उसे विकल्प नहीं दिए जाते—उसे निर्देश दिए जाते हैं। “यही लोग काम करेंगे…” “यही व्यवस्था होगी…” यह सेवा नहीं—यह नियंत्रण है। यह भक्ति नहीं—यह नेटवर्क है। और जब हर काम “अपने लोगों” से ही करवाया जाएगा, तो सवाल उठता है— क्या यह धार्मिक आयोजन है… या एक संगठित आर्थिक सर्किट? खुले शब्दों में कहें तो— यह स्थिति एक मोटी दलाली के खेल जैसी प्रतीत होती है, जहाँ मंच धर्म का है, लेकिन संचालन कमीशन और सेटिंग के आधार पर हो रहा है। यह आरोप नहीं, यह वह सच्चाई है जिसे समाज बार-बार देख रहा है, लेकिन बोल नहीं पा रहा। भव्यता का पागलपन – त्याग की हत्या करोड़ों के पंडाल, एसी व्यवस्था, चमक-दमक, मीडिया प्रचार— यह सब किसलिए? भगवान महावीर ने तो जंगलों में तप किया, पत्थरों पर सोए, अपमान सहा—और आज उनके नाम पर विलासिता का प्रदर्शन? यह श्रद्धा नहीं, यह दिखावे की होड़ है। नियमों का “तकनीकी पालन” – असल में उल्लंघन आगम कहता है—पैदल विहार। आज—व्यवस्था के नाम पर सब संभव। मोबाइल खुद नहीं रखते, लेकिन उनके आदेश पर पूरी डिजिटल मशीनरी चलती है। साधु स्वयं नहीं छूता, लेकिन सब कुछ उसके लिए होता है। यह त्याग नहीं—यह नियमों के साथ चालाकी है। साधु या सत्ता का केंद्र? राजनीतिज्ञों से नजदीकी, उद्योगपतियों से संबंध, आयोजनों पर नियंत्रण— यह आध्यात्म नहीं, यह प्रभाव का खेल है। जहाँ साधु को मार्गदर्शक होना चाहिए, वहाँ वह “निर्णयकर्ता” और “प्रभावक” बन गया है। संयम या छिपा हुआ भोग? आहार में चयन, विशेष व्यवस्थाएँ, अलग-अलग पसंद— क्या यही वह साधु जीवन है, जहाँ “जो मिले उसमें संतोष” होना चाहिए? दीक्षा और चातुर्मास – आत्मकल्याण या सामाजिक शो? जहाँ आत्मा की मुक्ति का मार्ग होना चाहिए था, वहाँ अब प्रतिष्ठा, संख्या, और प्रचार का खेल चल रहा है। कहाँ चातुर्मास होगा—यह भी कई बार भक्ति से नहीं, बल्कि सुविधा और प्रभाव से तय होता है। संघों के भीतर राजनीति – वैराग्य या वर्चस्व की लड़ाई? एक ही परंपरा के भीतर प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या, गुटबाजी— यह देखकर प्रश्न उठता है—क्या यह साधु जीवन है या कोई संगठनात्मक सत्ता संघर्ष? और सबसे बड़ा अपराध—समाज की चुप्पी गलत को गलत कहने की हिम्मत खत्म हो गई है। सवाल पूछना “अपराध” बन गया है। अंधभक्ति ने विवेक को कुचल दिया है। सच्चाई यह है— अगर समाज जाग जाए, तो यह पूरा ढांचा एक दिन भी नहीं टिकेगा। लेकिन समाज ही अगर आंखें बंद कर ले, तो फिर यह खेल चलता रहेगा। यह भी स्पष्ट है— सभी साधु ऐसे नहीं हैं। आज भी अनेक सच्चे तपस्वी हैं, जो वास्तव में भगवान महावीर के मार्ग पर चल रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों के कारण पूरे धर्म पर प्रश्नचिह्न लग रहा है—और यह सहन करने योग्य नहीं है। अब समय आ गया है—निर्णय का क्या हम सच के साथ खड़े होंगे? या सुविधा के साथ बहते रहेंगे? क्योंकि याद रखिए— धर्म प्रवचनों से नहीं बचेगा, धर्म आयोजनों से नहीं बचेगा, धर्म बचेगा तो केवल सत्य, साहस और शुद्ध आचरण से। और यदि अब भी हम नहीं जागे— तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल एक ही प्रश्न पूछेंगी— “जब धर्म बिक रहा था, तब आप चुप क्यों थे?” *नितिन जैन* संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल मोबाइल: 9215635871 2026-04-06 12:40:14
69093 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सिद्धचक्र विधान: निःशुल्क सेवा-साधना अभियान* ? *— "जन-जन तक धर्म प्रभावना, घर-घर तक जिन-आराधना" —* दिगंबर जैन धर्म की परम पावन और फलदायी आराधना 'श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान' के प्रति हम सभी की अगाध श्रद्धा है। यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा (सिद्ध) बनाने का एक मंगलकारी मार्ग है। इस दिव्य आराधना की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने और धर्म की प्रभावना हेतु, हम लेकर आए हैं एक विशेष नि:स्वार्थ सेवा संकल्प। ✨ *हमारा संकल्प: सेवा ही साधना* यदि आपकी संस्था, मंदिर या समाज 'सिद्धचक्र विधान' का भव्य आयोजन करना चाहता है, तो अनुष्ठानाचार्य (विद्वान) की सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध रहेंगी। ? *विधान के स्वरूप:* अपनी सुविधानुसार आप निम्न विकल्पों में से चयन कर सकते हैं: अष्टान्हिका (8 दिवसीय): पूर्ण भक्ति और शास्त्रीय विधि विधान। लघु विधान (5 या 3 दिवसीय): अल्प समय में भक्ति का विशेष लाभ। एक दिवसीय विधान: मंत्रोच्चार एवं संक्षिप्त विधि के साथ सानंद संपन्न। ? *अभियान की विशेषताएं:* निःस्वार्थ भाव: विद्वान द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क, दक्षिणा, मानदेय या किसी संस्था हेतु चंदा नहीं लिया जाएगा। विधि विधान: विधान के साथ-साथ तत्वचर्चा, प्रवचन एवं पूजन की पूर्ण शुद्धता का निर्वहन। धर्म प्रभावना: हमारा एकमात्र उद्देश्य जैन धर्म के संस्कारों को जागृत रखना है। ? *आयोजकों हेतु ध्यान रखने योग्य:* आयोजक संस्था/समाज को केवल निम्न व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करनी होंगी: ✅ विद्वान के आने-जाने (आवागमन) की व्यवस्था। ✅ उचित आवास एवं शुद्ध सात्विक भोजन (चौका व्यवस्था)। ✅ विधान सामग्री, मंडल रचना एवं स्थानीय आयोजन की व्यवस्था। ? *विद्वानों से विशेष आह्वान!* जो भी विद्वान/त्यागी वृत्ति इस पावन पुनीत अभियान का हिस्सा बनकर देश के विभिन्न कोनों में धर्म की ज्योत जलाना चाहते हैं, वे सादर आमंत्रित हैं। कृपया अपना विवरण हमारे साथ साझा करें। ? *संपर्क सूत्र:* धर्म और आस्था के इस महायज्ञ से जुड़ने के लिए *आज ही संपर्क करें:* *प्रज्ञा पथगामी, वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ* *अनुष्ठानाचार्य बाल ब्रह्मचारी अरुण गुरु जी 'शुद्धांश* ' ? *मोबाइल: +91-9340950367* "धर्म बढ़े, वात्सल्य बढ़े, बढ़े आत्म-कल्याण।" कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक साझा कर धर्म प्रभावना में सहभागी बनें। 2026-04-06 12:36:13
69094 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ? *सिद्धचक्र विधान: निःशुल्क सेवा-साधना अभियान* ? *— "जन-जन तक धर्म प्रभावना, घर-घर तक जिन-आराधना" —* दिगंबर जैन धर्म की परम पावन और फलदायी आराधना 'श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान' के प्रति हम सभी की अगाध श्रद्धा है। यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा (सिद्ध) बनाने का एक मंगलकारी मार्ग है। इस दिव्य आराधना की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने और धर्म की प्रभावना हेतु, हम लेकर आए हैं एक विशेष नि:स्वार्थ सेवा संकल्प। ✨ *हमारा संकल्प: सेवा ही साधना* यदि आपकी संस्था, मंदिर या समाज 'सिद्धचक्र विधान' का भव्य आयोजन करना चाहता है, तो अनुष्ठानाचार्य (विद्वान) की सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध रहेंगी। ? *विधान के स्वरूप:* अपनी सुविधानुसार आप निम्न विकल्पों में से चयन कर सकते हैं: अष्टान्हिका (8 दिवसीय): पूर्ण भक्ति और शास्त्रीय विधि विधान। लघु विधान (5 या 3 दिवसीय): अल्प समय में भक्ति का विशेष लाभ। एक दिवसीय विधान: मंत्रोच्चार एवं संक्षिप्त विधि के साथ सानंद संपन्न। ? *अभियान की विशेषताएं:* निःस्वार्थ भाव: विद्वान द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क, दक्षिणा, मानदेय या किसी संस्था हेतु चंदा नहीं लिया जाएगा। विधि विधान: विधान के साथ-साथ तत्वचर्चा, प्रवचन एवं पूजन की पूर्ण शुद्धता का निर्वहन। धर्म प्रभावना: हमारा एकमात्र उद्देश्य जैन धर्म के संस्कारों को जागृत रखना है। ? *आयोजकों हेतु ध्यान रखने योग्य:* आयोजक संस्था/समाज को केवल निम्न व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करनी होंगी: ✅ विद्वान के आने-जाने (आवागमन) की व्यवस्था। ✅ उचित आवास एवं शुद्ध सात्विक भोजन (चौका व्यवस्था)। ✅ विधान सामग्री, मंडल रचना एवं स्थानीय आयोजन की व्यवस्था। ? *विद्वानों से विशेष आह्वान!* जो भी विद्वान/त्यागी वृत्ति इस पावन पुनीत अभियान का हिस्सा बनकर देश के विभिन्न कोनों में धर्म की ज्योत जलाना चाहते हैं, वे सादर आमंत्रित हैं। कृपया अपना विवरण हमारे साथ साझा करें। ? *संपर्क सूत्र:* धर्म और आस्था के इस महायज्ञ से जुड़ने के लिए *आज ही संपर्क करें:* *प्रज्ञा पथगामी, वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ* *अनुष्ठानाचार्य बाल ब्रह्मचारी अरुण गुरु जी 'शुद्धांश* ' ? *मोबाइल: +91-9340950367* "धर्म बढ़े, वात्सल्य बढ़े, बढ़े आत्म-कल्याण।" कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक साझा कर धर्म प्रभावना में सहभागी बनें। 2026-04-06 12:36:13
69092 40449739 मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज पुणे भक्त परिवार *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:34:12
69091 40449739 मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज पुणे भक्त परिवार *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:34:11
69089 40449671 1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:32:33
69090 40449671 1.पुणे चातुर्मास वर्षायोग 2023- वीर सागर जी महाराज *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:32:33
69088 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:32:15
69087 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी *आज की आहारचर्या | सोलापुर महाराष्ट्र | 06 अप्रैल 2026 मुनिश्री विशालसागर जी महाराज* ? *<a href="https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/7Lj4VMyozIU*</a> *व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े* ? *<a href="https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/EflVx5hiwPHK8yTVrhVOSn?mode=r_c*</a> 2026-04-06 12:32:14