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ID Chat ID Chat Name Sender Phone Message Status Date View
245801 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2644)* ***************************** *शुक्रवार, 19 जून, 2026* *ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी..* *श्रुत पंचमी / ज्ञान पंचमी..* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (भाग - 2) """""""""""""""""" प.पू.आ.श्री. धरसेनाचार्यजी और प.पू. भूतबलीजी और प.पू. पुष्पदंतजी की वजह से ही आज हम जिनवाणी का अध्ययन कर पाए हैं। जिनवाणी को *षट्खंडागम* के रूप में लिखने की वजह से ही आज जिनवाणी का ज्ञान का यह शानदार भंडार हमें उपलब्ध हो पाया है। *जिनवाणी 11 अंगों और 14 पूर्वों जितनी विशाल है और ( उपलब्ध जानकारी के अनुसार ) कुल पादों / सूत्रों की संख्या -* *=>11 अंग - 1,12,83,58,005,* *=>14 पूर्व - 95,50,00,005* * *=> कुल 2 अरब 8 करोड़ 33 लाख 58 हज़ार 010* बहुत बड़ी बात है!! *हमारी आध्यात्मिक स्थिरता (spiritual dtability), मानसिक, भावनात्मक संतुलन (psychological, emotional stability) और उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, पीठ, गर्दन, कमर दर्द आदि के साथ-साथ शरीर, मन / मनोदैहिक रोग नियंत्रण, विनियमन (disease controll) के लिए, आइए हम हर दिन कुछ समय इस अनमोल आगम का अध्ययन और चिंतन करें। क्योंकि, शास्त्रों में कहा गया है कि,* *॥ स्वाध्यायः परमं तपः॥* *( क्रमशः) ( ता. 20/06/2026 )* *--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9907/आ.3312) 2026-06-20 05:57:58
245800 47534159 Maharstra (kartick) *आत्मचिंतन - (नं. 2644)* ***************************** *शुक्रवार, 19 जून, 2026* *ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी..* *श्रुत पंचमी / ज्ञान पंचमी..* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (भाग - 2) """""""""""""""""" प.पू.आ.श्री. धरसेनाचार्यजी और प.पू. भूतबलीजी और प.पू. पुष्पदंतजी की वजह से ही आज हम जिनवाणी का अध्ययन कर पाए हैं। जिनवाणी को *षट्खंडागम* के रूप में लिखने की वजह से ही आज जिनवाणी का ज्ञान का यह शानदार भंडार हमें उपलब्ध हो पाया है। *जिनवाणी 11 अंगों और 14 पूर्वों जितनी विशाल है और ( उपलब्ध जानकारी के अनुसार ) कुल पादों / सूत्रों की संख्या -* *=>11 अंग - 1,12,83,58,005,* *=>14 पूर्व - 95,50,00,005* * *=> कुल 2 अरब 8 करोड़ 33 लाख 58 हज़ार 010* बहुत बड़ी बात है!! *हमारी आध्यात्मिक स्थिरता (spiritual dtability), मानसिक, भावनात्मक संतुलन (psychological, emotional stability) और उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, पीठ, गर्दन, कमर दर्द आदि के साथ-साथ शरीर, मन / मनोदैहिक रोग नियंत्रण, विनियमन (disease controll) के लिए, आइए हम हर दिन कुछ समय इस अनमोल आगम का अध्ययन और चिंतन करें। क्योंकि, शास्त्रों में कहा गया है कि,* *॥ स्वाध्यायः परमं तपः॥* *( क्रमशः) ( ता. 20/06/2026 )* *--डॉ. अजीत जे. पाटिल जैन, सांगली, महाराष्ट्र* ??? (कु.9907/आ.3312) 2026-06-20 05:57:57
245798 50889696 श्री सर्वतोभद्र प्रतिष्ठान नवग्रह तीर्थ समिति मंंगसुळी 2026-06-20 05:57:30
245799 50889696 श्री सर्वतोभद्र प्रतिष्ठान नवग्रह तीर्थ समिति मंंगसुळी 2026-06-20 05:57:30
245797 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-06-20 05:56:39
245796 40449660 Acharya PulakSagarji 07 2026-06-20 05:56:38
245794 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-20 05:56:37
245795 49028270 1.श्री सम्मेद शिखर जी 2026-06-20 05:56:37
245792 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप 2026-06-20 05:52:40
245793 40449682 तन्मय सागर प्रभावना ग्रुप 2026-06-20 05:52:40
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