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11200 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ सम्यक ज्ञान मनुष्य को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ाता है आचार्य विनिश्चय: सागर महाराज <a href="https://jansamachar24.com/?p=82719" target="_blank">https://jansamachar24.com/?p=82719</a> 2026-02-20 06:56:57
11199 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ ✨ || श्री तीर्थंकराय नमः || ✨ ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ ? प्रथमानुयोग ▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰ ? सोलह कारण भावना –80 ? 15. सन्मार्ग प्रभावना भावना ▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰ ? विशेष सूचना <a href="https://quizzory.in/id/699676e02aabb6d2b9b22ed8" target="_blank">https://quizzory.in/id/699676e02aabb6d2b9b22ed8</a> कथा में आए प्रश्नों के समाधान हेतु नीचे दिए गए लिंक द्वारा ? 24 घंटे में उत्तर प्राप्त करें। ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *सन्मार्ग प्रभावना* जो ज्ञानी जैन धर्म की प्रभाव ना करते हैं वे मोक्ष मार्ग को भली भांति जानते हैं अर्थात वें मोक्षमार्गी होते हैं । जिसके द्वारा खोज की जाए उसे मार्ग कहते हैं जिस मार्ग द्वारा अनादि से छूटी वस्तु का ज्ञान होता है उस मार्ग की यहां पर चर्चा है । धन प्राप्ति का मार्ग तो लौकिक है परंतु यहां जो चर्चा की जाएगी वह रत्नत्रय प्राप्ति का मार्ग है । जिस मार्ग का अनुसरण करने से आत्मा कुंदन बनती है । सुदर्शन ने शील की महिमा दिखलाई ,सीता ,मनोरमा . द्रोपदी ,आदि ने शील की महिमा दिखाकर धर्म मार्ग की प्रभावना की ।आजकल जन्मदिवस दीक्षा दिवस गोश्ठियाँ आदि में एकत्रित होना एक दूसरे की चापलूसी करना यह धन का अपव्यय है प्रभावना नहीं ।अपना आचरण उत्तम बनाने से प्रभावना होती है गिरतों को उठाने से, गरीबों पर दया करने से,अहिंसा की पताका फहराने से, रत्नत्रय से,वितराग मार्ग पर बडने से प्रभावना होती है । *परशुराम की कथा* ‼️❌❌❌❌‼️ संसार–समुद्र पार करने वाले जिनेन्द्र भगवान को नमस्कार कर परशुराम का चरित्र लिखा जाता है जिसे सुनकर आश्चर्य होता है। अयोध्या का राजा कार्तवीर्य अत्यन्त मूर्ख था। उसकी रानी का नाम पद्मावती था। अयोध्या के जंगल में यमदग्नि नाम के एक तपस्वी का आश्रम था। इस तपस्वी की स्त्री का नाम रेणुका था। इसके दो लड़के थे। इनमें एक का नाम श्वेतराम था और दूसरे का महेन्द्रराम। एक दिन की बात है कि रेणुका के भाई वरदत्त मुनि उस ओर आ निकले। वे एक वृक्ष के नीचे ठहरे। उन्हें देखकर रेणुका बड़े प्रेम से उनसे मिलने को आई और उनके हाथ जोड़कर वहीं बैठ गई। बुद्धिमान वरदत्त मुनि ने उपस्थितियों को उपदेशित किया– मैं तुम्हे कुछ धर्म का उपदेश सुनाता हूँ। तूम उसे जरा सावधानी से सुनना। देखो, सब जीव सुख को चाहते हैं, पर सच्चे सुख को प्राप्त करने की कोई विरला ही खोज करता है और इसीलिये प्रायः लोग दुखी देखे जाते हैं। *सच्चे सुख का कारण पवित्र सम्यक्दर्शन का ग्रहण करना है। जो पुरुष सम्यक्त्व प्राप्त कर लेते हैं, वे दुर्गति में फिर नहीं भटकते।* संसार का भ्रमण भी उनका कम हो जाता है। उनमें कितने तो उसी भव से मोक्ष चले जाते हैं। *सम्यक्त्व का साधारण स्वरूप यह है कि सच्चे देव, सच्चे गुरु और सच्चे शास्त्र पर ही विश्वास लाना।* सच्चे देव वे हैं, जो भूख और प्यास, राग और द्वेष, क्रोध और लोभ, मान और माया आदि अठारह दोषों से रहित हों, जिनका ज्ञान इतना बड़ा–चौड़ा हो कि उससे संसार का कोई पदार्थ अनजाना न रह गया हो, जिन्हें स्वर्ग के देव, विद्याधर, चक्रवर्ती और बड़े–बड़े राजा–महाराजे भी पूजते हों, और जिनका उपदेश किया पवित्र धर्म इस लोक में और परलोक में सुख का देने वाला हो तथा जिस पवित्र धर्म की इन्द्रादि देव भी पूजा–भक्ति कर अपना जीवन कृतार्थ समझते हों। ऐसा अहिंसा धर्म प्रसिद्ध है और सच्चे गुरु वे कहलाते हैं, जो शील और संयम के पालने वाले हों, ज्ञान और ध्यान का साधन ही जिनके जीवन का खास उद्देश्य हो और जिनके पास परिग्रह रत्तीभर भी न हो। इन बातों पर विश्वास करने को सम्यक्त्व कहते हैं। इसके सिवा गृहस्थों के लिए पात्रदान करना, भगवान की पूजा करना, अणुव्रत, गुणव्रत और शिक्षाव्रत धारण करना, पर्वों में उपवास वगैरह करना आदि बातें भी आवश्यक हैं। यह गृहस्थ-धर्म कहलाता है। हे रेणुका तू इसे धारण कर। इससे तुझे सुख प्राप्त होगा। मुनिराज के द्वारा धर्म का उपदेश सुन रेणुका का बहुत प्रसन्न हुई। उसने बड़ी श्रद्धा-भक्ति के साथ सम्यक्त्व-रत्न द्वारा अपनी आत्मा को विभूषित किया और सच भी है, यही सम्यक्त्व तो भव्यजनों का भूषण है। रेणुका का धर्म-प्रेम देखकर वरदत्त मुनि ने उसे एक ‘परशु’ और दूसरी ‘कामधेनु’ ऐसी दो महाविद्याएँ दीं, जो कि नाना प्रकार का सुख देने वाली हैं। रेणुका को विद्या देकर जैन तत्व के परम विद्वान वरदत्तमुनि विहार कर गये। इधर सम्यक्त्ववशालिनी रेणुका घर आकर सुख से रहने लगी। रेणुका को धर्म पर अब खूब प्रेम हो गया। वह भगवान की बड़ी भक्त हो गई। एक दिन राजा कार्तवीर्य हाथी पकड़ने को इसी वन की ओर आ निकला। घूमता हुआ वह रेणुका के आश्रम में आ गया। यमदग्नि तापस ने उसका अच्छा आदर-सत्कार किया और उसे अपने यहाँ जिमाया भी। भोजन कामधेनु नाम की विद्या की सहायता से बहुत उत्तम तैयार किया गया था। राजा भोजन कर बहुत ही प्रसन्न हुआ और क्यों न होता? क्योंकि सारी जिन्दगी में उसे कभी ऐसा भोजन खाने को ही न मिला था। उस कामधेनु को देखकर इस पापी राजा के मन में पाप आया। यह कृतघ्न तब उस बेचारे तापसी को जान से मारकर गौ को ले गया। सच है, दुर्जनों का स्वभाव ही ऐसा होता है कि जो उनका उपकार करते हैं, वे दूध पिलाये सर्प की तरह अपने उन उपकार करने वालों की ही जान के लेने वाले हो उठते हैं। राजा के जाने के थोड़ी देर बाद ही रेणुका के दोनों लड़के जंगल से लकड़ियाँ वगैरह लेकर आ गये। माता को रोती हुई देखकर उन्होंने उसका कारण पूछा। रेणुका ने सब हाल उनसे कह दिया। माता की दुःखभरी बातें सुनकर श्वेतराम के क्रोध का ठिकाना न रहा। वह कार्तवीर्य से अपने पिता का बदला लेने के लिए उसी समय माता से ‘परशु’ नाम की विद्या को लेकर अपने छोटे भाई को साथ लिए चल पड़ा। राजा के नगर में पहुँच कर उसने कार्तवीर्य को युद्ध के लिए ललकारा। यद्यपि एक ओर कार्तवीर्य की प्रचण्ड सेना थी और दूसरी ओर सिर्फ ये दो ही भाई थे; पर तब भी परशु विद्या के प्रभाव से इन दोनों भाइयों ने ही कार्तवीर्य की सारी सेना को छिन्न-भिन्न कर दिया और अन्त में कार्तवीर्य को मारकर अपने पिता का बदला लिया। मरकर पाप के फल से कार्तवीर्य नरक गया। सो ठीक ही है, पापियों की ऐसी गति होती ही है। उस तृष्णा को धिक्कार है जिसके वश हो लोग न्याय-अन्याय को कुछ नहीं देखते और फिर अनेक कष्टों को सहते हैं। ऐसे ही अन्यायों द्वारा तो पहले भी अनेक राजों–महाराजों का नाश हुआ है। और ठीक भी है जिस वायु से बड़े–बड़े हाथी तक मर जाते हैं तब उसके सामने बेचारे कीट–पतंगादि छोटे–छोटे जीव तो ठहर ही कैसे सकते हैं। श्वेतराम ने कार्तवीर्य को परशु विद्या से मारा था, इसलिए फिर अयोध्या में वह ‘परशुराम’ इस नाम से प्रसिद्ध हुआ। संसार में जो शूरवीर, विद्वान, सुखी, धनी हुए देखे जाते हैं वह पुण्य की महिमा है। इसलिए जो सुखी, विद्वान, धनवान, वीर आदि बनना चाहते हैं, उन्हें जिन भगवान का उपदेश किया पुण्य–मार्ग ग्रहण करना चाहिए। ▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰▰ ?️ संकलन: पं. मुकेश शास्त्री ? स्थान: सुसनेर ? संपर्क: 9425935221 ? दिनांक: 20 फरवरी 2026 2026-02-20 06:56:11
11198 40449684 ?(5)णमोकार मंत्र तीर्थ उद्धारक आचार्य श्री प्रबल सागर ??namostu namostu namostu Bhagavan namostu namostu girudevji vadami mataji .Jai jinendraji ???? 2026-02-20 06:55:14
11197 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) *एक मिनट रुकिए… यह सिर्फ एक पोस्ट नहीं, किसी की साँसों की पुकार है।* *सादर जय जिनेन्द्र ?* समाज का एक परिवार इस समय जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा है। घर का एक सदस्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। इलाज की लंबी लड़ाई में उन्होंने कर्ज लिया… उम्मीद से लिया… भरोसे से लिया… लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि दवाइयाँ अधूरी हैं, इलाज अधूरा है, और कई बार तो घर का चूल्हा भी अधूरा रह जाता है। स्वास्थ्य गिर रहा है… आर्थिक स्थिति टूट चुकी है… मानसिक तनाव ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। सबसे बड़ी बात — उन्होंने मदद माँगते समय भी अपना स्वाभिमान नहीं छोड़ा। पहचान गुप्त रखने की शर्त पर ही सहायता की अपील की, ताकि सम्मान बचा रहे… मैंने अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग किया। कुछ सज्जनों ने भी आगे बढ़कर हाथ थामा — संजीव कुमार जी जैन साहब, कमलेश जी जैन साहब, मनीष जैन साहब, प्रतिभा जैन जी, उन्नति इंटरप्राइजेज विशेष रूप से उन्नति इंटरप्राइजेज ने एक बार नहीं, दो बार सहयोग देकर मानवता का अद्भुत उदाहरण रखा। यह राशि नहीं… यह भावना है… यह धर्म की जीवंत व्याख्या है। लेकिन… करोड़ों के दान की परंपरा रखने वाला हमारा समाज, क्या सचमुच एक पीड़ित परिवार के लिए ₹100 ₹200 ₹500 ₹1000 भी नहीं निकाल सकता? यह प्रश्न किसी पर आरोप नहीं… यह हम सबके लिए आईना है। धर्म केवल मंदिरों की भव्यता से नहीं, उसके साथ दुखी के आँसू पोंछने से जीवित रहता है। ? पुनः करबद्ध निवेदन ? यदि आप ₹100, ₹200 या अपनी सामर्थ्य अनुसार कोई भी राशि दे सकें, तो अवश्य दें। याद रखिए — छोटा योगदान भी किसी की जिंदगी में बड़ा सहारा बन सकता है। आपका सहयोग — • दवा बन सकता है • इलाज की एक और तारीख तय कर सकता है • एक परिवार को टूटने से बचा सकता है ? *UPI सहयोग हेतु : 9300981884* ? सीधे संपर्क हेतु : +91-6232771983 यह समय केवल देखने का नहीं… सहभागी बनने का है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल शायद पछताने के अलावा कुछ न बचे। आइए, मानवता को शब्दों से नहीं — कर्म से साबित करें। ? आपका एक छोटा कदम किसी की जिंदगी की लड़ाई को ताकत दे सकता है। धन्यवाद। जय जिनेन्द्र। 2026-02-20 06:53:10
11196 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-02-20 06:52:08
11195 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-02-20 06:52:06
11194 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-02-20 06:52:05
11193 40449686 सैतवाल मुखपत्र ? 2026-02-20 06:52:04
11192 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) ಕರ್ನಾಟಕ ದಿಗಂಬರ ಜೈನ ಸಮಾಜ ಇವರ ಆ್ಯಪ್ ಬಂದಿದೆ. ಎಲ್ಲಾ ಸದಸ್ಯರು ತಕ್ಷಣವೇ ಕೆಳಗೆ ನೀಡಿರುವ ಲಿಂಕ್ ಅನ್ನು ಕ್ಲಿಕ್ ಮಾಡುವ ಮೂಲಕ‌ ಗುಂಪನ್ನು‌ ಸೇರಿ, ಮತ್ತು ನಿಮ್ಮ ಸದಸ್ಯತ್ವ ಗುರುತಿನ ಚೀಟಿಯನ್ನು ಪಡೆಯಿರಿ - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/875244/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=ZHQAP&amp;utm_referrer_state=SUPERSTAR" target="_blank">https://primetrace.com/group/875244/home?utm_source=android_quote_share&amp;utm_screen=quote_share&amp;referral_code=ZHQAP&amp;utm_referrer_state=SUPERSTAR</a> 2026-02-20 06:49:31
11190 40449667 संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी *जगतपूज्य गुरुदेव का यह वीडियो अपने हर ग्रुप मे भेजें* *आजकल समाज मे एक नया चलन शुरू हो गया है लोग मंदिर मे द्रव्य अखबारों और पॉलिथीन मे लपेटकर लाने लगे है* *पूज्यवर का यह समाधान अद्भुत है* *जय जिनेंद्र जी* ?❤️?+??? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179836179?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179836179?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-20 06:48:15