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77921 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा <a href="https://youtu.be/BeubAnEfyuI?si=wSXSNAaWLQVfHXFq" target="_blank">https://youtu.be/BeubAnEfyuI?si=wSXSNAaWLQVfHXFq</a> ?जैनम जयति शासनम? ???????? ?मुझे गर्व है कि में जैन हूं? ???????✍️ ?में जैन हूं, हिन्दू नहीं- तीर्थंकर मेरे आराध्य देव है। मेरी दृढ़ आस्था मेरे जैन धर्म के प्रति है यह वो धर्म है जो मुझे कषायों से मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त करता है और आत्मकल्याण की राह को बताता है जहां कोई आरंभ सारंभ नहीं है न कोई दिखावा और आडंबर है मात्र कर्मो की निर्जरा करने का माध्यम है। जैन धर्म अहिंसा परमो धर्म तथा अपरिग्रह के सिद्धांत को मानता है, राग द्वेष से मुक्त जीवन जीने की कला को बताता है, शुद्ध शाकाहारी धर्म है, जहां हिंसा का कोई स्थान नहीं है तीर्थंकर भगवान महावीर ने बताया कि यह आडंबर और आरंभ सारंभ दुःख उत्पत्ति का मूल कारण है। जैन धर्म हिंसा मुक्त जीवन जीने की कला को बताता है जो जीवन को सुखमय बनाता है। सम्यक दृष्टि जीव बनने के लिए हमें अपने धर्म और तीर्थंकरों के प्रति दृढ़ आस्था रखनी चाहिए। जड़ और चेतन्य के भेद को समझकर आडंबर, आरंभ- सारंभ आदी से दूर रहना चाहिए ऐसा हमें हमारे तीर्थंकरों ने बताया है। ?️सम्यक्ति देव ही हमारे देव है अन्य कोई हमारे कल्याणकारी देव नहीं हो सकते। हमें इधर उधर भटकने के बजाय ज्यादा उचित होगा की हम अपने तीर्थंकरों के प्रति दृढ़ आस्था रखें और अपने जीवन का कल्याण करें।।*? ?जय महावीर?? ??????? ?कैलाश राज सिंघवी (जैन)? ?एक पथ-एक पंथ? मोबाईल: 94141 29161 जोधपुर(राजस्थान) ??????? 2026-04-11 18:45:04
77922 40449678 1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा <a href="https://youtu.be/BeubAnEfyuI?si=wSXSNAaWLQVfHXFq" target="_blank">https://youtu.be/BeubAnEfyuI?si=wSXSNAaWLQVfHXFq</a> ?जैनम जयति शासनम? ???????? ?मुझे गर्व है कि में जैन हूं? ???????✍️ ?में जैन हूं, हिन्दू नहीं- तीर्थंकर मेरे आराध्य देव है। मेरी दृढ़ आस्था मेरे जैन धर्म के प्रति है यह वो धर्म है जो मुझे कषायों से मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त करता है और आत्मकल्याण की राह को बताता है जहां कोई आरंभ सारंभ नहीं है न कोई दिखावा और आडंबर है मात्र कर्मो की निर्जरा करने का माध्यम है। जैन धर्म अहिंसा परमो धर्म तथा अपरिग्रह के सिद्धांत को मानता है, राग द्वेष से मुक्त जीवन जीने की कला को बताता है, शुद्ध शाकाहारी धर्म है, जहां हिंसा का कोई स्थान नहीं है तीर्थंकर भगवान महावीर ने बताया कि यह आडंबर और आरंभ सारंभ दुःख उत्पत्ति का मूल कारण है। जैन धर्म हिंसा मुक्त जीवन जीने की कला को बताता है जो जीवन को सुखमय बनाता है। सम्यक दृष्टि जीव बनने के लिए हमें अपने धर्म और तीर्थंकरों के प्रति दृढ़ आस्था रखनी चाहिए। जड़ और चेतन्य के भेद को समझकर आडंबर, आरंभ- सारंभ आदी से दूर रहना चाहिए ऐसा हमें हमारे तीर्थंकरों ने बताया है। ?️सम्यक्ति देव ही हमारे देव है अन्य कोई हमारे कल्याणकारी देव नहीं हो सकते। हमें इधर उधर भटकने के बजाय ज्यादा उचित होगा की हम अपने तीर्थंकरों के प्रति दृढ़ आस्था रखें और अपने जीवन का कल्याण करें।।*? ?जय महावीर?? ??????? ?कैलाश राज सिंघवी (जैन)? ?एक पथ-एक पंथ? मोबाईल: 94141 29161 जोधपुर(राजस्थान) ??????? 2026-04-11 18:45:04
77920 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:41:21
77919 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:41:20
77917 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:39:24
77918 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:39:24
77915 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:39:22
77916 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-04-11 18:39:22
77914 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 18:38:49
77913 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-04-11 18:38:48