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Chat Name
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Sender
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Message
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Status
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Date |
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| 223730 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*स्वास्थ्य संवाद - ( क्र. 1601 )*
***************************
*10) तंबाखू सेवन - व्याधीला निमंत्रण*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(भाग - 29)
"""""""""'''''"""""""
*दि.31 मे - तंबाखू सेवन विरोधी दिन...*
*खरंच तंबाखू इतकी वाईट आहे का ?*
*=> तंबाखू सेवनाच्या विविध पद्धती -*
तंबाखूचा वापर अनेक पद्धतीने केला जातो. संपूर्ण जगभर या तंबाखू सेवनाच्या अंगभूत सवय असलेल्या लोकांची संख्या हजारो..लाखो.. नव्हे तर कोट्यवधी इतकी प्रचंड आहे !
..आणि त्यामुळेच तर तंबाखू सेवनाच्या / तंबाखू व्यसनाच्या दुष्परिणामास बळी पडणाऱ्यांची आणि तंबाखूच्या दीर्घकालीन सेवनाच्या परीणामी दरवर्षी मृत्युमुखी पडणा-या व्यक्ती / रूग्णांची संख्याही जगभरात लाखोंच्या घरात आहे. हे कटु आहे पण सत्य आहे..!
अपायकारक आहे, हे माहिती असूनही, ज्या तंबाखूची मोहिनी / आकर्षण / आवड मानवास इतक्या प्रचंड प्रमाणात आहे, त्या तंबाखू आणि मानवी शरीर यांचा, ( सुरुवातीला सहज नंतर सवय आणि मग कालांतराने ) व्यसन म्हणून विविधांगांनी नेमका कसा कसा संबंध येत जातो, ते आता पाहूया..
*(क्रमशः) (दि.12/06/2026)*
*-डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9877/वै.1601) |
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2026-06-12 07:37:09 |
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| 223728 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-12 07:37:08 |
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| 223727 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-12 07:37:07 |
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| 223726 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - (क्र. 2637)*
****************************
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*247*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेत आहोत -
*॥ तृतीय अध्याय ॥*
*गंगासिन्धुरोहिद्रोहितास्याहरिद्हरिकान्तासीतासीतोदानारीनरकान्तासुवर्णरुप्यकूलारक्तारक्तोदाः सरितस्तन्मध्यगा॥*
( अध्याय 3 / सूत्र 21 )
*गंगा सिन्धु रोहित् रोहितास्या हरित् हरिकान्ता सीता सीतोदा नारी नरकान्ता सुवर्ण रुप्यकूला रक्ता रक्तोदा सरितः यन्मध्यगाः ॥3/21॥*
*विवेचन -*
~~~~~~
*सात क्षेत्रे आणि त्यांना विभाजित करणाऱ्या विविध नद्या याविषयी आचार्य श्री या सूत्रामध्ये वर्णन करीत आहेत.*
जी सात क्षेत्रे ( सूत्र क्र. 2/11 मध्ये ) सांगितलेली आहेत, त्या प्रत्येक क्षेत्रामधून, प्रत्येकी दोन दोन नद्या वाहतात, त्या नद्यांची नावे या सूत्रामध्ये दिलेली आहेत. ती आपण कालच्या भागात जाणून घेतली. आता ( सूत्र क्रमांक 2 / 11 मध्ये सांगितलेले सहा पर्वत आणि सूत्र क्रमांक 2/15 मध्ये ज्या सहा सरोवरांचे वर्णन केलेले आहे त्या ) सहा पर्वत, सहा सरोवरे आणि चौदा नद्यांचा काय संबंध आहे, ते एका
एकत्रित चार्टमधून पुढीलप्रमाणे जाणून घेऊया..?
*(क्रमशः) (दि.12/06/2026)*
*-डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9875/आ.3304) |
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2026-06-12 07:37:06 |
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| 223725 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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*आत्मचिंतन - (क्र. 2637)*
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*श्रीतत्त्वार्थसूत्र तथा मोक्षशास्त्र*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
(*247*)
*श्रीतत्त्वार्थसूत्र* अपरनाम *मोक्षशास्त्र* हा जैन तत्त्वज्ञानाचे सुंदर विश्लेषण करणारा एक अत्यंत महत्वाचा ग्रंथ / आगम / शास्त्र आहे. याचे विवेचन क्रमशः समजावून घेत आहोत -
*॥ तृतीय अध्याय ॥*
*गंगासिन्धुरोहिद्रोहितास्याहरिद्हरिकान्तासीतासीतोदानारीनरकान्तासुवर्णरुप्यकूलारक्तारक्तोदाः सरितस्तन्मध्यगा॥*
( अध्याय 3 / सूत्र 21 )
*गंगा सिन्धु रोहित् रोहितास्या हरित् हरिकान्ता सीता सीतोदा नारी नरकान्ता सुवर्ण रुप्यकूला रक्ता रक्तोदा सरितः यन्मध्यगाः ॥3/21॥*
*विवेचन -*
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*सात क्षेत्रे आणि त्यांना विभाजित करणाऱ्या विविध नद्या याविषयी आचार्य श्री या सूत्रामध्ये वर्णन करीत आहेत.*
जी सात क्षेत्रे ( सूत्र क्र. 2/11 मध्ये ) सांगितलेली आहेत, त्या प्रत्येक क्षेत्रामधून, प्रत्येकी दोन दोन नद्या वाहतात, त्या नद्यांची नावे या सूत्रामध्ये दिलेली आहेत. ती आपण कालच्या भागात जाणून घेतली. आता ( सूत्र क्रमांक 2 / 11 मध्ये सांगितलेले सहा पर्वत आणि सूत्र क्रमांक 2/15 मध्ये ज्या सहा सरोवरांचे वर्णन केलेले आहे त्या ) सहा पर्वत, सहा सरोवरे आणि चौदा नद्यांचा काय संबंध आहे, ते एका
एकत्रित चार्टमधून पुढीलप्रमाणे जाणून घेऊया..?
*(क्रमशः) (दि.12/06/2026)*
*-डॉ.अजित ज.पाटील, सांगली*
???
(ए.9875/आ.3304) |
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2026-06-12 07:37:05 |
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| 223723 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *आपकी चिंता या उपदेश से भी किसी की योग्यता नहीं बदलती है।*
2 *योग्यता अपरिवर्तनीय होती है।*
3 *सच्ची दया तो आत्महित में लगना और लगाना है।*
4 *सच्चा दान अभिमान को गलाता है बढ़ाता नहीं।*
5 *किसी की निंदा आपको प्रशंसा तो नहीं दिला सकती है।*
6 *दिल जीतना हो तो दिल से काम करो।*
7 *विश्वास ही वस्तु का आभास कराता है।*
8 *तीव्र कषायि को टोकने वाले अच्छे नहीं लगते हैं।*
9 *मौके का फायदा न उठाना मूर्खता है।*
10 *सुविधा की अपेक्षा जीव को दुविधा में डाल देती है।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 12-6-26) |
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2026-06-12 07:37:04 |
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| 223724 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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1 *आपकी चिंता या उपदेश से भी किसी की योग्यता नहीं बदलती है।*
2 *योग्यता अपरिवर्तनीय होती है।*
3 *सच्ची दया तो आत्महित में लगना और लगाना है।*
4 *सच्चा दान अभिमान को गलाता है बढ़ाता नहीं।*
5 *किसी की निंदा आपको प्रशंसा तो नहीं दिला सकती है।*
6 *दिल जीतना हो तो दिल से काम करो।*
7 *विश्वास ही वस्तु का आभास कराता है।*
8 *तीव्र कषायि को टोकने वाले अच्छे नहीं लगते हैं।*
9 *मौके का फायदा न उठाना मूर्खता है।*
10 *सुविधा की अपेक्षा जीव को दुविधा में डाल देती है।*
(श्रेणिक जैन जबलपुर 12-6-26) |
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2026-06-12 07:37:04 |
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| 223722 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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2026-06-12 07:37:02 |
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| 223721 |
40449665 |
2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म |
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2026-06-12 07:37:01 |
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| 223719 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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2026-06-12 07:36:58 |
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