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Chat ID
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Chat Name
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Sender
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Phone
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Message
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Status
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Date |
View |
| 231761 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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2026-06-15 10:09:18 |
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| 231762 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
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Wandami Mataji |
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2026-06-15 10:09:18 |
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| 231763 |
40449668 |
आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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2026-06-15 10:09:18 |
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| 231759 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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??? |
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2026-06-15 10:08:09 |
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| 231760 |
40449688 |
3. विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी |
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??? |
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2026-06-15 10:08:09 |
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| 231757 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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आदरणीय दादी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि ? |
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2026-06-15 10:07:19 |
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| 231758 |
50892187 |
श्री जिनेन्द्र भक्तमण्डल ग्वालियर |
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आदरणीय दादी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि ? |
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2026-06-15 10:07:19 |
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| 231756 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 26/5/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
उत्तम उत्तम भावों से जो
भावित करते आतम को
राग लोभ मात्सर्य शाठ्य मद
को तजते हैं अघतम को।
*नहीं किसी से तुलना जिनकी*
*जिनका जीवन अतुल रहा*
सिद्धासन मन जिनके, चलता
आगम मन्थन विपुल रहा॥७॥
• _आचार्य भक्ति पद्यानुवाद_
• _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-06-15 10:05:04 |
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| 231755 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 26/5/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
उत्तम उत्तम भावों से जो
भावित करते आतम को
राग लोभ मात्सर्य शाठ्य मद
को तजते हैं अघतम को।
*नहीं किसी से तुलना जिनकी*
*जिनका जीवन अतुल रहा*
सिद्धासन मन जिनके, चलता
आगम मन्थन विपुल रहा॥७॥
• _आचार्य भक्ति पद्यानुवाद_
• _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-06-15 10:05:03 |
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| 231753 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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_*आहार चर्या* (पड़गाहन), 26/5/26, इतवारी, नागपुर, प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान दिगंबर जैन *आचार्य श्री समयसागर जी महाराज*_
???
उत्तम उत्तम भावों से जो
भावित करते आतम को
राग लोभ मात्सर्य शाठ्य मद
को तजते हैं अघतम को।
*नहीं किसी से तुलना जिनकी*
*जिनका जीवन अतुल रहा*
सिद्धासन मन जिनके, चलता
आगम मन्थन विपुल रहा॥७॥
• _आचार्य भक्ति पद्यानुवाद_
• _आचार्य श्री विद्यासागर जी_ |
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2026-06-15 10:04:32 |
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