| ID |
Chat ID
|
Chat Name
|
Sender
|
Phone
|
Message
|
Status
|
Date |
View |
| 330 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
ॐ ह्रीं श्रीं श्री आदिनाथ जिनेन्द्राय नमः |
|
2026-02-12 09:34:55 |
|
| 329 |
40449660 |
Acharya PulakSagarji 07 |
|
|
*आलाप पद्धति - 10*
*आर्यिकाश्री सुदृढ़मती माताजी*
?:~ *Aariyka Shree Sudradhmati Mataji*
? Watch Now on ⬇️
? *YouTube*
<a href="https://youtu.be/s8sswqC2Ug8?si=Ah4wjvgbwErbUwZW" target="_blank">https://youtu.be/s8sswqC2Ug8?si=Ah4wjvgbwErbUwZW</a>
? If you feel inspired, *SHARE IT* with others and spread the light of Dharma! ?
? Let The Day Begin With Dharma & positivity |
|
2026-02-12 09:32:37 |
|
| 328 |
40449678 |
1)जैन गुरुकुल से एकता, धर्म और समाज का उत्थान और तीर्थ रक्षा |
|
|
जय जिनेंद्र प्रणाम, *परमपिता श्री महावीर स्वामी एवं सद्गुरु देव की कृपा से साधुजी-साध्वीजी भगवंतों, मुमुक्षुओं, जैन संघों एवं संस्थाओं की सेवा के लिए बनाया गया यह जिनशासन वैयावच्च ग्रुप उनके अति आवश्यक मैसेज जैन समाज को वायरल करने के लिए, उनके उपयोग की वस्तुएं, औषधियां, पुस्तकें एवं अन्य वस्तुएं यहां से वहां भेजने के लिए तत्पर है। उन्हें उनकी आवश्यकताओं के अनुसार कोई भी वस्तु अथवा सेवा उपलब्ध कराने के लिए समर्पित इस समूह का नाम जिनशासन वैयावच्च ग्रुप है।
<a href="https://chat.whatsapp.com/LHWPmSVA5ffG1rgK91BQbJ" target="_blank">https://chat.whatsapp.com/LHWPmSVA5ffG1rgK91BQbJ</a>
देवगुरु की कृपा और आप सभी के सहयोग से यह ग्रुप पिछले तीन वर्षों से ज्यादा समय से सेवा कर रहा है। अब इस जिन शासन वैयावच्च 1,2,3,4 और 5 ग्रुपो में लगभग 9200 से ज्यादा सदस्य है और निम्नलिखित जिनशासन के कार्य किए जाते हैं, इसलिए सभी ग्रुप सदस्यों से अनुरोध है कि वे इसका ध्यान रखें और इन कार्यों के लिए ग्रुप के सक्रिय एडमिनो को व्हाट्सएप करें। कृपया जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, फोन न करें। जिन शासन के सभी अंगों के निम्नलिखित कार्य इस ग्रुप के माध्यम से किए जाएंगे -
(1) चिकित्सा आपातकाल (स्वास्थ्य आपातकाल) में, श्रावक श्राविकाओं के भी दवा या उपचार उपकरण की भेजने के कार्य (2) यदि कोई श्रावक श्राविका गुम हो गया है तो हम उनका संदेश ग्रुप में पोस्ट करेंगे।
(3) मुमुक्षुओ जिनका दीक्षा मुहूर्त निकल चुका है तथा साधु साध्वी जी भगवन्तो के सांसारिक परिवार जनों जैसे माता-पिता पति-पत्नी भाई-बहन पुत्र पुत्री का कोई भी कार्य इस ग्रुप के माध्यम से किया जाएगा।
(4) किसी भी जैन संघ, संस्था संगठन, ट्रस्ट के आवश्यक कार्य ग्रुप में पोस्ट किये जायेंगे।
5) यदि किसी गृहस्थ को केवल जिनशासन के कार्यो के लिए रेलवे टिकट पर अतिरिक्त सीट की आवश्यकता है, तो वह ग्रुप एडमिन को सूचित कर सकता है और ग्रुप एडमिन उस संदेश को ग्रुप में पोस्ट कर देगा।
6) चारों संप्रदायों में से किसी भी संप्रदाय के परम पूज्य साधु- साध्वीजी भगवंतो एवं वैयावच्च संबंधित कोई भी कार्य होगा तो उसे ग्रुप में डालेंगे।
(7) जैन समाज को कोई अति आवश्यक संदेश देना हो तो वह मैसेज वायरल किया जाएगा। (सभी ग्रुपों में भेजा जाएगा)
यदि ग्रुप के किसी सदस्य के पास इस ग्रुप से संबंधित कोई सुझाव या शिकायत है, तो उनसे अनुरोध है कि वे इसे ग्रुप के किसी भी सक्रिय एडमिन को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजें। यदि कोई भी इस ग्रुप का एडमिन बनना चाहता है तो उनसे अनुरोध है कि वे उनके द्वारा जिनशासन की अब तक की गतिविधियों की जानकारी तथा अपना सम्पूर्ण विवरण ग्रुप के एडमिन को सिर्फ व्हाट्सएप्प द्वारा 9322733338 या 9892566097 पर भेजें।
*प्रणाम जिनशासन वैयावच्च ग्रुप के जो सदस्य 1,2,3,4और 5 जिनशासन वैयावच्च ग्रुप में नहीं जुड़े हुए हैं वे ही नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करके चौथे वैयावच्च ग्रुप में जुडे। तथा सभी श्रावक श्राविकाओ से अनुरोध है कि नीचे दी गई इस लिंक को अपने रिश्तेदारों, कल्याण मित्रों और जैन ग्रुपो (समूहों) को भेजें। कोई भी ग्रुप के सदस्य इस कम्युनिटी ग्रुप मैं अन्य जैन ग्रुपो या सदस्यों को जोड़ सकते है, धन्यवाद।* |
|
2026-02-12 09:31:24 |
|
| 327 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
इस वीडियो को एक बार जरूर देखें और ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए |
|
2026-02-12 09:29:42 |
|
| 326 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*?जिंदगी का भरोसा नहीं। पर तैयारी हमारे हाथ में हैं। समझदार लोग इंतजार नहीं करते। पहले सुरक्षा चुनते है। आज ही मुझे कॉल करें। आपका बीमा सलाहकार...???✍?*
Harshit Jain
7067855096 |
|
2026-02-12 09:28:51 |
|
| 325 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
|
|
2026-02-12 09:28:50 |
|
| 324 |
40449703 |
गणिनी आर्यिका जिनदेवी माँ |
|
|
Wandami mataji??? |
|
2026-02-12 09:28:12 |
|
| 323 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
लो अब रोटी का भी कैप्सूल आ गया? |
|
2026-02-12 09:26:39 |
|
| 322 |
49028270 |
1.श्री सम्मेद शिखर जी |
|
|
*दूसरों के दोषों पर*
*पीएचडी करने से*
*_बेहतर है कि हम खुद_*
*_की मानसिकता पर_*
*_केवल ग्रेजुएशन ही कर लें_*
*“परिस्थिति कितनी भी, विकट क्यों न हो…अपनों को हराने के लिए परायों का सहारा कभी नहीं लेना चाहिए!”*
*जय जिनेंद्र??????*
*आपका हर पल मंगलमय हो???* |
|
2026-02-12 09:26:32 |
|
| 321 |
40449750 |
107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
|
|
_*याचना तो दूर, संकेत तक नहीं देते :-*_
...................................................................
कुण्डलपुर, (दमोह, मध्यप्रदेश) मई २०१६ का प्रसंग है। एक दिन स्वाध्याय करते-करते आचार्यश्रीजी ने पेंसिल उठाई, उसे देखा और रख दिया। यह दृश्य सामने कुछ दूरी पर आचार्यश्रीजी से चर्चा करने के भाव से प्रतीक्षा कर रहीं दो ब्रह्मचारिणी बहनों ने देखा। उन्हें समझते देर न लगी, उन्होंने तुरंत जाकर संघस्थ मुनिश्रीजी को बताया कि संभवतः गुरुजी कुछ लिखना चाह रहे हैं, पर पेंसिल व्यवस्थित (नोंक) न होने से उन्होंने लिखा नहीं। मुनिश्री ने तत्काल ही पेंसिल लाकर गुरुजी को दे दी। आचार्यश्रीजी ने उन्हें बड़े ही आश्चर्य से देखा कि इन्हें कैसे ज्ञात हुआ ? जब उनकी दृष्टि सामने कुछ दूरी पर प्रतीक्षारत उन बहनों पर गई, तब वह समझ गए और मुस्करा दिए। बाद में उन मुनिश्री ने बताया कि आचार्यश्रीजी कभी भी किसी वस्तु के लिए इशारा भी नहीं करते हैं। संघस्थ ज्येष्ठ साधु प्राय:कर गुरुजी का बाजौटा (चौका) व्यवस्थित कर देते हैं। इसके बावजूद भी कई बार तीन-तीन, चार-चार दिन तक गुरुजी का लेखन कार्य रुका रहता।
उन्होंने बताया एक बार तीन-चार दिन से गुरुजी का लेखन कार्य रुका हुआ देखकर सहजता से किसी ने पूछ लिया, “आचार्यश्रीजी! क्या आपका लेखन कार्य पूर्ण हो गया ?' आचार्यश्रीजी ने न तो ‘हाँ' कहा और न ही 'ना' । उपदेशात्मक शैली में बोले- ‘योग्य उपादान और योग्य निमित्त के मिलने पर कार्य की सिद्धि होती है। निमित्त के अभाव में नैमित्तिक का भी अभाव हो जाता है। प्रत्येक कार्य का कारण होता है। कारण मिलने पर कार्य सिद्ध होता है। बाद में ज्ञात हुआ कि आचार्यश्रीजी के बाजौटे पर पेंसिल नहीं रखी थी। जब पेंसिल साफ़ करके उनके चौके पर रख दी।| तब लेखन कार्य पुनः प्रारंभ हो गया। धन्य है। गुरुवर की धैर्य एवं गंभीरता की पराकाष्ठा। लेखन कार्य रोक दिया, पर आगम की आज्ञा, अचौर्य महाव्रत की भावना रूप अयाचकवृत्ति का पालन पूर्ण निष्ठा से किया |
??? |
|
2026-02-12 09:25:47 |
|