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40449672 |
वीरसागर जी के भक्त 34 |
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*आज की आहारचर्या | 06 अप्रैल 2026 | सोलापुर | निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज*
?
*<a href="https://youtube.com/shorts/PVK_EGnpgZQ*" target="_blank">https://youtube.com/shorts/PVK_EGnpgZQ*</a>
*? निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़े ?*
*<a href="https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029Vb59FgNA89MgtLOVV90Y*</a> |
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2026-04-06 23:12:42 |
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| 70324 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जन्म लेते ही कर्जदार: 'विकास पुरुष' के राज में हर बच्चा ₹23,000 के नए बोझ के साथ पैदा हो रहा है!
प्रधानमंत्री जी, जब आप मंचों से "मजबूत अर्थव्यवस्था" का ढोल पीटते हैं, तब देश के वित्त मंत्रालय के आंकड़े आपकी दावों की धज्जियां उड़ा रहे होते हैं। 27 मार्च 2026 को जारी सरकारी कैलेंडर ने उस 'अदृश्य पाप' का खुलासा कर दिया है, जिसे यह सरकार आने वाली पीढ़ियों के माथे पर मढ़ रही है।
यहाँ इस 'सुनहरे भारत' की वो कड़वी हकीकत है जो गोदी मीडिया आपको कभी नहीं दिखाएगा:
1. ₹8,20,000 करोड़ का नया कर्ज: किसका विकास?
सरकार ने अगले मात्र 6 महीनों (अप्रैल-सितंबर 2026) के लिए 8.2 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का प्लान जारी किया है।
* जमीनी सच: इसका मतलब है कि आज इस देश में जो बच्चा पैदा हुआ, उसे माँ-बाप का प्यार मिलने से पहले ही सरकार ने ₹23,000 का अतिरिक्त कर्ज थमा दिया।
* भारत का कुल कर्ज अब 214 लाख करोड़ होने जा रहा है। क्या यही है वो 'अमृत काल' जिसका सपना आप दिखा रहे थे?
2. ₹100 की कमाई, ₹34 का ब्याज—कहाँ गया पैसा?
आज भारत की स्थिति उस कर्जदार जैसी है जो केवल पिछला ब्याज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहा है।
* सरकार की कुल कमाई का 34% हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज (Interest) भरने में जा रहा है।
* यह पैसा स्कूलों में नहीं जा रहा, अस्पतालों में नहीं जा रहा, युवाओं के रोजगार में नहीं जा रहा। यह पैसा जा रहा है उन 'गलत आर्थिक नीतियों' के गड्ढों को भरने में जो पिछले 10 सालों में खोदे गए हैं।
3. 'रुपया' मार्गदर्शक मंडल में, और प्रधानमंत्री मौन!
याद करिए 2014 से पहले के वो भाषण, जब आप कहते थे कि "रुपया गिरता है तो देश की साख गिरती है।"
* 1947 में रुपया ₹4 के करीब था, आज ₹95 पार कर रहा है और ₹100 की ओर दौड़ रहा है। * शर्मनाक सच यह है कि युद्ध झेल चुके और तबाह हो चुके अफगानिस्तान की मुद्रा (Afghani) की यूनिट वैल्यू आज भारतीय रुपए से ज्यादा है।
* क्या अब देश की साख नहीं गिर रही? या अब 'साहब' को रुपए की सेहत से कोई सरोकार नहीं है?
4. इंटर-जनरेशनल डकैती: बच्चों का भविष्य दांव पर
अर्थशास्त्री इसे 'डेप्ट ओवरहंग' कहते हैं, लेकिन आम भाषा में यह 'आने वाली पीढ़ी के साथ गद्दारी' है।
* आज की पीढ़ी जो ऐश और प्रोपगैंडा कर रही है, उसका बिल वो बच्चा भरेगा जिसने न इस सरकार को वोट दिया, न इस कर्ज के लिए अपनी सहमति दी।
* जब वो बच्चा बड़ा होकर अपनी पहली कमाई करेगा, तो उसका एक बड़ा हिस्सा आपके द्वारा लिए गए फिजूलखर्च कर्जों का ब्याज चुकाने में चला जाएगा।
सीधे सवाल: अकाउंटेबिलिटी कहाँ है?
एक तरफ आप ₹16,087 करोड़ का गन्ना बकाया नहीं चुका पाते, एक तरफ 8.25% ग्रेजुएट्स को नौकरी नहीं दे पाते, लेकिन दूसरी तरफ 'कैपेक्स' और 'इंफ्रास्ट्रक्चर' के नाम पर लाखों-करोड़ों का कर्ज लेकर देश को 'कर्ज के जाल' (Debt Trap) में धकेल रहे हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध और $120 प्रति बैरल का तेल आपकी इस 'कागजी इकॉनमी' को कभी भी धराशायी कर सकता है।
यह 'विकास' नहीं, बल्कि 'विनाश' की पटकथा है। जनता को तय करना होगा कि उन्हें 'विश्वगुरु' का खोखला नारा चाहिए या अपने बच्चों के सिर से इस कर्ज का बोझ हटाना है।
इस लेख को हर उस नागरिक तक पहुँचाएं जो सोचता है कि 'सब चंगा सी'। हकीकत यह है कि हम सब गले तक कर्ज में डूबे हुए हैं और सरकार इसे 'मास्टरस्ट्रोक' बता रही है। |
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2026-04-06 23:11:52 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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जन्म लेते ही कर्जदार: 'विकास पुरुष' के राज में हर बच्चा ₹23,000 के नए बोझ के साथ पैदा हो रहा है!
प्रधानमंत्री जी, जब आप मंचों से "मजबूत अर्थव्यवस्था" का ढोल पीटते हैं, तब देश के वित्त मंत्रालय के आंकड़े आपकी दावों की धज्जियां उड़ा रहे होते हैं। 27 मार्च 2026 को जारी सरकारी कैलेंडर ने उस 'अदृश्य पाप' का खुलासा कर दिया है, जिसे यह सरकार आने वाली पीढ़ियों के माथे पर मढ़ रही है।
यहाँ इस 'सुनहरे भारत' की वो कड़वी हकीकत है जो गोदी मीडिया आपको कभी नहीं दिखाएगा:
1. ₹8,20,000 करोड़ का नया कर्ज: किसका विकास?
सरकार ने अगले मात्र 6 महीनों (अप्रैल-सितंबर 2026) के लिए 8.2 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का प्लान जारी किया है।
* जमीनी सच: इसका मतलब है कि आज इस देश में जो बच्चा पैदा हुआ, उसे माँ-बाप का प्यार मिलने से पहले ही सरकार ने ₹23,000 का अतिरिक्त कर्ज थमा दिया।
* भारत का कुल कर्ज अब 214 लाख करोड़ होने जा रहा है। क्या यही है वो 'अमृत काल' जिसका सपना आप दिखा रहे थे?
2. ₹100 की कमाई, ₹34 का ब्याज—कहाँ गया पैसा?
आज भारत की स्थिति उस कर्जदार जैसी है जो केवल पिछला ब्याज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहा है।
* सरकार की कुल कमाई का 34% हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज (Interest) भरने में जा रहा है।
* यह पैसा स्कूलों में नहीं जा रहा, अस्पतालों में नहीं जा रहा, युवाओं के रोजगार में नहीं जा रहा। यह पैसा जा रहा है उन 'गलत आर्थिक नीतियों' के गड्ढों को भरने में जो पिछले 10 सालों में खोदे गए हैं।
3. 'रुपया' मार्गदर्शक मंडल में, और प्रधानमंत्री मौन!
याद करिए 2014 से पहले के वो भाषण, जब आप कहते थे कि "रुपया गिरता है तो देश की साख गिरती है।"
* 1947 में रुपया ₹4 के करीब था, आज ₹95 पार कर रहा है और ₹100 की ओर दौड़ रहा है। * शर्मनाक सच यह है कि युद्ध झेल चुके और तबाह हो चुके अफगानिस्तान की मुद्रा (Afghani) की यूनिट वैल्यू आज भारतीय रुपए से ज्यादा है।
* क्या अब देश की साख नहीं गिर रही? या अब 'साहब' को रुपए की सेहत से कोई सरोकार नहीं है?
4. इंटर-जनरेशनल डकैती: बच्चों का भविष्य दांव पर
अर्थशास्त्री इसे 'डेप्ट ओवरहंग' कहते हैं, लेकिन आम भाषा में यह 'आने वाली पीढ़ी के साथ गद्दारी' है।
* आज की पीढ़ी जो ऐश और प्रोपगैंडा कर रही है, उसका बिल वो बच्चा भरेगा जिसने न इस सरकार को वोट दिया, न इस कर्ज के लिए अपनी सहमति दी।
* जब वो बच्चा बड़ा होकर अपनी पहली कमाई करेगा, तो उसका एक बड़ा हिस्सा आपके द्वारा लिए गए फिजूलखर्च कर्जों का ब्याज चुकाने में चला जाएगा।
सीधे सवाल: अकाउंटेबिलिटी कहाँ है?
एक तरफ आप ₹16,087 करोड़ का गन्ना बकाया नहीं चुका पाते, एक तरफ 8.25% ग्रेजुएट्स को नौकरी नहीं दे पाते, लेकिन दूसरी तरफ 'कैपेक्स' और 'इंफ्रास्ट्रक्चर' के नाम पर लाखों-करोड़ों का कर्ज लेकर देश को 'कर्ज के जाल' (Debt Trap) में धकेल रहे हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध और $120 प्रति बैरल का तेल आपकी इस 'कागजी इकॉनमी' को कभी भी धराशायी कर सकता है।
यह 'विकास' नहीं, बल्कि 'विनाश' की पटकथा है। जनता को तय करना होगा कि उन्हें 'विश्वगुरु' का खोखला नारा चाहिए या अपने बच्चों के सिर से इस कर्ज का बोझ हटाना है।
इस लेख को हर उस नागरिक तक पहुँचाएं जो सोचता है कि 'सब चंगा सी'। हकीकत यह है कि हम सब गले तक कर्ज में डूबे हुए हैं और सरकार इसे 'मास्टरस्ट्रोक' बता रही है। |
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2026-04-06 23:11:52 |
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| 70322 |
40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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तुझको देखूं, देखूं जिधर???
.
.
Follow @vishudh_yatiraj for more
.
.
#jainism
#explore #jain
#vishudhsagar #ɪɴsᴛᴀʀᴇᴇʟs
<a href="https://www.instagram.com/reel/DWtl3m7k7lx/?igsh=bjZ1ajBwcHljeTgw" target="_blank">https://www.instagram.com/reel/DWtl3m7k7lx/?igsh=bjZ1ajBwcHljeTgw</a> |
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2026-04-06 23:11:37 |
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40449675 |
?विराग विशुद्ध विनिश्चल गुरुभक्त परिवार? |
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तुझको देखूं, देखूं जिधर???
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#vishudhsagar #ɪɴsᴛᴀʀᴇᴇʟs
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2026-04-06 23:11:37 |
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| 70320 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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2026-04-06 23:08:51 |
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40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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2026-04-06 23:08:51 |
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40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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2026-04-06 23:06:14 |
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| 70319 |
40449686 |
सैतवाल मुखपत्र ? |
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2026-04-06 23:06:14 |
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| 70316 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-04-06 23:05:48 |
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