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3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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*वृषभाचल क्षेत्र जगनमाता श्री चक्रेश्वरी देवी ची आजची अलंकार पूजा*
आज दिनांक :18/02/2026
ठिकाण : श्री अतिशय क्षेत्र वृषभाचल नांदणी |
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2026-02-18 14:12:54 |
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3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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??? |
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2026-02-18 14:12:52 |
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3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-02-18 14:12:50 |
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3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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????????????? ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಶುಭ ದಿನದ ಶುಭೋದಯ ?? |
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2026-02-18 14:12:49 |
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40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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????????????? ಜೈ ಜಿನೇಂದ್ರ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಶುಭ ದಿನದ ಶುಭೋದಯ ?? |
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2026-02-18 14:12:47 |
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40449699 |
3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-02-18 14:12:46 |
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3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) |
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2026-02-18 14:12:44 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*LIVE ● तपकल्याणक ● चतुर्थ दिवस ● लाल मंदिर पंचकल्याणक महामहोत्सव ● मंगल सानिध्य - आचार्य श्री 108 श्रुतसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री 108 सौरभसागर जी महाराज*
<a href="https://www.youtube.com/live/U1c1N3waghE?si=gUc1bEuMu0qQwRZF" target="_blank">https://www.youtube.com/live/U1c1N3waghE?si=gUc1bEuMu0qQwRZF</a>
?कार्यक्रम स्थल : लाल किला ग्राउंड, दिल्ली
*? आयोजक*
प्राचीन श्री अग्रवाल दिगंबर जैन पंचायत, रजि., धर्मपुरा दिल्ली-06 || श्री 1008 मज्जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीसी जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति
*निवेदक*
चक्रेश जैन (बिजली वाले) अध्यक्ष, प्रबंध कार्यकारिणी, विजेंद्र जैन मंत्री पंचायत
*??विशेष प्रसारण*
?तीर्थंकर जैन चैनल |
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2026-02-18 14:10:12 |
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49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*।। द्रव्यानुयोग।।*
*_!! श्रीसर्वज्ञवीतरागाय नमः !!_*
श्रीमद्-भगवत्पूज्यपाद-आचार्य-प्रणीत
_॥श्री इष्टोपदेश॥_
मूल संस्कृत गाथा
( *पंडित आशाधरजी* )
_मंगलाचरण_
*परमात्मानमानम्य, मुमुक्षुः स्वात्मसंविदे ।*
*इष्टोपदेशमाचष्टे, स्वशक्त्याशाधरः स्फुटम् ॥*
_मूलग्रन्थकर्ता का मंगलाचरण ।_
*यस्य स्वयं स्वाभावाप्ति, रभावे कृत्स्नकर्मणः*
*तस्मै संज्ञान-रूपाय नमोऽस्तु परमात्मने ॥1॥*
_व्रत से स्वर्ग-मोक्ष की प्राप्ति -_
*यत्र भावः शिवं दत्ते, द्यौः कियद्दूरवर्तिनी*
*यो नयत्याशु गव्यूतिं क्रोशार्धे किं स सीदति ॥4॥*
_आत्मभाव यदि मोक्षप्रद, स्वर्ग है कितनी दूर_
_दोय कोस जो ले चले, आध कोस सुख दूर ॥४॥_
*अन्वयार्थ* : आत्मा में लगा हुआ जो परिणाम भव्य प्राणियों को मोक्ष प्रदान करता है, उस मोक्ष देने में समर्थ आत्म-परिणाम के लिये स्वर्ग कितना दूर है?
*आशाधरजी* : आत्मा में लगा हुआ जो परिणाम भव्य प्राणियों को मोक्ष प्रदान करता है, उस मोक्ष देने में समर्थ आत्म-परिणाम के लिये स्वर्ग कितना दूर है? न कुछ। वह तो उनके निकट ही समझो । अर्थात् स्वर्ग तो स्वात्यध्यान से पैदा किये पुण्य का एक फलमात्र है। ऐसा ही कथन अन्य ग्रन्थों में भी पाया जाता है। तत्वानुशासन में कहा है 'गुरू के उपदेश को प्राप्त कर सावधान हुए प्राणियों के द्वारा चिन्तवन किया गया यह अनंत शक्तिवाला आत्मा चिंतवन करनेवाले को भुक्ति और मुक्ति प्रदान करता है। इस आत्मा को अरहंत और सिद्ध के रूप में चिंतवन किया जाय तो यह चरमशरीरी को मुक्ति प्रदान करता है और यदि चरमशरीरी न हो तो उसे वह आत्म-ध्यान से उपार्जित पुण्य की सहायता से भुक्ति (सवर्ग चक्रवर्त्यादि के भोगों) को प्रदान करनेवाला होता है।'
श्लोक की नीचे की पंक्ति में उपरिलिखित भाव को दृष्टान्त द्वारा समझाते हैं -
देखो, जो भार को ढोनेवाला अपने भार को दो कोस तक आसानी और शीघ्रता के साथ ले जा सकता है, तो क्या वह अपने भार को आधा कोस ले जाते हुए खिन्न होगा? नहीं। भार को ले जाते हुए खिन्न न होगा। बड़ी शक्ति के रहने या पाये जाने पर अल्प शक्ति का पाया जाना तो सहज (स्वाभाविक) ही है ॥४॥
इस प्रकार आत्म-भक्ति को जब कि स्वर्ग-सुखों का कारण बतला दिया गया, तब शिष्य पुनः कुतूहल की निवृत्ति के लिये पूछता है कि 'स्वर्ग में जानेवालों को क्या फल मिलता है ?' आचार्य इसका स्पष्ट रीति से उत्तर देते हुए लिखते हैं -- |
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2026-02-18 14:07:25 |
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40449663 |
? आचार्य सुधीन्द्र संदेश ? |
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*दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरिजी का प्रेरणादायक जीवन की कहानी*
(एनिमेटेड कहानी) *New Publishes*
*दादा का चादर महोत्सव के पहले अवश्य जाने उनका पवित्र और चमत्कारिक जीवन चरित्र*
*जैन धर्म के तेजस्वी आचार्य श्री जिनदत्तसूरिजी गुरुदेव ने अपनी कठोर साधना, अद्भुत चमत्कारों और अटूट संयम से अनगिनत श्रद्धालुओं के जीवन को धर्ममय बना दिया।*
वे दादागुरु, बड़े दादा और युगप्रधान जैसे अनेक पवित्र नामों से भी जगत में विख्यात हुए।
आइए, इस कहानी के माध्यम से ऐसे युगप्रधान महापुरुष के दिव्य जीवन को और उसके चमत्कारों को जानते हे।
*कहानी हिंदी में*
<a href="https://youtu.be/awv4WtSdFBw" target="_blank">https://youtu.be/awv4WtSdFBw</a>
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2026-02-18 14:07:16 |
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