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जिनोदय?JINODAYA |
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*अंधविश्वास, पाखंड और सच्चे धर्म की पहचान*
अंधविश्वास मनुष्य को धीरे-धीरे गुलाम बना देता है। जब व्यक्ति बिना सोचे-समझे किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार कर लेता है क्योंकि उसे बचपन से ऐसा बताया गया है, या किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने ऐसा कह दिया है, तब उसकी अपनी बुद्धि और विवेक पीछे छूट जाते हैं। वह अपने निर्णय स्वयं लेने के बजाय दूसरों के इशारों पर चलने लगता है। यही मानसिक गुलामी है। अंधविश्वास का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह प्रश्न पूछने की शक्ति को समाप्त कर देता है। जो समाज प्रश्न करना छोड़ देता है, वह प्रगति भी छोड़ देता है।
पाखंड इस अंधविश्वास का लाभ उठाता है। डर के सहारे लोगों को नियंत्रित करना सबसे आसान तरीका है। कभी स्वर्ग-नरक का भय दिखाया जाता है, कभी देवी-देवताओं के क्रोध का, कभी किसी अनिष्ट की आशंका का। जो लोग धर्म के नाम पर बाहरी आडंबर खड़ा करके स्वयं को विशेष और सर्वोच्च साबित करना चाहते हैं, वे जानते हैं कि भयभीत व्यक्ति आसानी से प्रभावित हो जाता है। इसीलिए पाखंड पहले डर पैदा करता है और फिर उसी डर का समाधान बेचता है। परिणाम यह होता है कि साधारण और श्रद्धालु लोग आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से शोषित होते रहते हैं।
सच्चा धर्म इन सबसे अलग है। सच्चा धर्म मनुष्य को सोचने की स्वतंत्रता देता है, विवेक का उपयोग करने की प्रेरणा देता है और आत्मचिंतन की राह दिखाता है। धर्म का उद्देश्य मनुष्य को छोटा और निर्बल बनाना नहीं, बल्कि उसे आत्मबल और नैतिक शक्ति देना है। यदि कोई व्यवस्था या व्यक्ति हमें प्रश्न करने से रोकता है, तर्क करने से मना करता है या भय के माध्यम से दबाव बनाता है, तो हमें समझना चाहिए कि वहाँ धर्म कम और स्वार्थ अधिक है।
इतिहास गवाह है कि जिन समाजों ने शिक्षा, तर्क और आत्ममंथन को अपनाया, वे आगे बढ़े। और जिन समाजों ने अंधानुकरण को ही धर्म समझ लिया, वे भीतर से कमजोर होते गए। धर्म का अर्थ बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि आचरण की पवित्रता है। सत्य, अहिंसा, करुणा, ईमानदारी और न्याय—ये धर्म के मूल स्तंभ हैं। यदि ये जीवन में नहीं हैं तो केवल वेशभूषा, बड़े मंच या भीड़ का कोई अर्थ नहीं।
आज आवश्यकता है कि हम अपनी आस्था को विवेक के साथ जोड़ें। श्रद्धा हो, लेकिन अंधी न हो। भक्ति हो, लेकिन बुद्धि के साथ हो। धर्म हमें स्वतंत्र, सजग और जिम्मेदार नागरिक बनाए—यदि ऐसा नहीं हो रहा, तो हमें आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। क्योंकि सच्चा धर्म वही है जो मनुष्य को सोचने की आज़ादी दे, उसे अपने कर्मों की जिम्मेदारी सिखाए और समाज को जागरूक बनाए।
नितिन जैन, संयोजक — जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा), जिलाध्यक्ष — अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल, मोबाइल: 9215635871 |
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2026-02-17 17:52:22 |
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1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
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शोक संदेश
बड़े दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरे बड़े भाई श्री सुधीर जैन पचोखरा वाले निवासी जसोला विहार का अकास्मिक निधन हो गया है। उनकी शब यात्रा आज रात्रि 9:00 बजे निगम बोध घाट जमुना बाजार के लिए जाएगी।
निवास स्थान :
86 C, Pocket 12, DDA FLAT, JASOLA VIHAR, DELHI.
भाई : मनोज जैन : 8377083859 |
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2026-02-17 17:47:18 |
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