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Mumukshu mandal?♂️ |
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*सुप्रभात अध्यात्म कणिका=*
तत्व जो ,असीमित है,उसे शब्दों की सीमा में,
कर दिया सीमित,,और पुरुषार्थ मान लिया=
संकेत था जो,, मंजिल तक पहुंचने का,,
मात्र जान लेने को,, प्राप्ति ही मान लिया=
बहती हुई पवन क्या,,आंखों से दिखती है?? =
अनुभव में आए बिना,,
आत्म वस्तु नहीं मिलती है==
संख्या से सत्य का,माप नहीं होता=
उत्तर गलत अनंत हो, परंतु सही एक ही होता है=
अनादि के मिथ्यात्व से छूट ही ,अब जाना है=
दृष्टि स्व सम्मुख कर,निज ज्ञायक को पाना है=
सुख,दुख की ,धूप ,छाँव रोक नहीं पाएगी=
*पूर्णता के लक्ष्य से ही,मंजिल मुझे मिल जाएगी=*
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?= *पुष्पलता जैन भोपाल=*
२८२०। *14/06/2026=* |
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2026-06-14 07:12:50 |
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