| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 73971 |
40449733 |
•परम गुरू ज्ञान संघ• |
|
|
|
|
2026-04-10 07:59:11 |
|
| 73972 |
40449733 |
•परम गुरू ज्ञान संघ• |
|
|
|
|
2026-04-10 07:59:11 |
|
| 73967 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
|
|
|
|
2026-04-10 07:59:10 |
|
| 73968 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
|
|
|
|
2026-04-10 07:59:10 |
|
| 73963 |
40449752 |
?3 विद्यांजलि ब्रॉडकास्ट ? |
|
|
?*विद्यांजलि शरबती गेहूँ... ? प्रतिशत पेस्टिसाइड मुक्त, भारतीय पारंपरिक बीज द्वारा उत्पादित एम पी के स्वास्थ्य वर्धक शरबती गेहूँ*?
*उज्जैन से भी बुकिंग आ रही है*
*यदि आपके लिए परिवार की सेहत सर्वोपरि है तो... आप भी शीघ्र अपने कदम बढ़ाएँ*
*उज्जैन, कोटा, रामगंज मंडी, टोंक के सदस्य शीघ्र संपर्क कीजिएगा... विद्यांजलि शरबती गेहूँ का ट्रक आपके शहर में लाने का प्रयास किया जा रहा है ?*
*बुकिंग सिर्फ़ कुछ दिन और*
*अधिक से अधिक लोगों को शेयर कीजिएगा*
संपर्क कीजिएगा
सोनाली जैन
9928200660 |
|
2026-04-10 07:59:09 |
|
| 73964 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
|
|
?✨ *भक्ति और साधना का सुंदर संगम* ✨?
*श्रमदान एवं अपनापन* ?
हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र, बुढ़गांव [कारोपानी], डिंडोरी
? जहां *छात्र एक साथ बैठकर*
भगवान की आराधना में लीन हैं…
वहां केवल शिक्षा ही नहीं,
बल्कि *संस्कारों का भी निर्माण* होता है।
? *ध्यान, अनुशासन और आत्मशुद्धि*
— यही है हमारी सच्ची पूंजी
? *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित*
यह पावन प्रकल्प
नई पीढ़ी को *संस्कार और स्वावलंबन* दोनों दे रहा है ???
✨ आइए, इस दिव्य वातावरण से जुड़ें
और *संस्कारमय भारत* के निर्माण में अपना योगदान दें
#श्रमदान_एवं_अपनापन #संस्कार #भक्ति #हथकरघा #आत्मशुद्धि #भारत |
|
2026-04-10 07:59:09 |
|
| 73965 |
40449688 |
3. विद्याशिरोमणी आचार्य श्री समयसागर जी |
|
|
?✨ *भक्ति और साधना का सुंदर संगम* ✨?
*श्रमदान एवं अपनापन* ?
हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र, बुढ़गांव [कारोपानी], डिंडोरी
? जहां *छात्र एक साथ बैठकर*
भगवान की आराधना में लीन हैं…
वहां केवल शिक्षा ही नहीं,
बल्कि *संस्कारों का भी निर्माण* होता है।
? *ध्यान, अनुशासन और आत्मशुद्धि*
— यही है हमारी सच्ची पूंजी
? *प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं प्रातः स्मरणीय परम पूज्य वर्तमान आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित*
यह पावन प्रकल्प
नई पीढ़ी को *संस्कार और स्वावलंबन* दोनों दे रहा है ???
✨ आइए, इस दिव्य वातावरण से जुड़ें
और *संस्कारमय भारत* के निर्माण में अपना योगदान दें
#श्रमदान_एवं_अपनापन #संस्कार #भक्ति #हथकरघा #आत्मशुद्धि #भारत |
|
2026-04-10 07:59:09 |
|
| 73966 |
40449752 |
?3 विद्यांजलि ब्रॉडकास्ट ? |
|
|
?*विद्यांजलि शरबती गेहूँ... ? प्रतिशत पेस्टिसाइड मुक्त, भारतीय पारंपरिक बीज द्वारा उत्पादित एम पी के स्वास्थ्य वर्धक शरबती गेहूँ*?
*उज्जैन से भी बुकिंग आ रही है*
*यदि आपके लिए परिवार की सेहत सर्वोपरि है तो... आप भी शीघ्र अपने कदम बढ़ाएँ*
*उज्जैन, कोटा, रामगंज मंडी, टोंक के सदस्य शीघ्र संपर्क कीजिएगा... विद्यांजलि शरबती गेहूँ का ट्रक आपके शहर में लाने का प्रयास किया जा रहा है ?*
*बुकिंग सिर्फ़ कुछ दिन और*
*अधिक से अधिक लोगों को शेयर कीजिएगा*
संपर्क कीजिएगा
सोनाली जैन
9928200660 |
|
2026-04-10 07:59:09 |
|
| 73962 |
40449733 |
•परम गुरू ज्ञान संघ• |
|
|
<a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a>
विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। |
|
2026-04-10 07:59:08 |
|
| 73961 |
40449733 |
•परम गुरू ज्ञान संघ• |
|
|
<a href="https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56" target="_blank">https://youtu.be/6x9x2MJ2MC8?si=cFm0IBy2zXME0Z56</a>
विधि:—प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर शान्त मन, शुद्ध हृदय और श्रद्धा-भक्ति से इन पावन मन्त्रों का पाठ करें अथवा उनका श्रवण करें। विशेष फल प्राप्ति के लिए, एक शुद्ध घी का दीपक जलाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इन मन्त्रों का पाठ या श्रवण लगातार 9 बार करें। ऐसा करने से साधक के चारों ओर एक पवित्र ऊर्जा का सञ्चार होता है, जिससे उसका मन स्थिर और चित्त प्रसन्न रहता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर: 1. साधक के समस्त विघ्न, क्लेश और बाधाएँ शान्त होती हैं। 2. गृह में सुख, शान्ति और समृद्धि का वास होता है। 3. व्यापार और कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है। 4. आत्मा में आध्यात्मिक बल और ऊर्जा का जागरण होता है। ये पावन मन्त्र अदम्य शक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत, श्रुताराधक सन्त क्षुल्लक श्री प्रज्ञांशसागर जी गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित हैं। इनका श्रद्धापूर्वक श्रवण अथवा पाठ आपके जीवन में दिव्यता और स्थायित्व लाएगा। |
|
2026-04-10 07:59:07 |
|