| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 224340 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
The Dharmasthala Conspiracy Just Got A Famous Name — And It's In A High Court Record today.
Actor Prakash Raj is named in a writ petition admitted by the Karnataka High Court in the Dharmasthala skull case defaming hindus.
This is not a rumour. This is a sworn affidavit before Justice Suraj Govindaraju sir.
The petition alleges a ₹200 crore conspiracy — Kerala-funded — to systematically defame Dharmasthala, one of Karnataka's most revered Hindu shrines.
About 30-35 YouTube videos were reportedly pre-produced BEFORE the "evidence" was even planted.
Prakash Raj allegedly told the accused directly in Tamil: "Give your statement as instructed. I will embrace you on the 29th." A vulnerable SC man was coached, threatened with a knife, and abandoned to face jail alone.
The real accused? Walking free. The SIT? Delaying its final report.
The High Court has now issued notices to the State Government and SIT. Next hearing: June 29.
You spent years asking questions, Mr. Prakash . Karnataka has one for you today — was Dharmasthala your target all along?
Karma doesn't need your address. It already found you — in a High Court petition.
#DharmasthalaCase #PrakashRaj #KarnatakaHighCourt #JustAsking
Prashanth sambargi |
|
2026-06-12 11:57:30 |
|
| 224338 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
|
|
2026-06-12 11:57:28 |
|
| 224337 |
40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
|
|
|
|
2026-06-12 11:57:27 |
|
| 224336 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
|
|
2026-06-12 11:52:56 |
|
| 224335 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
|
|
2026-06-12 11:52:55 |
|
| 224333 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-12 11:51:12 |
|
| 224334 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
?? *वंदामी माताजी* ??
?? *इच्छामी माताजी* ??
? *जय जिनेन्द्र दीदीजी* ? |
|
2026-06-12 11:51:12 |
|
| 224331 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
विहार में साथ चलने के 6 मुख्य फल
1. तीर्थ-वंदना तुल्य पुण्य: दिगम्बर मान्यता है कि मुनि चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके चरण जहाँ पड़ते हैं वह भूमि पवित्र हो जाती है। उनके साथ 1 कदम चलना भी एक उपवास के बराबर फल देता है।
2. अशुभ कर्मों की निर्जरा: मुनि पंच महाव्रत धारी होते हैं। उनके साथ चलते समय आपके मन में अहिंसा, सत्य, अचौर्य के भाव रहते हैं, जिससे अशुभ आस्रव रुकता है और पुराने कर्मों की निर्जरा होती है।
3. सम्यग्दर्शन की दृढ़ता: रत्नकरण्ड श्रावकाचार में कहा है कि साधु के दर्शन, वंदना, चर्चा से सम्यक्त्व पुष्ट होता है। विहार में घंटों साथ रहने से उनकी चर्या, मौन, संयम देखकर श्रद्धा बढ़ती है।
4. साता-वेदनीय कर्म का बंध: श्रावक जब मुनि की वैयावृत्ति करता है — रास्ता साफ करना, आहार के लिए योग्य क्षेत्र देखना, सुरक्षा देना — तो साता वेदनीय और उच्च गोत्र कर्म बंधता है।
5. भव-भ्रमण में कमी: कहा जाता है मुनि संगति से जीव का संसार परिभ्रमण घटता है। क्योंकि विहार में धर्म-श्रवण होता है, वैराग्य बढ़ता है।
6. पुण्यानुबंधी पुण्य: सिर्फ इस भव में नहीं, अगले भवों में भी धर्म सामग्री, उत्तम कुल, आर्य क्षेत्र मिलना सुलभ होता है। |
|
2026-06-12 11:50:25 |
|
| 224332 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
|
|
विहार में साथ चलने के 6 मुख्य फल
1. तीर्थ-वंदना तुल्य पुण्य: दिगम्बर मान्यता है कि मुनि चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके चरण जहाँ पड़ते हैं वह भूमि पवित्र हो जाती है। उनके साथ 1 कदम चलना भी एक उपवास के बराबर फल देता है।
2. अशुभ कर्मों की निर्जरा: मुनि पंच महाव्रत धारी होते हैं। उनके साथ चलते समय आपके मन में अहिंसा, सत्य, अचौर्य के भाव रहते हैं, जिससे अशुभ आस्रव रुकता है और पुराने कर्मों की निर्जरा होती है।
3. सम्यग्दर्शन की दृढ़ता: रत्नकरण्ड श्रावकाचार में कहा है कि साधु के दर्शन, वंदना, चर्चा से सम्यक्त्व पुष्ट होता है। विहार में घंटों साथ रहने से उनकी चर्या, मौन, संयम देखकर श्रद्धा बढ़ती है।
4. साता-वेदनीय कर्म का बंध: श्रावक जब मुनि की वैयावृत्ति करता है — रास्ता साफ करना, आहार के लिए योग्य क्षेत्र देखना, सुरक्षा देना — तो साता वेदनीय और उच्च गोत्र कर्म बंधता है।
5. भव-भ्रमण में कमी: कहा जाता है मुनि संगति से जीव का संसार परिभ्रमण घटता है। क्योंकि विहार में धर्म-श्रवण होता है, वैराग्य बढ़ता है।
6. पुण्यानुबंधी पुण्य: सिर्फ इस भव में नहीं, अगले भवों में भी धर्म सामग्री, उत्तम कुल, आर्य क्षेत्र मिलना सुलभ होता है। |
|
2026-06-12 11:50:25 |
|
| 224329 |
48340398 |
???गुरु भगवान??? |
|
|
12 जून सुविचार |
|
2026-06-12 11:49:31 |
|