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9196 40449666 निर्यापक समय सागर जी भक्त ?जय जिनेन्द्र देव की ? ?‍?जय जय गुरुदेव त्रिवार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ?‍? जीव जिस समय राग-द्वेष के भाव करे उसी समय उसे उसके फल का - आकुलता का - वेदन होता है. इसिलिए कर्तापना और भोक्तापना दोनों एक साथ ही है. लोग बाह्य दृष्टि से देखते हैं कि इसने पाप किये हैं तो यह नरक में कब जायेगा? यह झूठ बोलता है तो इसकी जीभ क्यों तुरंत नहीं कट जाती? परन्तु भाई ! जिस समय वह हिंसा तथा झूठ आदि के भाव करता है उसी समय उसके भावमें आकुलता का वेदन होता है; आकुलता का वेदन है वह अवगुण का ही वेदन है. अपन... <a href="https://primetrace.com/group/7374/post/1179674302?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING" target="_blank">https://primetrace.com/group/7374/post/1179674302?utm_source=android_post_share_web&amp;referral_code=JBHJP&amp;utm_screen=post_share&amp;utm_referrer_state=PENDING</a> 2026-02-18 18:31:37
9195 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-18 18:29:31
9194 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-18 18:29:29
9193 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-18 18:29:27
9192 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? 2026-02-18 18:29:21
9191 40449664 ?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? *?? हम सबके आराध्य जिनसूर्य आचार्यश्रेष्ठ श्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों मे पुण्योदय विद्यापथ परिवार का बारम्बार नमोस्तु* 2026-02-18 18:29:14
9190 40449687 अध्यात्मयोगी <a href="https://youtu.be/r20xgonK0bM" target="_blank">https://youtu.be/r20xgonK0bM</a> 2026-02-18 18:27:49
9189 40449660 Acharya PulakSagarji 07 प्रातः स्मरणीय, धरती के देवता, मेरे आराध्य, मेरे भगवान संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस पर गुरुदेव के चरणों मे कोटिशः नमन वंदन ???????? 2026-02-18 18:26:54
9188 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी ?? *प्रेरक वाणी??* पहला व्यक्ति रोग के अनुकूल निदान न मिलने पर निराश रहता है। दूसरा रोगी व्यक्ति उचित उपचार मिलने को अपना सौभाग्य मानता है। लेकिन तीसरा वह व्यक्ति है जिसे जीवन में कभी उपचार की जरूरत ही महसूस नहीं होती, वास्तव में वही व्यक्ति भाग्यवान है। रोग होने के पश्चात बेहतर इलाज मिलने की अपेक्षा श्रेष्ठतम होगा, "जीवनपर्यंत स्वस्थ रहे"। ऐसे ही व्यक्ति जीवन में आशा और निराशा से मुक्त प्रसन्नचित रहते हैं। जय जिनेंद्र*? 2026-02-18 18:24:29
9187 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी <a href="https://www.youtube.com/live/EjU5ISJVcBE?si=GW4URFquJBmRX3hs" target="_blank">https://www.youtube.com/live/EjU5ISJVcBE?si=GW4URFquJBmRX3hs</a> 2026-02-18 18:22:36