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?सम्पूर्ण भारतवर्ष जैन मुनि विहार एवं माता जी विहार समूह ?और गणमान्यगण? |
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2026-02-19 16:15:00 |
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संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी |
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स vandami mataji vandami mataji vandami mataji Sammed shikhaji koti koti pranam ♥?❤sabhi ♥?❤dataronko namostu namostu yatriyonko suhbh kamnaye jay ♥❤jinedra ♥❤ji ♥?? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-02-19 16:09:38 |
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आ,गुरु विद्यासागरजी कहां विराजमान है |
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स vandami mataji vandami mataji vandami mataji Sammed shikhaji koti koti pranam ♥?❤sabhi ♥?❤dataronko namostu namostu yatriyonko suhbh kamnaye jay ♥❤jinedra ♥❤ji ♥?? विद्या पूर्ण धर्म प्रभावना का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App
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2026-02-19 16:09:33 |
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तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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<a href="https://youtube.com/shorts/VhB0I0MUu0g?si=Khaj9usScAd7HeFk" target="_blank">https://youtube.com/shorts/VhB0I0MUu0g?si=Khaj9usScAd7HeFk</a> |
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2026-02-19 16:04:25 |
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सकल जैन महिला मंडळ फलटण |
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2026-02-19 16:01:26 |
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तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ जन आंदोलन |
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विशेष सूचना
*कबूल नगर जैन मंदिर से एक बस तिजारा जी के लिए दिनाक 22 February
सुबह 6:00 बजे जैनको फोटो स्टेट कबूल नगर जैन मंदिर कबूल नगर से जाएगी जिसका किराया मात्र 150
पर सवारी है किराया एडवांस देकर अपनी सीट बुक कराए ????????????
RAKESH JAIN, KABOOL NAGAR
बस बुकिंग *संपर्क सूत्र =ARUN JAIN
PHONE NO, 9350121025 |
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2026-02-19 15:59:13 |
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47671409 |
गुरु माँ सुनयमती परिवार 1 |
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*णमोकार मंत्र सुनियेगा ! आनंद आएगा* |
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2026-02-19 15:53:06 |
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1.श्री सम्मेद शिखर जी |
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19/02/26
आज की आहार चर्या
जुगल पढ़घान का सौभाग्य
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परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री १०८ समतासागर जी महाराज जी ससंघ की आज की आहारचर्या
आहार बिहार कराने वाली ब्रह्मचारी बहनों के चौके में धर्म नगरी अयोध्या में आहारचर्या संपन्न हुई
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? समता सरोवर समूह?
<a href="https://linktr.ee/samtasarovar" target="_blank">https://linktr.ee/samtasarovar</a> |
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2026-02-19 15:53:05 |
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47671409 |
गुरु माँ सुनयमती परिवार 1 |
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2026-02-19 15:52:57 |
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107 ? ए बी जैन न्यूज़ ◆ जैन कम्युनिटी ग्रुप |
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????️??️????
_दीक्षा प्रदाता आचार्यश्रीजी एवं उनके करकमलों से सम्पन्न हुई ऐतिहासिक दीक्षाएं........_
_पांच सौ से भी अधिक मुनि, एलक, आर्यिका, क्षुल्लक, क्षुल्लिका दीक्षा प्रदाता आचार्यश्रीजी के सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणको में एवं विभिन्न अवसरों पर होने वाली संभावित दीक्षाओ के, अनुमानों के, अपुष्ट समाचार सुनकर, सैकड़ों ब्रम्हचारी भैया बहने एवं हजारों गुरुभक्त गुरुचरणों में डेरा डालने लगते थे....._ _लेकिन अनेको बार सारे अनुमान गलत निकल जाते थे_
_और कई बार ऐसे भी अवसर आये जब दीक्षार्थियों को गुरुदेव द्वारा एक दिन पहले केशलोंच एवं उपवास के संकेत प्राप्त हुए और आचार्यश्रीजी के पावन कर कमलों से उनकी दीक्षाएं भी संपन्न हुई_
_अब देखो न, द्रोणगिरि में 8 मार्च 1980, के दिन किसे सोचा था कि आज बुंदेलखंड में विराजे युवाचार्य आचार्यश्रीजी के संघ में प्रवेश हेतु प्रथम बाल ब्रम्हचारी, युवा मुनि दीक्षा होगी, इस दिन प्रातः पर्वत पर वंदना के समय कुछ ही ब्रम्हचारी भैया दीदियों और कुछ श्रावकों को ही आचार्यश्री के करकमलों से प्रथम मुनिश्री समयसागर जी (वर्तमान में नवाचार्यश्री समयसागरजी महाराज) की प्रथम मुनि दीक्षा देखने का महापुण्य मिला था...._
_इसके बाद तो आचार्यश्रीजी के करकमलों से दीक्षाओं का अनवरत क्रम आरंभ हो गया और अब तो कम से कम दो से अधिक दीक्षाएं और 24 से अधिक मुनि दीक्षाओं के दर्शन होने लगे और बड़े बाबा के नए दरबार कुंडलपुर में गुरुदेव के करकमलों से 57 आर्यिका दीक्षा का भव्य कीर्तिमान भी बना था_
_कीर्तिमानों के उत्तुंग हिमालय, यदि चाहते तो उनसे व्रत लिए दीक्षा की प्रतीक्षा में वाट जोहते सैकड़ों उच्च शिक्षित ब्रह्मचारी भैया बहने आस लगाए बैठे थे गुरुदेव का मन होता तो, एक बार में ही 1008 दीक्षाएँ दे सकते थे_
_लेकिन गुरुदेव को संख्या बढ़ा कर संघ की वृद्धि करना स्वीकार नहीं था और सबसे बड़ी बात, उनके मन की थाह पाना इतना आसान भला कब था_
_सोचे जरा..... यदि आचार्यश्रीजी यदि बड़े बाबा के दरबार में एक साथ 1008 दीक्षा देते तो वह दृश्य कितना अद्भुत होता...._
_सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरि में प्रथम एकल मुनि दीक्षा के बाद बरसों बाद, आचार्यश्रीजी द्वारा अतिशयकारी, चैतन्य चमत्कारी, अंतरिक्ष पार्श्वनाथ भगवान की साक्षी में मुनि एवं क्षुल्लक दीक्षाएं सम्पन्न हुईं_
_लेकिन इस दीक्षा समारोह की मुख्य विशेषता यह थी कि एक मात्र मुनि दीक्षा लेने वाले अष्टगे परिवार के लगभग 80 वर्षीय ज्येष्ठ भ्राता थे और गुरुमुख से उन्हें नूतन नाम मुनिश्री उत्कृष्ट सागरजी महाराज मिला था शेष सभी क्षुल्लक दीक्षाये हुई थी_
_और इस तरह आचार्यश्रीजी का पूरा संघ 'समय ' के साथ साथ पूर्ण 'योग ' पूर्वक 'उत्कृष्ट ' बन गया_
_एक सुखद संयोग, यह भी रहा कि आचार्यश्रीजी के द्वारा सबसे पहले गृहस्थ जीवन सबसे छोटे भ्राता को मिली और अंतिम मुनि दीक्षा सबसे बड़े भ्राता को...._
_शायद आपको स्मरण हो पिछले कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर अद्वितीय निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर जी महाराज की हास्य मिश्रित बुंदेली में छोटी सी कविता में आचार्यश्रीजी और अष्टगे परिवार का परिचय प्रचारित हुई थी_
_शायद पूज्यवर के भाव इस प्रकार थे...._
_मंझले, बड्डे हो गये_
_बड्डे, हल्के हो गये_
_हल्के, मंझले हो गये_
_और सझले सन्झले ही रह गए_
_आज सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरजी में मुनि दीक्षाएँ सम्पन्न होने जा रहीं हैं_
_आचार्यश्री से प्रथम दीक्षित मुनिराज वर्तमान के आचार्यश्रीजी के करकमलों से आज पहली बार दीक्षाएं हो रहीं है लेकिन पिछले 46 वर्षों से हो रही मुनि दीक्षाओं की तरह मन कहता है कि, सिद्धक्षेत्र मुक्तगिरि में आज भी आचार्यश्रीजी वही चिरपरिचित मुद्रा में उसी सिंहासन पर विराजित रहेंगे_
_हो सकता है कुछ देर के लिये उनकी वही चिरपरिचित जानी पहचानी मुद्रा किंचित बदली सी लगे_
_लेकिन यदि जरा ध्यान से देखेंगे तो दीक्षा के समय भव्य, विशाल मंच पर आचार्यश्रीजी ही अपनी मोहक मुद्रा में ही नजर आएंगे_
_हो सकता है यह मेरा अपना भ्रम हो..... लेकिन अब करें तो क्या करें.... नजरें तो नजरें है कैसे समझाएं मन को आचार्यश्रीजी ओझल भी तो नहीं हो पाते इतनी आसानी से...._
_शब्द, भाव ,अनुभूति प्रसून मम आराध्य आचार्यश्रीजी के पावन चरणों में....._
_राजेश जैन भिलाई_
????️??️???? |
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2026-02-19 15:51:49 |
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