WhatsApp Messages Dashboard

Total Records in Table: 11810

Records Matching Filters: 11810

From: To: Global Search:

Messages

ID Chat ID
Chat Name
Sender
Phone
Message
Status
Date View
6850 40449703 गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ Vandami mataji ????? 2026-02-17 07:13:42
6849 40449789 KSG Jain News Gaurav Patni (1) 20 वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागर जी की परंपरा के *द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज का 55 वां समाधि दिवस* एवं *आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का 121 वां जन्म दिवस पर* *शत शत नमन वंदन अर्चन* ???? फाल्गुन कृष्णा अमावस्या (17 फरवरी 2026) 2026-02-17 07:13:35
6848 40449699 3️⃣ ಜಿನೇಂದ್ರ ವಾಣಿ (G-3️⃣) 2026-02-17 07:11:34
6847 40449691 गुरु आर्जव वाणी New 3️⃣ आचार्य श्री का समाधि दिवस 2026-02-17 07:10:53
6846 40449690 गुरु आर्जव वाणी New 1️⃣ आचार्य श्री का समाधि दिवस 2026-02-17 07:10:48
6845 40449676 राष्ट्रीय मुनी सेवा संघ त्रय-गजरथ फेरी से गूंजा नगर, श्रद्धा में डूबे समाजबंधु  <a href="https://jansamachar24.com/?p=82457" target="_blank">https://jansamachar24.com/?p=82457</a> 2026-02-17 07:10:41
6843 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा <a href="https://youtu.be/hP8nmGkbuhA" target="_blank">https://youtu.be/hP8nmGkbuhA</a> _?*I18F2#ध्यान पिंडस्थ [पृ.धा] ध्यान शिविर भोपाल -हिन्दी -आ.बा.ब्र पं.श्री. जितेन्द्रजी,अकलूज।*_ ? *IMP e-books pdf &amp; All Charts pdf ?* <a href="https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf" target="_blank">https://drive.google.com/drive/folders/1LoQDGk9HNlU8APZ6gXtABjJcPagUJ_xf</a> *? जैन सिद्धान्त प्रवेशिका [हिन्दी]_ नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- पं.अनिलजी दुरुगकर,पुणे.* Link---<a href="https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share" target="_blank">https://youtube.com/live/JzDubFA7OMg?feature=share</a> *??#समयसार[तात्पर्यवृत्ति]-हिन्दी भावानुवाद [भाषा टीका]-मुनिवर श्री वीरसागरजी- प्रवक्ता:- पं.अनिलजी, पुणे.?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQf1LNXiCLWMg1a130gZMekY</a> *? आलाप-पध्दति ( हिन्दी)-आ.पं.श्री. अनिलजी दुरुगकर, पुणे प्रवचन Link ?*: <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfOJU6BYlsDQdXZiHELQeBy</a> *?#अध्यात्म न्यायदीपिका (हिंदी) आ.पं.श्री.अनिलजी दुरुगकर, पुणे:* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfA5sgAW6CqEUhiz88KbDPN</a> *? _Please forward for Jinvani Seva_* *ॐ?कृपया <a href="https://youtube.com/@108Veersagarji" target="_blank">https://youtube.com/@108Veersagarji</a> Channel को Subscribe करके Bell Icon दबाए, जिससे नित्य आपको नूतन पोस्ट के Notification आते रहेंगे,धन्यवाद.ॐ* *?"हिन्दी प्रवचन _अत्यन्त २ महत्वके प्रमाण नय निक्षेपादि विषयपर"_प्रवक्ता प.पू.१०८श्री वीरसागरजी महाराज Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeZlgh54nh0Q1263Gq887Ze</a> ? *WhatsApp Group से जुड़े -* <a href="https://chat.whatsapp.com/6JDP6BppOOPIU2trFxxxTc" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/6JDP6BppOOPIU2trFxxxTc</a> *? जैन सिद्धान्त प्रवेशिका प्रवचन_नर्सरी से ज्ञान प्राप्त करे ,वैज्ञानिक एवं अत्यंत रोचक शैली में. प्रवक्ता :- महाराज श्री एवं माताजी द्वय Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQe7kf2eUCOGAFjjjz-FIN3x" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQe7kf2eUCOGAFjjjz-FIN3x</a> *? न्यायदीपिका शिक्षण शिविर प्रवचन Link?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQerJbZ-kuVnyRrrWG6vZRRB" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQerJbZ-kuVnyRrrWG6vZRRB</a> *?आ.पं.श्री राजकुमारजी आळंदकर.लिंक# Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQdyhIF8P9rK-bVIa9pb5kKr" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQdyhIF8P9rK-bVIa9pb5kKr</a> *?आ.बा.ब्र.पं.श्री जितेन्द्रजी चंकेश्वरा प्रवचन लिंक# Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeRhkAe9qs11UQ4bjikeZeR" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeRhkAe9qs11UQ4bjikeZeR</a> *?प.पू.१०५ सुशिलमति माताजी &amp; प.पू.१०५ सुव्रता माताजी प्रवचन लिंक:?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfRlQ062Bonj_7baEJ8XQL6" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQfRlQ062Bonj_7baEJ8XQL6</a> *?४७ शक्ति आत्मख्याति प्रवचन Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeF4cLxMl2ek3Djjrk3wusz" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQeF4cLxMl2ek3Djjrk3wusz</a> *?न्यायदीपिका प्रवचन अध्याय १,२,३ -प्रवक्ता: प.पू.अपूर्व चैतन्य ऋद्धिधारी १०८ श्री वीरसागरजी महाराज प्रवचन Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcU7DHuMQRBzDkoYo_Iw9AU</a> *?ध्यान लिंक?# DhyanLink?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQewKzIk7mCt8tNptVLD5hyI</a> *?प्रवचनसार &amp; पंचास्तिकाय Link ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQc4noh9Qpa3-U6oaLnjGT31</a> *?समयसार प्रवचन. Link?* <a href="https://youtube.com/playlist?list=" target="_blank">https://youtube.com/playlist?list=</a> ? *ASHTSAHASTRI? :* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQcUTIrLVVRabJ3BT8pzyBW0</a> *?भक्ति अमृत धारा ?* <a href="https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ" target="_blank">https://www.youtube.com/playlist?list=PLDzcmDTVXTQd20qcpC23ahk_OfsjnYQjZ</a> 2026-02-17 07:10:27
6844 40449722 VJS9 श्री नेमि गिरनार यात्रा 2026 *✊ जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) प्रकोष्ठ, विश्व जैन संगठन ?* जैन समाज के सभी जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) साधर्मी बंधु जन को सादर जय जिनेन्द्र ?? *सर्व विदित है कि,* जैन समाज एक प्रबुद्ध वर्ग है और उसमें जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सदैव अपने प्रोफेशन के माध्यम से समाज के लिए भी कार्य करते रहते हैं। यह सबके मानस में है कि आज जैन समाज अनेकों कानूनी विसंगतियों का सामना कर रहा अतः इस प्रकोष्ठ की आवश्यकता महसूस हुई। *मुख्य तो सभी जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) को एक मँच पर लाना है और अन्य,* *▫️ इस फील्ड में करियर बनाने के इच्छुक जैन युवाओं को करियर काउंसलिंग* *▫️ समाज के मुद्दों जैसे तीर्थ रक्षा आदि में कानूनी सलाह लेना* *▫️ समाज संबंधी विषयों पर और न्यायिक प्रक्रिया में आपसी सहयोग* *▫️ विवादित मामलों में सलाह* *▫️धर्म, तीर्थ, समाज की रक्षा हेतु कानूनी जागरूकता* ▪️अतः आपसे निवेदन है कि, यदि *आप खुद जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) हैं* तो नीचे दी गई जानकारी भरकर संलग्न नंबर पर भेज दें अथवा *आपके परिचय में कोई जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) बंधु हों* तो उन तक यह पोस्ट भेज दीजिए। *ताकि उनको जैन अधिवक्ता (एडवोकेट्स) प्रकोष्ठ विश्व जैन संगठन वॉट्सएप ग्रुप* से जोड़ा जा सके आपकी अति कृपा होगी ?। *?नाम -* *?प ता -* *? क्षेत्र (किस प्रकार के मामलों में विशेषज्ञता है)* *? मोबाइल नंबर (व्हाट्सएप) -* ▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️ *?ऊपर दी गई जानकारी भरकर इस नंबर पर भेज दीजिए ?* ? *वॉट्सएप नंबर - 7496838795* Follow the ? जैन इकोसिस्टम (Jain Ecosystem) ? channel on WhatsApp: <a href="https://whatsapp.com/channel/0029VbBUKYtBVJlC8SdeP60f" target="_blank">https://whatsapp.com/channel/0029VbBUKYtBVJlC8SdeP60f</a> 2026-02-17 07:10:27
6842 40449665 2.0 Jain Dharam ? जैन धर्म ?????????? *?॥ श्री तीर्थंकराय नम ॥?* ?????????? *? प्रथमानुयोग* *? सोलह कारण भावना– 77* *? 12.बहुश्रुत भक्ती भावना ?* ======================= <a href="https://quizzory.in/id/69929e90ff1069b7b5ad4002" target="_blank">https://quizzory.in/id/69929e90ff1069b7b5ad4002</a> *इस लिंक के द्वारा कथा में आए प्रश्नों को 24 घंटे मैं हल किया जा सकता है* ‼️‼️‼️‼️‼️‼️‼️‼️‼️‼️ *यम मुनि की कथा* ओष्ट्र (उष्ट्र) देश के अन्तर्गत धर्मनगर में यम नाम का राजा राज्य करता था। वह समस्त शास्त्रों का ज्ञाता था। उसकी पत्नी का नाम धनमती था। इनके गर्दभ नाम का एक पुत्र तथा कोणिका नाम की पुत्री थी। उसके पाँच सौ पुत्र और भी थे जो अन्य रानियों से उत्पन्न हुए थे। उस राजा के दीर्घ नाम का मंत्री था। किसी ज्योतिषि ने राजा को यह सूचना दी थी कि जो कोई इस कोणिका के साथ विवाह करेगा वह समस्त पृथ्वी का स्वामी होगा। इसलिए उसने कोणिका को तलघर के भीतर गुप्त रूप से रख रखा था। उसे परिचर्या कराने वाली सब स्त्रियों को वैसी सूचना भी कर दी थी। इसलिए वे कभी किसी से कोणिका की बात को नहीं कहती थीं। एक दिन वहाँ पाँच सौ मुनियों के साथ सुधर्म मुनि आये। उनको वंदना के निमित्त जाते हुए जनसमूह को देखकर यम राजा के हृदय में अभिमान का प्रादुर्भाव हुआ। मुनियोंकी निन्दा करता हुआ उनके समीप में गया। मुनियों के ज्ञान की निन्दा करने के कारण उसकी बुद्धि उसी समय नष्ट हो गई। तब अभिमान से रहित हुए उसने मुनियों को प्रणाम करके उनसे धर्मश्रवण किया। तत्पश्चात वह गर्दभ पुत्र को राज्य देकर स्वयं पाँच सौ पुत्रों के साथ मुनि हो गया। उसके वे सब पुत्र आगम के पारगामी हो गये। परन्तु यम मुनि को पंचनमस्कार मन्त्र मात्र भी नहीं आता था। इसके लिये गुरू ने उसकी निन्दा की। तब वह लज्जित होता हुआ गुरू से पूछकर तीर्थो की वंदना करने के लिये अकेला चला गया। मार्ग में उसने एक जौ के खेत में गधे को रथ से जाते हुए एक मनुष्य को देखा। उसके गधे जै के खाने के लिये रथ को ले जाते थे और फिर छोड़ देते थे। उनको ऐसा करते हुए देखकर यम मुनि ने यह खण्ड श्लोक रचा— “कड्ढसि पुण णिक्खेवसि रे गद्दहा जवं पत्थेसि खादिदुं ॥ अर्थात हे गधो! तुम रथ को खींचते हो और फिर रूक जाते हो, इससे ज्ञात होता है कि तुम जौ के खाने की प्रार्थना करते हो। दूसरे समय मार्ग में जाते हुए उनने लोगों के खेलते हुए बच्चों को देखा। उनकी गिल्ली एक छेद में जा पड़ी थी। वह उन्हें नहीं दिख रही थी। इसलिए वे इधर उधर दौड़ रहे थे। यम मुनि ने उनको देखकर यह खण्ड श्लोक बनाया— “ अण्णत्थ किं पलो वह तुह्रे एत्थिमि निबुडिया छिद्दे अच्छई कोणिआ ॥२॥” अर्थात हे मूर्ख बालको! तुम अन्यत्र क्यों खोज रहे हो, तुम्हारी गिल्ली इस छेद के भीतर स्थित है। तत्पश्चात एक बार उनने एक भयभीत मेढ़क को जहाँ पर सर्प छुपकर बैठा हुआ था। उस कमलिनी पत्र की ओर जाते हुए देखकर यह खण्ड श्लोक बनाया— “ अम्हादो नत्थि भयं दीहादो दिसदे भयं तुज्झ ॥३॥ अर्थात तुम्हें हमसे भय नहीं है, किन्तु दीर्घ से—लंबे सर्प से—भय दिखता है। इन तीन श्लोकों के द्वारा स्वाध्याय एवं वन्दना आदि कर्म को करने वाले वह यम मुनि विहार करते हुए धर्मनगर के उद्यान में जाकर कायोत्सर्ग में स्थित हुए। उसे सुनकर दीर्घ मंत्री और राजकुमार गर्दभ को उन से भय हुआ। इसीलिये वे दोनों रात में उनको मारने के लिये गये। दीर्घ मंत्री उनके पीछे स्थित होकर उन्हें मारने के लिये बार बार तलवार को खींच रहा था। परन्तु व्रती के वध से भयभीत होकर वह उनकी हत्या नहीं कर रहा था। उधर गर्दभ की भी वही अवस्था हो रही थी। इसी समय मुनि ने स्वाध्याय को करते हुए उक्त खण्ड श्लोकों में प्रथम खण्ड श्लोक का पाठ किया। उसे सुनकर और उससे यह अभिप्राय निकालकर कि ‘हे गर्दभ क्यों बार बार तलवार खींचता है और रखता है’ गर्दभ ने दीर्घ से कहा कि मुनि ने हम दोनों को पहचान लिया है। तत्पश्चात मुनि ने दूसरे खण्ड श्लोक का पाठ किया। उसे सुनकर और उससे यह भाव निकालकर कि ‘अन्यत्र क्या देखते हो, कोणिका तो तलघर में स्थित है’ गर्दभ बोला कि हे दीर्घ! मुनि राज्य के लिये नहीं आये हैं, किन्तु कोणिका को कुछ कहने के लिये आये हैं। फिर उसने तीसरे खण्ड श्लोक का पाठ किया। उसे सुनकर और उसका यह अभिप्राय निकालकर कि ‘तुम्हें हमसे भय नहीं, किन्तु दीर्घ मंत्री से भय है’ गर्दभ ने सोचा कि यह दुष्ट दीर्घ मुझे मारना चाहता है। मुनि स्नेहवश मुझे प्रबुद्ध करने के लिये आये हैं। इससे वे दोनों ही मुनि को नमस्कार करके और उनसे धर्म श्रवण करके श्रावक हो गये। यम मुनि भी अत्यन्त विरक्त हो जाने से विशिष्ट चारित्र के साथ यथार्थ मुनि स्वरूप को प्राप्त होकर सात ऋद्धियों के धारक हुए। अन्त में उन्होंने मोक्ष पद को भी प्राप्त किया। इस प्रकार के श्लोक से भी जब यम मुनि सात ऋद्धियों के धारक होकर मुक्ति को प्राप्त हुए हैं तब दूसरा विशिष्ट श्लोक का धारक क्या न होगा? वह तो अनेकोनेक ऋद्धियों का धारक होकर मुक्त होगा ही । ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *✍️ संकलन* *?️ पं. मुकेश शास्त्री* *? सुसनेर* *? 9425935221* *? 1 7.02.2026* ?????????? 2026-02-17 07:10:08
6841 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ???????? ꪖꪀ?ꪖ?ꪑꪖꪀ? ꪊ᭙ꪖ ᥴꫝ ?︎?︎?︎?︎?︎?︎?︎?︎?︎ ?︎?︎?︎?︎?︎ ????????? 17.2.2026 2026-02-17 07:09:34